0  01 Jan, 1970
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Irfan And Another Vs. State Of U.P. And Another

  Allahabad High Court Application U/S 482 No. 10328 Of 2022
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“ प्रकाशनार्थ स्वीक

ृत”

निनर्ण य सुरक्षित - 01.09.2022

निनर्ण य उद्घोनि!त - 14..09.2022

न्यायालय क सं० - 84

सम उच्च न्यायालय , ेत्राक्षि+कार इलाहाबाद

प्रार्थ नापत्र अन्तर्ग त +ारा 482 संख्या-10328/2022

इरफान व एक अन्य --- आवेदक

द्वाराः - अनिमत डार्गा, अक्षि+वक्ता

प्रक्षित

उत्तर प्रदेश राज्य व एक अन्य --- निवपीर्गर्ण

द्वाराः- परिरतो! मालवीय, अक्षितरिरक्त शासकीय अक्षि+वक्ता

अऩुक्रमणिर्णका

क्रमांक

निववरर्ण प्रस्तर संख्या

(क) पार्श्व भूनिम 1 लर्गायत 6

(ख) आवेदक र्गर्ण का प 7 लर्गायत 11

(र्ग) राज्य सरकार का प 12 लर्गायत 14

(घ) प्रासंनिर्गक निवक्षि+ प्राव+ान15

(ङ) निर्गरोहबन्द अक्षि+निनयम की निवक्षि+16 लर्गायत 20

(च) उच्च न्यायालय की अन्तर्निननिहत शनिक्तयाँ21 लर्गायत 27

(छ) निवश्ले!र्ण 28 लर्गायत 31

(ज) निनष्क! 32

******

माननीय सौरभ श्याम शमशेरी , न्यायमूर्तित

( क ) पार्श्व भूनिमः -

1. आवेदक, इरफान व फहीम उफ फईम के निवरूद्ध रनिवन्द्र क

ुमार

, र्थाना

प्रभारी, अजीम नर्गर, रामपुर, उत्तर प्रदेश द्वारा +ारा 154 दण्ड प्रनिक्रया संनिहता के

अंतर्ग त एक प्रर्थम सूचना रिरपोर्ट संख्या 0350 व! 2020, निदनांक 27.11.2020

घैम्रखिड़औ्रोऩरुखिऔखिरुग्ढोघग्बोहोर्गपर्गर्गद्वरिर्श्वऩद्वअख्/ए8अ

2

को उत्तर प्रदेश निर्गरोहबन्द और समाज निवरो+ी निक्रयाकलाप (निनवारर्ण) अक्षि+निनयम,

1986 (संेप मे निर्गरोहबन्द अक्षि+निनयम) की +ारा 3(1) के अंतर्ग त दज कराई

जिजसका पुनरूत्पादन निनम्न हैः-

“तहरीर जुबानी वादी बयान निकया मैं एसओ रनिवन्द्र कुमार मय एक

जरब निपस्र्टल मय 10 कार० मय हमराह का० 147 पुनीत कुमार मय एक

जरब इंसास राय० मय 20 कार० मय का० 14 +मhन्द्र कुमार मय एक जरब

इंसास राय० मय 20 कार० मय जीप सरकारी नं० यूपी 22 जी 0396 के

मय चालक का० अरुर्ण कुमार के बाद देख रेख शांक्षित व्यवस्र्था, र्गस्त व

चैकिंकर्ग पैर्ट्रोल पम्प, बस स्र्टेण्ड,र्टेक्सी स्र्टेण्ड चैकिंकर्ग, वाहन चैकिंकर्ग, ढावे

चैकिंकर्ग, चैकिंकर्ग संनिदग्+ वाहन/व्यनिक्त व भ्रमर्ण से र्थाना हाजा मय अनुमोदन

शुदा र्गैंर्ग चार्ट र्गैंर्गलीडर इरफान पुत्र स्व० इमरान निन० र्गर्ण ग्राम खेड़ा र्टांडा

र्थाना अजीमनर्गर रामपुर के उपस्थिस्र्थत र्थाना आकर दाखिखल निकया जांच से

अणिभ० र्गर्ण 1. इरफान पुत्र स्व० इमरान उम्र 46 व! 2.फहीम उफ फईम

पुत्र मुमताज उफ कलुआ उम्र 36 व! निन० र्गर्ण ग्राम खेड़ा र्टांडा र्थाना

अजीमनर्गर रामपुर द्वारा अपने ेत्र व आसपास में अपने कृत्यों से आतंक व

भय व रो! व्याप्त कर रखा है जनता इनके निवरुद्ध रिरपोर्ट खिलखाने का साहस

नही कर पाती है इस निर्गरोह के र्गैंर्ग लीडर द्वारा बलात्कार/छेड़छाड़ जैसे

कृत्य करके अपने व अपने सदस्यो का भौक्षितक लाभ कमाना है यह र्गैंर्ग

समाज निवरो+ी निक्रया कलाप करना इनका पेशा बन र्गया है इनका

आपराक्षि+क इक्षितहास 1. मु०अ०सं० 623/2019 +ारा 376डी/506

भादनिव चालानी र्थाना कोतवाली जनपद रामपुर 2. 964/2019 +ारा

354/506 भादनिव चालानी र्थाना जिसनिवल लाइंस जनपद रामपुर है। इनकी

र्गक्षितनिवक्षि+यो पर अंकुश लर्गाया जाना अक्षित आवश्यक है इनके निवरुद्ध उत्तर

प्रदेश निर्गरोहबंद एवं समाज निवरो+ी निक्रया कलाप निनवारर्ण अक्षि+० का

अणिभयोर्ग पंजीकृत निकया जा रहा है। जो बोला वही खिलखा है। रवाना शुदा

3

अस्लाहा व कारतूस अन्दर मालग्रह रखवाकर ताला बन्द ठीक मालग्रह

संतरी पहरा को निदखाया र्गया चावी पूव वत रही चाज र्थाना स्वयं ग्रहर्ण

निकया।” (महत्ता प्रदान की र्गई)

2. आवेदकर्गर्ण के निवरूद्ध निर्गरोह सारर्णी (र्गैंर्ग चार्ट ) व उसके अनुमोदन

की काय वाही निनम्न हैः-

"र्गैंर्ग चार्ट र्गैंर्ग लीडर इरफान पुत्र स्व० इमरान निनवासी खेड़ा र्टाण्डा अजीमनर्गर

जनपद रामपुर

अणिभयुक्त का नाम व

पता

वत मान

स्थिस्र्थक्षित

उम्रमु०अ०सं०623/2019

+ारा 376डी/506 भादनिव

चालानी र्थाना कोतवाली

जनपद रामपुर आरोप पत्र

सं०05/2020 निदनांक

15.01.2020

मु०अ०सं० 964/2019

+ारा 354/506 भादनिव

चालानी र्थाना जिसनिवल लाईन

जनपद रामपुर आरोप पत्र

सं०82/ 2020

निदनांक14.03.2020

PJ

1इरफान पुत्र स्व०

इमरान निन० ग्राम

खेडा र्टाण्डा र्थाना

अजीमनर्गर जनपद

रामपुर

P 46 ✓ ✓

2फहीम उफ फईम

पुत्र मुमताज उफ

कलुआ निन० ग्राम

खेडा र्टाण्डा र्थाना

अजीमनर्गर जनपद

रामपुर

P 36 ✓ ✓

श्रीमान जी,

निनवेदन है निक इरफान पुत्र स्व० इमरान निन० ग्राम खेडा र्टाण्डा र्थाना

अजीमनर्गर जनपद रामपुर ने अपना संर्गनिठत निर्गरोह बना रखा है। जिजसका र्गैंर्ग लीडर

इरफान स्वयं है इस र्गैंर्ग के सदस्य फहीम उफ फईम उपरोक्त ने अपने निर्गरोह के

सदस्यो के सार्थ निमलकर मनिहला के बलात्कार/छेड़छाड़ जैसे अपरा+ कारिरत निकये

है। इस निर्गरोह का ेत्र में इतना आतंक व भय व्याप्त है निक इनके निवरुद्ध कोई भी

जनता का व्यनिक्त न तो र्गवाही देने का और न ही प्रर्थम सूचना रिरपोर्ट दज कराने का

4

साहस कर पा रहा है इस र्गैंर्ग से जनता मे रो! व भय व्याप्त है। इस निर्गरोह द्वारा

मनिहला के बलात्कार/छेड़छाड़ जैसे जघन्य अपरा+ कारिरत करके अपने व अपने

र्गैंर्ग के सदस्य के खिलये भौक्षितक लाभ प्राप्त करने हेतु बलात्कार करना है इसका ेत्र

में स्वतन्त्र निवचरर्ण करना जननिहत में उक्षिचत नही है। अणिभ० र्गर्ण की अपरा+ स्थिस्र्थक्षित

र्गैंर्ग चार्ट में अंनिकत है अणिभ०र्गर्ण का उक्त कृत्य उ०प्र० निर्गरोहबन्+ एवं समाज

निवरो+ी निक्रया कलाप निनवारर्ण अक्षि+०1986 की +ारा 3(1) के अन्तर्ग त दण्डनीय

अपरा+ है जननिहत में इन अणिभयुक्तो के निवरुद्ध काय वाही निकया जाना आवश्यक है।

नोर्टः- श्रीमान जी उपरोक्त अणिभयुक्तो के निवरुद्ध उपरोक्त मुकदमों में र्थाना हाजा पर

पूव में कोई र्गैंर्गस्र्टर का मुकदमा पंजीकृत नही है।

अतः अनुरो+ है निक र्गैंर्ग चार्ट अनुमोनिदत करने की कृपा करें।

ह० अप०

जिजलाक्षि+कारी

ह० अप०

पुखिलस अ+ीक

ह० अप०

वरिरष्ठ पुखिलस

अ+ीक

ह० अप०

उप जिजलाक्षि+कारी

ह० अप०

ेत्राक्षि+कारी

ह० अप०

रनिवन्द्र क

ुमार संबंक्षि+त ब्यान र्गवाह नईमा पत्नी मौ

. तलहा व संबंक्षि+त ब्यान र्गवाह

हसीबा पुत्री अतउह मान लेखबद्ध निकये र्गये जो निनम्न वर्णिर्णत निकये जा रहे हैं:-

अजीमनर्गर रामपुर पीएनओ 962282269 मो० नं० 8218358692 ने

र्गैंर्गलीडर इरफान पुत्र स्व० इमरान निन०र्गर्ण ग्राम खेड़ा र्टांडा र्थाना

अजीमनर्गर रामपुर ने अपने नेतृत्व में एक सुसंर्गनिठत सनिक्रय निर्गरोह बना रखा

है। जिजसका वह स्वयं र्गैंर्ग लीडर है तर्था अणिभयुक्तर्गर्ण 1- इरफान पुत्र स्व०

5

इमरान उम्र 46 व! , 2- फहीम उफ फईम पुत्र मुमताज उफ कलुआ उम्र

36 व! निन० र्गर्ण ग्राम खेड़ा र्टांडा र्थाना अजीमनर्गर रामपुर सनिक्रय सदस्य

है। इन दोनो के द्वारा अपने ेत्र व आस पास से अपने कृत्यों से आतंक व

भय व रो! व्याप्त कर रखा है जनता इनके निवरुद्ध रिरपोर्ट खिलखाने का साहस

नही कर पाती है इस निर्गरोह के र्गैंर्ग लीडर द्वारा बलात्कार/छेड़छाड़ जैसे

कृत्य करके अपने व अपने सदस्यों का भौक्षितक लाभ कमाना है यह र्गैंर्ग

समाज निवरो+ी निक्रया कलाप करना इनका पेशा बन र्गया है इनका

आपराक्षि+क इक्षितहास 1- मु०अ०सं०623/2019 +ारा 376डी/506

भादनिव चालानी र्थाना कोतवाली जनपद रामपुर, 2- 964/2019 +ारा

354/506 भादनिव चालानी र्थाना जिसनिवल लाइंस जनपद रामपुर है। इनकी

र्गक्षितनिवक्षि+यो पर अंकुश लर्गाया जाना अक्षित आवश्यक है इनके निवरुद्ध श्रीमान्

जिजलाक्षि+कारी महोदय रामपुर व उच्चाक्षि+कारीर्गर्णों द्वारा अनुमोनिदत र्गैंर्ग चार्ट

प्राप्त कर इनके निवरुद्ध उ०प्र०निर्गरोहबन्द समाज निवरो+ी निक्रया कलाप

(निनवारर्ण) अक्षि+० 1986 की +ारा 3(1) के अन्तर्ग त अणिभयोर्ग पंजीकृत

कराया र्गया र्था अणिभयुक्तर्गर्ण उपरोक्त अर्जिजत +न को अपने ऐशो अराम में

खच करते है। इनका जनता में इतना भय व आतंक व्याप्त है निक जनता का

कोई भी व्यनिक्त इनके निवरुद्ध र्थाने में रिरपोर्ट खिलखाने व र्गवाही देने का साहस

नही कर पाता है। इन अणिभयुक्तो का समाज में स्वतंत्र रहना समाज के निहत

में सही नही है। यही मेरा बयान है।"

" बयान र्गवाह सम्बस्थिन्+त मु०अ०सं० 623/19 +ारा 376 डी /506 भादनिव

चालानी र्थाना कोतवाली रामपुर व मु०अ०सं० 964/19 +ारा 354/506

भादनिव चालानी र्थाना जिसनिवल लाईन रामपुर श्रीमती नईमा पत्नी मौ० तलहा

निन० ग्राम दौकपुरी र्टांडा र्थाना अजीमनर्गर जनपद रामपुर ने पूछने पर

बताया निक मेरा नाम नईमा है मेरे पक्षित का नाम मौलवी तलहा तर्था मै ग्राम

दोकपुरी र्टांडा र्थाना अजीमनर्गर जनपद रामपुर की रहने वाली हूँ। मै निदनांक

6

16-11-2019 को निदन में समय करीब 02.00 बजे दोपहर दवा लेकर

जिजला अस्पताल रामपुर से अपने घर आने के खिलये सड़क पर सवारी का

इंतजार कर रही र्थी तभी मेरे र्गांव के इरफान पुत्र स्व० इमरान निनवासी ग्राम

खेडा र्टांडा र्थाना अजीमनर्गर जनपद रामपुर व फहीम उफ फईम पुत्र

मुमताज उफ कलुआ निनवासीर्गर्ण ग्राम खेडा र्टांडा र्थाना अजीमनर्गर जनपद

रामपुर एक कार मेें जिजसको एक व्यनिक्त जिजसे मै पहचानती नही र्थी चला रहा

र्था मेरे पास आकर रुके और इरफान ने मुझसे पूछा कैसे खडी हो मैने घर

जाने की बात उन्हे बताई तो उन्होने कहा निक हम भी घर जा रहे है चलो

तुम्हे भी घर छोड़ देर्गे, मैने निवर्श्वास करके उनकी र्गाडी में बैठ र्गयी उन्होने

मुझे कोल्ड्रीक निपलायी जिजसमें कुछ नशीला पदार्थ र्था और मुझे जंर्गल की

तरफ ले र्गये जहाँ ईख के खेत में ले जाकर तीनो ने बारी बारी मेरे सार्थ

बलात्कार निकया तर्था जान से मारने की +मकी दी मैने अपनी बहन हसीबा

को उस बावत फोन से सूचना दी वो भी घरवालो को लेकर मौके पर आ र्गये

र्थे जिजनको मैने सारी बात बतायी उक्त घर्टना के सम्बन्+ में मैने

18.11.2019 को र्थाना कोतवाली रामपुर में रपर्ट खिलखायी र्थी यही मेरे

बयान है। इस तरह वानिदनी/ पीनिड़ता एफ०आई०आर० को तस्दीक कर

बयान दे रही है इसके उपरान्त बताया निक मै निदनांक 27.11.19 को कप्तान

साहब से निमलकर कचहरी में 164 द०प्र०सं० के बयान नकल लेने के खिलये

र्गयी र्थी वहाँ मुझे कचहरी में इरफान उफ इमरान, फईम पुत्र मुमताज इनके

सार्थ2 व्यनिक्त और र्थे जिजन्हे मैं नही जानती र्थी यह लोर्ग मुझे देखकर मेरे

पीछे पीछे चल निदये नूरमहल के पास आकर इन्होने मुझे पकड़ खिलया और

मेरे सार्थ बदतमीजी निक तर्था मेरी छाती पकड़ ली और मुझसे मेरे द्वारा पूव

में खिलखाये बलात्कार के मुकदमे को वापस करने को कहने लर्गे न करने पर

जान से मारने की +मकी दी मेरे शोर मचलाने पर वे लोर्ग भार्ग र्गये। मैने

112 नम्बर पर काल की तो वहां पुखिलस आ र्गयी व मुझे र्थाना जिसनिवल

लाईन जाने को कहा निफर मै अपनी दूसरी बहन के सार्थ जिसनिवल लाईन र्थाने

7

र्गये उस निदन वहा मेरी रिरपोर्ट नही खिलखी र्गयी। निदनांक 30.11.2019 को

मेरी रपर्ट खिलखी र्गयी दोनो मुकदमें मैने ही खिलखाये है इस तरह

वानिदनी/पीनिड़ता दोनो एफ०आई०आर को तस्दीक करते हुये बयान दे रही

है बयान लेखबद्ध सीडी निकये जाते है।"

" बयान र्गवाह - मु०अ०सं० 623/19 +ारा 376 डी /506 भादनिव चालानी

र्थाना कोतवाली रामपुर से संबंक्षि+त र्गवाह हसीबा पक्षित अतख रहमान निन०

ग्राम दौकपुरी र्टांडा र्थाना अजीमनर्गर जनपद रामपुर ने पूछने पर बताया निक

निदनांक 16.11.2019 को मेरी बहन नईमा ने मुझे फोन से बताया र्था निक

रामलीला ग्राउन्ड से पास ईख के खेत में मेरे सार्थ बलात्कार की घर्टना

इमरान व फईम व 01 अन्य व्यनिक्त ने की है जिजसकी रिरपोर्ट र्थाना कोतवाली

में निदनांक 18.11.2019 को नईमा द्वारा खिलखायी र्गयी तर्था निदनांक

27.11.2021 को नूरमहल के पास इरफान ने नईमा की बलात्कार का

मुकदमा वापस लेने की +मकी दी र्थी और बुरी निनयत से उसके पकड़ खिलया

र्था जिजसकी सूचना 112 नम्बर को दी र्थी इसका मुकदमा निदनांक

30.11.2019 को र्थाना जिसनिवल लाईन रामपुर में खिलखाया र्था जो मैने देखा

व सुना आपको बता निदया है। यही मेरी बयान है। इस तरह र्गवाहान

एफआईआर का समर्थ न करते हुये बयान दे रही है जिजसे लेखबद्ध सीडी

निकया र्गया।" (महत्ता प्रदान की र्गई)

4. अन्वे!र्ण के दौरान आवेदकर्गर्ण/अपरा+ीर्गर्ण से भी कई बार पूछताछ

की र्गई जैसा की वत मान प्रार्थ ना पत्र के प्रस्तर नं० 18 मे वर्णिर्णत है।

5. जाँच अक्षि+कारी ने अन्वे!र्ण के उपरान्त, आरोप पत्र संख्या 191/21

निदनांक 29.07.2021, दोनो आवेदक के द्वारा निर्गरोह बन्द अक्षि+निनयम के +ारा

3(1) के अंतर्ग त अपरा+ कारिरत होने के पया प्त साक्ष्य मौजूद होने के कारर्ण

न्यायालय को प्रेनि!त की। न्यायालय द्वारा अवलोकन कर निदनांक 19.08.2021 को

8

संज्ञान खिलया र्गया व आदेश निदनांक 19.08.21 के द्वारा अणिभय

ुक्तर्गर्ण के निवरूद्ध

सम्मन जारी निकया र्गया, जो निनम्न उद्दरिरत निकया जा रहा हैः-

“19.08.21

आज यह आरोप पत्र अन्तर्ग त मु०अ०सं० 350/2020

अं०+ारा 3(1) जी० एक्र्ट र्थाना अजीमनर्गर जिजला रामपुर की पुखिलस द्वारा

अणिभ०र्गर्ण (1) इरफान, (2) फहीम उफ फईम के निवरूद्ध प्रस्तुत निकया

र्गया।

केस डायरी व अन्य प्रपत्रो के अवलोकन से निवनिदत होता है निक

अणिभ० र्गर्ण के निवरूद्ध र्गैंर्ग चार्ट में अणिभ०र्गर्ण (1) इरफान (2) फहीम उफ

फईम के निवरुद्ध मु०अ०सं० 623/19 अं०+ारा 376डी/506

आई०पी०सी० व अ०सं० 964/19 अं०+ारा 354/506 आई०पी०सी०

में अपरा+ दज है। अतः के स डायरी व अन्य प्रपत्रो के अवलोकन से निवनिदत

है निक अणिभ०र्गर्ण (1) इरफान (2) फहीम उफ फईम के निवरूद्ध +ारा-

3(1) जी० एक्र्ट में संज्ञान लेने हेतु आ+ार पया प्त है। अतः उक्त

अणिभयुक्तर्गर्ण के निवरूद्ध +ारा- 3(1) जी० एक्र्ट में संज्ञान खिलया जाता है।

अणिभ०र्गर्ण द्वारा मा० उच्च न्यायालय द्वारा पारिरत आदेश निदनांनिकत

18.01.21 व 22.02.21 प्रस्तुत निकया र्गया है। अणिभ०र्गर्ण अद्यतन आदेश

प्रस्तुत करे। अणिभ०र्गर्ण के निवरूद्ध सम्मन निदनांक 08.09.21 के खिलए जारी

हो।"

6. आवेदकर्गर्ण ने वत मान आवेदन दण्ड प्रनिक्रया संनिहता की +ारा 482

के अंतर्ग त दायर निकया र्गया है, जिजसके द्वारा उपरोक्त वर्णिर्णत आरोप पत्र निदनांक

29.07.2021 व एस.एस.र्टी. 46/2021 (सरकार बनाम इरफान आनिद), अपरा+

संख्या - 350/2020, अंतर्ग त +ारा 3(1) निर्गरोहबन्द अक्षि+निनयम, र्थाना -

अजीम नर्गर, जिजला- रामपुर, में अपर सत्र न्याया+ीश, न्यायालय -3 रामपुर द्वारा

9

जारी सम्मन आदेश पत्र निदनाँक 19.08.21 व समस्त काय वाही को निनरस्त करने

की प्रार्थ ना की है।

( ख ) आवेदकर्गर्ण का प

7. आवेदकर्गर्ण का प उनके निवद्वान अक्षि+वक्ता श्री अनिमत डार्गा ने

प्रबलता से इस न्यायालय के सम रखा निक यह एक निवद्वे!पूर्ण काय वाही है।

आवेदक संख्या एक पूव मे र्गाँव का प्र+ान रहा है, परन्तु हाल मे ह

ुए चुनाव में

उसको हार निमली व आवेदक संख्या दो उसका रिरश्तेदार है। निर्गरोह सारर्णी में

उल्लेखिखत दोनो मामलो की णिशकायतकता श्रीमती नईमा के पक्षित तल्हा एक मदरसे मे

मौलवी हैं जहां और बच्चो के सार्थ आवेदक संख्या 3 की भतीजी भी पढ़ती र्थी। वहां

उसके सार्थ उक्त मौलवी ने छेड़छाड़ की व बलात्कार की कोणिशश की, जिजस पर

उसके निवरूद्ध एक प्रर्थम सूचना (अपरा+ सं० 84 व! 2019) +ारा 354 ख

भा.दं.सं. व 7/8 पाक्सो अक्षि+निनयम के अन्तर्ग त दज ह

ुई

, जिजस पर आरोप पत्र

(अन्तर्ग त +ारा 376 AB, 506 व 5एम/6 पाक्सो अक्षि+निनयम) प्रेनि!त ह

ुआ व

निवचारर्ण के बाद उक्त मौलवी के निवरुद्ध सत्र न्यायालय द्वारा उक्त आरोपों के जिसद्ध

हो जाने के फलस्वरूप निनर्ण य व आदेश निदनांक 14.12.2020 द्वारा 20 व! का

सश्रम कारावास ह

ुआ

, जिजसकी अपील इस न्यायालय में लस्थिम्बत है। इस कारर्णवश

निर्गरोह सारर्णी में उल्लेखिखत मामलों की णिशकायताकता निवद्वे! रखती है, इसखिलए

उनके निवरूद्ध दो असत्य मुकदमे दज कराये हैं। निवद्वान अक्षि+वक्ता ने कर्थन निकया निक

उन दो मामलो मे आवेदकर्गर्ण को जमानत निमल र्गई है और आरोप पत्र दाखिखल

निकया जा चुका है।

8. श्री अनिमत डार्गा, अक्षि+वक्ता ने आर्गे निनवेदन निकया निक वत मान प्रकरर्ण

मे जाँच अक्षि+कारी ने दोनों मामलों के णिशकायताकता का ब्यान दज निकया व कई

क्षितणिर्थयों पर आवेदकर्गर्ण से पूछताछ की और जब उनको निहरासत में लेने का भय

ुआ तो उन्होने एक रिरर्ट याक्षिचका नं०

17698/2020 इस न्यायालय के सम

10

दाखिखल की, जिजसमें इनके निवरूद्ध उत्पीड़न काय वाही न करने का अंतरिरम आदेश

पारिरत ह

ुआ जो अभी भी प्रभावी है।

9. श्री अनिमत डार्गा, अक्षि+वक्ता ने यह भी कर्थन निकया निक अन्वे!र्ण के

दौरान आवेदकर्गर्ण के निवरूद्ध कोई भी निवर्श्वसनीय और ठोस साक्ष्य संग्रनिहत नहीं

निकये र्गये हैं, निक आवेदकर्गर्ण ने कोई निर्गरोह का निनमा र्ण कर रखा है या +ारा 3(1)

निर्गरोहबन्द अक्षि+निनयम के अन्तर्ग त अपरा+ कारिरत निकया है। आरोप पत्र मात्र दो

आपराक्षि+क मामले के पीक्षिडत व णिशकायतकता के ही साक्ष्य के ब्यान पर आ+ारिरत

है। कोई भी स्वतन्त्र साक्ष्य का ब्यान लेखबद्ध नही निकया र्गया है। उक्त अपरा+ का

संज्ञान व आवेदकर्गर्ण को सम्मन भी सत्र न्यायालय ने न्याक्षियक मानस से नहीं निकया

है। पत्रावली पर कोई भी ऐसा साक्ष्य नहीं है निक आवेदकर्गर्ण ने लोक व्यवस्र्था को

अस्त-व्यस्त निकया है या निकसी लाभ के उद्देश्य से समाज निवरो+ी निक्रयाकलाप

निकया है या जनता में दहशत, संत्रास या आतंक फै लाया हो।

10. निवद्वान अक्षि+वक्ता ने समक न्यायालय द्वारा तेज सिंसह प्रक्षित उत्तर

प्रदेश राज्य व एक अन्यः 2019 एससीसी आनलाईन एएलएल 5083 के मामले में

पारिरत निनर्ण य पर भरोसा जताया जहाँ, यह निन+ा रिरत निकया र्गया है निकः-

"XXX यह आकलन करना महत्वपूर्ण है निक अपरा+ी द्वारा कारिरत अपरा+

क्या अनुक्षिचत दुनिनयाबी, आर्णिर्थक या भौक्षितक लाभ के उद्देश्य से प्रेरिरत और

अनुबंक्षि+त है या नही। अपरा+ का उद्देश्य या उसका प्रयोजन निनर्णा यक

होर्गा, निक निर्गरोहबन्द अक्षि+निनयम के प्राव+ान क्या निकसी वस्तुतः मामले मे

अनुप्रयोर्ग निकये जाये या नही।"

“XXX जब कभी भी कोई र्गंभीर अपरा+ कारिरत होता है तो परिरर्णाम स्वरूप

हमेशा समाज मे निकसी न निकसी प्रकार का व्यव+ान होता ही है वो समाज मे

सामान्य व्यव+ान और लोक व्यवस्र्था का अस्त व्यस्त होना या संत्रास

अर्थवा आतंक का उत्पन्न होना अलर्ग-अलर्ग भ्रांक्षित है। निवक्षि+ एवं व्यवस्र्था

11

की सामान्य समस्या को लोक व्यवस्र्था के व्यव+ान की संवृखित्त से संयोजिजत

नही निकया जा सकता है। XXX”

(उपरोक्त अनुवाद न्यायालय द्वारा निकया र्गया है।)

11. अन्त मे निवद्वान अक्षि+वक्ता ने कर्थन निकया निक ऐसा कोई साक्ष्य

संग्रनिहत नहीं निकया र्गया है, जो आवेदकर्गर्ण के निवरूद्ध +ारा 3(1) निर्गरोहबन्द

अक्षि+निनयम मे वर्णिर्णत अपरा+ के अवयव को दशा ता हो। अतः यह न्यायालय अपनी

अन्तर्निननिहत शनिक्तयों का उपयोर्ग करते ह

ुए आवेदकर्गर्ण के निवरूद्ध दंण्डनीय

काय वाही को निनरस्त करे।

( र्ग ) राज्य सरकार का पः -

12. उपरोक्त के निवपरीत, राज्य शासन का प, श्री परिरतो! मालवीय

निवद्वान अक्षितरिरक्त शासकीय अक्षि+वक्ता, ने पुरजोर रखा, निक आवेदकर्गर्णो द्वारा अपने

ेत्र व आसपास में अपने क

ृत्यो से आतंक व रो! व्याप्त कर रखा है निक जनता इनके

निवरूद्ध रिरपोर्ट खिलखाने का साहस नहीं कर पा रही है। ये बलात्कार, छेड़छाड़ जैसे

ृत्य करके अपना व निर्गरोह के सदस्यों को भौक्षितक लाभ कमाते हैं। इनकी

र्गक्षितनिवक्षि+यों पर अंक

ुश लर्गाया जाना अक्षित आवश्यक है

, इसखिलए निर्गरोहबन्द

अक्षि+निनयम के अंतर्ग त प्रर्थम दृष्टवा अपरा+ दृनिष्टर्गोचर होता है। इनके निवरूद्ध दो

मुकदमा अपरा+ पंजीक

ृत हुए हैं जिजनमें आरोप पत्र सामूनिहक बलात्कार

(+ारा 376

घ) व स्त्री की लज्जा भंर्ग (+ारा 354 व 506) जैसे र्गंभीर अपरा+ में प्रेनि!त निकया

जा चुका है।

13. परिरतो! मालवीय, अक्षितरिरक्त शासकीय अक्षि+वक्ता ने यह भी कर्थन

निकया निक निर्गरोह सारर्णी मे उपरोक्त दो आपराक्षि+क मामलों को सूचीबद्ध निकया र्गया

है, व जाँच के दौरान उन मामलों की पीक्षिडता का साक्ष्य भी लेख बद्ध निकया र्गया है,

निक आवेदकर्गर्ण ने उसके सार्थ बलात्कार निकया व प्रर्थम सूचना रिरपोर्ट को वापस

लेने के खिलए दबाव भी डाला व लज्जा भंर्ग भी करी और यह भी कर्थन निकया निक

12

इनके भय के कारर्ण इनके निवरूद्ध कोई प्रर्थम सूचना रिरपोर्ट दज कराने का साहस

नहीं कर पाता है और उसने निर्गरोहबन्द के अन्तर्ग त प्रर्थम सूचना रिरपोर्ट के तथ्यों

की पुनिष्ट भी की। अतः +ारा 3(1) निर्गरोह बन्द के अवयव प्रर्थम दृष्टवा निवद्यमान हैं

तर्था इस स्तर पर आपराक्षि+क काय वाही को अचानक मृत्य

ु नही दी जा सकती है

,

तर्था वत मान प्रकरर्ण के तथ्य तेज सिंसह (पूव मे उजिल्लखिखत) से णिभन्न है। जैसा निक

वत मान प्रकरर्ण में यह साक्ष्य संग्रनिहत है, निक आवेदकर्गर्ण के क

ृत्यों के कारर्ण जनता

में दहशत है और उनके निवरूद्ध प्रर्थम सूचना रिरपोर्ट खिलखाने से घबराते हैं और अर्गर

कोई दज कराता भी है तो उस पर उसको वापस लेने के खिलए दबाव भी डालते हैं।

14. अतः इनके द्वारा बलात्कार व छेड़छाड़ के अपरा+ कारिरत करने के

कारर्ण लोक व्यवस्र्था का अस्त-व्यस्त करने के खिलए समाज निवरो+ी निक्रया कलाप

करते है जो भारतीय दंड संनिहता के अध्याय 16 के अंतर्ग त दण्डनीय अपरा+ है।

( घ ) प्रासंनिर्गक निवक्षि+ प्राव+ानः -

15. वत मान प्रकरर्ण के खिलये निर्गरोहबन्द की अक्षि+निनयम व भारतीय दण्ड़

संनिहता की निनम्न +ाराओ

ं का उल्लेख करना समीचीन रहेर्गाः

-

निर्गरोहबन्द अक्षि+निनयम

“2. परिरभा!ा - इस अक्षि+निनयम में, -

(क) ’’संनिहता’’ का तात्पय दंड प्रनिक्रया संनिहता, 1973 से है;

(ख) ’’निर्गरोह’’ का तात्पय ऐसे व्यनिक्तयों के समूह से है जो लोक-व्यवस्र्था

को अस्त-व्यस्त करने या अपने या निकसी अन्य व्यनिक्त के खिलए कोई

अनुक्षिचत दुनिनयावी (र्टेम्पोरल), आर्णिर्थक, भौक्षितक या अन्य लाभ प्राप्त करने

के उद्देश्य से या तो अके ले या समूनिहक रूप से किंहसा, या किंहसा की +मकी

या प्रदश न, या अणिभत्रास, या प्रपीड़न द्वारा, या अन्य प्रकार से निनम्नखिलखिखत

समाज निवरो+ी निक्रयाकलाप करते हैं, अर्था त्--

13

(एक) भारतीय दण्ड संनिहता के अध्याय 16, या अध्याय 17, या अध्याय

22 के अ+ीन दण्डनीय अपरा+; या

(दो) संयुक्त प्रान्त आबकारी अक्षि+निनयम, 1910 या नारकोनिर्टक ड्रग्स एण्ड

साइक्रोर्ट्रानिपक सब्सर्टैन्सेज एक्र्ट, 1985 या तत्समय प्रवृत्त निकसी अन्य

निवक्षि+ के निकन्हीं उपबन्+ो का उल्लंघन निकसी शराब या मादक या अनिनष्टकर

मादक द्रव्य या अन्य मादकों या स्वापकों का अवसान या निनमा र्ण या संग्रह

या परिरवहन या आयात या निनया त, या निवक्रय या निवतरर्ण या निकन्हीं पौ+ों

की खेती करना; या

(तीन) निवक्षि+ सम्मत प्रनिक्रया से णिभन्न प्रनिक्रया द्वारा स्र्थावर सम्पखित्त पर

अध्यासन करना या कब्जा लेना, या स्र्थावर सम्पखित्त पर चाहें स्वयं या अन्य

(चार) निकसी लोक सेवक या निकसी साी को अपने निवक्षि+पूर्ण कत्व यों का

पालन करने से रोकना या रोकने के खिलए प्रयत्न करना; या

(पाॅच) स्त्री तर्था लड़की अनैक्षितक व्यापार दमन अक्षि+निनयम, 1956 के

अ+ीन दण्डनीय अपरा+; या

(छः) साव जनिनक द्यूत अक्षि+निनयम, 1867 की +ारा 3 के अ+ीन दण्डनीय

अपरा+; या

(सात) निकसी सरकारी निवभार्ग, स्र्थानीय निनकाय या साव जनिनक या निनजी

उपक्रम द्वारा या उसकी ओर से निकसी पट्टे या अक्षि+कार के खिलए, या माल के

संभरर्ण या निकये जाने वाले काय के खिलए, निवक्षि+पूव क संचाखिलत निकसी

नीलामी मे बोली लर्गाने या निवक्षि+पूव क मांर्गे र्गये र्टेण्डर देने से निकसी व्यनिक्त

को रोकना; या

(आठ) निकसी व्यनिक्त को अपने निवक्षि+पूर्ण कारबार, वृखित्त, व्यापार या जीनिवका

या उससे सम्बद्ध निकसी अन्य निवक्षि+पूर्ण निक्रयाकलाप को सुचारू रूप से करने

से रोकना या उसमें निवघ्न डालना; या

14

(नौ) भारतीय दण्ड संनिहता की +ारा 171-ड के अ+ीन दण्डनीय अपरा+,

या मतदाता को अपने मताक्षि+कार का प्रयोर्ग करने से शारीरिरक रूप से

रोककर निकसी निवक्षि+पूव क होने वाले निकसी साव जनिनक निनवा चन को रोकना

या उसमे बा+ा डालना; या

(दस) अन्य व्यनिक्तयों को साम्प्रदाक्षियक साम्जस्य मे निवघ्न डालने के खिलए

किंहसा करने के खिलए उद्दीप्त करना; या

(ग्यारह) जनता में दहशत, संत्रास या आतंक फै लाना; या

(बारह) साव जनिनक या निनजी उपक्रमो या कारखानो के कम चारिरयो या

स्वानिमयों या अध्याजिसयों को आतंनिकत करना या उन पर हमला करना और

उनकी सम्पखित्त को हानिन पहुंचाना; या

(तेरह) निकसी व्यनिक्त को इस निमथ्या व्यपदेशन पर निक उसे निवदेश में कोई

सेवायोजन, व्यापार या वृखित्त उपलब्+ करायी जायेर्गी, ऐसे निवदेश मे जाने के

खिलए उत्प्रेरिरत करना या उत्प्रेरिरत करने का प्रयास करना; या

(चैदह) निफरौती उद्यानिपत करने के आशय से निकसी व्यनिक्त का व्यपहरर्ण या

अपहरर्ण करना; या

(पन्द्रह) निकसी वायुयान या साव जनिनक परिरवहन यानो को उसके

पूव निन+ा रिरत मार्ग से जाने से पर्थान्तरिरत करना या अन्यर्था रोकना;

(सोलह)+न उ+ार देने का निवनिनयमन अक्षि+निनयम, 1976 के अ+ीन

दण्डनीय अपरा+;

(सत्रह) पशु का अवै+ रूप से परिरवहन करने और/या तस्करी करने और

र्गोव+ निनवारर्ण अक्षि+निनयम, 1955 और पशुओं के प्रक्षित क्रूरता का निनवारर्ण

(अठ्ठारह) वाणिर्णस्थिज्यक शो!र्ण, बं+ुआ श्रम, बालश्रम, यौन शो!र्ण, अंर्ग

हर्टाने तर्था दुव्य पार, करने, णिभा और समान निक्रया कलापो के प्रयोजनो के

मानव दुव्य पार;

15

(उन्नीस) निवक्षि+ निवरूद्व निक्रयाकलाप (निनवारर्ण) अक्षि+निनयम ,1966 के अ+ीन

दण्डनीय अपरा+;

(बीस) नकली भारतीय करेंसी नोर्टो का मुद्रर्ण, परिरवहन और परिरचालन

करना;

(इक्कीस) अवै+ औ!क्षिद्ध के उत्पादन , निवक्रय और निवतरर्ण मे संलग्न होना;

(बाइस) आयु+ अक्षि+निनयम, 1959 की +ारा 5, 7 और 12 के उल्लंघन मे

आयु+ एवं र्गोला, बारूद के निवनिनमा र्ण, निवक्रय और परिरवहन में संलग्न होना;

(तेइस) भारतीय वन अक्षि+निनयम,1927 और वन्य जीव संरर्ण अक्षि+निनयम,

1972 के उल्लंघन में आर्णिर्थक लाभ के खिलए पेड़ कार्टना या मारना या

उत्पादो की तस्करी करना;

(चैबीस) मनोरंजन और पण्यम कर अक्षि+निनयम, 1979 के अ+ीन दण्डनीय

अपरा+;

(पच्चीस) उन अपरा+ो मे संलग्न होना, जो राज्य की सुरा लोक व्यवस्र्था

और जीवन के रफ्तार को भी प्रभानिवत करते है।

(र्ग) ’’निर्गरोहबन्द’’ का तात्पय निकसी निर्गरोह के सदस्य या सरर्गना या

संर्गठक से है और इसके अन्तर्ग त कोई ऐसा व्यनिक्त भी है जो खण्ड (ख) में

प्रमाणिर्णत निकसी निर्गरोह के निक्रयाकलाप के खिलए, चाहे ऐसे निक्रयाकलाप के

निकए जाने के पूव या पश्चात, दुष्प्रेरिरत करता है या उसमे सहायता देता है,

या निकसी ऐसे व्यनिक्त को जिजसने ऐसे निक्रयाकलाप निकये हों, संश्रय देता है;

(घ) ’’लाके सेवक’’ का तात्पय भारतीय दण्ड संनिहता की +ारा 21 मे या

तत्समय प्रवृत्त निकसी अन्य निवक्षि+ से यर्थापरिरभानि!त लोक सेवक से है और

इसके अन्तर्ग त कोई ऐसा व्यनिक्त भी है जो राज्य की पुखिलस या अन्य

प्राक्षि+कारिरयों को इस अक्षि+निनयम के अ+ीन दण्डनीय निकसी अपरा+ के

अन्वे!र्ण या अणिभयोजन या दण्ड़ मे चाहे ऐसे अपरा+ या अपरा+ी के

सम्बन्+ मे सूचना या साक्ष्य देकर या निकसी अन्य रीक्षित से, निवक्षि+पूव क

सहायता करता है;

16

(ड) ’’निकसी लाके सेवक के कुर्टुम्ब का सदस्य’’ का तात्पय उसके माता-

निपता या पक्षित या पत्नी, और भाई, बनिहन, पुत्र, पुत्री, पौत्र, पौत्री, या इनमें

से निकसी के पक्षित या पत्नी से है और इसके अन्तर्ग त लोक सेवक पर आणिश्रत

या उसके सार्थ निनवास करने वाला कोई व्यनिक्त और कोई ऐसा व्यनिक्त भी है

जिजसके कल्यार्ण में लोक सेवक निहत रखता हो।

(च) इस अक्षि+निनयम में प्रयुक्त निकन्तु अपरिरभानि!त, और दण्ड प्रनिक्रया

संनिहता, 1973 या भारतीय दंड संनिहता मे परिरभानि!त शब्दो और पदों के

क्रमशः वहीं अर्थ होंर्गे जो ऐसी संनिहताओं में उनके खिलए निदए र्गये हैं।

3-शास्थिस्त -(1) निकसी निर्गराहे बन्द को दोनो मे से निकसी भांक्षित के कारावास

से ऐसी अवक्षि+ के खिलए जो दो व! से कम न होर्गी और जो दस व! तक हो

सके र्गी और जुमा ने से भी, जो पांच हजार रूपये से कम नहीं होर्गा, दस्थिण्डत

निकया जायर्गाः

परन्तु निकसी निर्गरोहबन्द को जो निकसी लोक सेवक के शरीर के प्रक्षित या लोक

सेवक के कुर्टुम्ब के निकसी सदस्य के शरीर के प्रक्षित कोई अपरा+ करता है,

दोनो मे से निकसी भांक्षित के कारावास से ऐसी अवक्षि+ के खिलये जो तीन व! से

कम न होर्गी और जुमा ना से भी, जो पांच हजार रूपये से कम नहीं होर्गा,

दस्थिण्डत निकया जायेर्गा।

(2) निकसी ऐसे व्यनिक्त को जो लोक सेवक होते हुये चाहे स्वयं या अन्य के

माध्यम से निकसी निर्गरोहबन्द की निकसी रीक्षित से अवै+ रूप से सहायता या

समर्थ न, चाहे निर्गरोहबन्द द्वारा कोई अपरा+ निकये जाने के पूव या पश्चात्

करता है, या निवक्षि+पूर्ण उपाय करने से निवरत रहता है या इस संबं+ मे निकसी

न्यायालय या अपने वरिरष्ठ अक्षि+कारिरयों के निनदhशो को काया स्थिन्वत करने से

जानबूझकर करता है, दोनो मे से निकसी भांक्षित के कारावास से एेसी अवक्षि+

के खिलए जो दस व! तक की हो सके र्गी, निकन्तु तीन व! से कम न होर्गी और

जुमा ने से भी दंक्षिडत निकया जायर्गा।"

17

भारतीय दंड संनिहता

“506. आपराक्षि+क +मकी के खिलए सजा- जो कोई भी आपराक्षि+क +मकी

का अपरा+ करता है, तो उसे निकसी एक अवक्षि+ के खिलए कारावास जिजसे दो

साल तक बढ़ाया जा सकता है या आर्णिर्थक दंड या दोनों के सार्थ दंक्षिडत

निकया जा सकता है।

यनिद +मकी मृत्यु या र्गंभीर चोर्ट, आनिद के खिलए है - और यनिद +मकी

मौत या र्गंभीर चोर्ट पहुंचाने, या आर्ग से निकसी संपखित्त का निवनाश कारिरत

करने के खिलए, या मृत्युदंड या आजीवन कारावास से दंडनीय अपरा+

कारिरत करने के खिलए, या सात व! तक की अवक्षि+ के कारावास से दंडनीय

अपरा+ कारिरत करने के खिलए, या निकसी मनिहला पर अपनिवत्रता का आरोप

लर्गाने के खिलए हो, तो अपरा+ी को निकसी एक अवक्षि+ के खिलए कारावास

जिजसे सात साल तक बढ़ाया जा सकता है, या आर्णिर्थक दंड, या दोनों के

सार्थ दंक्षिडत निकया जा सकता है।"

“376D. सामूनिहक बलात्संर्ग-जहाँ समूह को र्गनिठत करने वाले या सामान्य

आशय के अग्रसारर्ण में काय करने वाले एक या उससे अक्षि+क व्यनिक्तयों द्वारा

स्त्री से बलात्संर्ग निकया जाएर्गा, वहाँ यह समझा जायेर्गा निक उन व्यनिक्तयों में

से प्रत्येक ने बलात्संर्ग का अपरा+ कारिरत निकया है और कठोर कारावास से,

जिजसकी अवक्षि+ बीस व! से कम नहीं होर्गी, निकन्तु जो आजीवन तक की हो

सके र्गी, जिजसका तात्पय उस व्यनिक्त के नैसर्निर्गक जीवन के शे! के खिलए

कारावास से होर्गा, और जुमा ने से दस्थिण्डत निकया जाएर्गा :

करने के खिलए न्यायोक्षिचत और युनिक्तयुक्त होर्गा :

परन्तु यह और निक इस +ारा के अ+ीन अक्षि+रोनिपत निकसी जुमा ने का

भुर्गतान पीनिड़ता को निकया जाएर्गा।"

“354. स्त्री की लज्जा भंर्ग करने के आशय से उस पर हमला या आपराक्षि+क

बल का प्रयोर्ग-जो भी कोई निकसी स्त्री की लज्जा भंर्ग करने या यह जानते हुए

18

निक ऐसा करने से वह कदाक्षिचत उसकी लज्जा भंर्ग करेर्गा के आशय से उस

स्त्री पर हमला या आपराक्षि+क बल का प्रयोर्ग करता है, तो उसे निकसी एक

अवक्षि+ के खिलए कारावास की सजा जो कम से कम एक व! होर्गी और जिजसे

5 साल तक बढ़ाया जा सकता है, और सार्थ ही वह आर्णिर्थक दंड के खिलए भी

उत्तरदायी होर्गा।"

( ङ ) निर्गरोहबन्द अक्षि+निनयम की निवक्षि+ः -

16. उत्तर प्रदेश निर्गरोहबन्द और समाज निवरो+ी निक्रयाकलाप (निनवारर्ण)

अक्षि+निनयम, 1986, एक निवणिशष्ट अक्षि+निनयम है, जिजसको निर्गरोहबन्द और समाज

निवरो+ी निक्रयाकलाप को रोकने और उनका सामना करने के खिलए और उनसे सम्बद्ध

या अनु!ांनिर्गक निव!यों के खिलये निवशे! उपबन्+ करने के खिलए अक्षि+निनयनिमत निकया र्गया

है।

17. अक्षि+निनयम के शी! क से निवनिदत होता है, निक यह अक्षि+निनयम

निर्गरोहबन्द निनवारर्ण और समाज निवरो+ी निक्रया कलाप निनवारर्ण के खिलए अक्षि+निनयनिमत

निकया र्गया है। इसी नाते +ारा 2(ख) (परिरभा!ा) में "निर्गरोह" की परिरभा!ा महत्वपूर्ण

हो जाती है, जो एक निवस्तृत परिरभा!ा है, जिजसमें न के वल अपरा+ के उद्देश्य को

सस्थिम्मखिलत निकया र्गया वरन समाज निवरो+ी निक्रया कलाप के अंतर्ग त पच्चीस णिभन्न-

णिभन्न अक्षि+निनयम और अपरा+ की प्रक

ृक्षित के आ+ार पर भी अपरा+ या उसके

कारर्ण होने वाले परिरर्णाम को भी सस्थिम्मखिलत निकया है जो हो सकता है निकसी

अक्षि+निनयम मे निवणिशष्ट रूप से अपरा+ की श्रेर्णी मे नही हो जैसे पूव मे वर्णिर्णत +ारा

3(1) के (दसवें) "अन्य व्यनिक्तयों को साम्प्रदाक्षियक साम्जस्य मे निवघ्न डालने के

खिलए किंहसा करने के खिलए उद्दीप्त करना;” (ग्यारहवें) "जनता में दहशत, संत्रास या

आतंक फै लाना;” व (अठ्ठारहवें) "वाणिर्णस्थिज्यक शो!र्ण, बं+ुआ श्रम, बालश्रम, यौन

शो!र्ण, अंर्ग हर्टाने तर्था दुव्य पार, करने, णिभा और समान निक्रया कलापो के

प्रयोजनो के मानव दुव्य पार।" संभवतः उपरोक्त अपरा+ निकसी अक्षि+निनयम में

परिरभानि!त न हों।

19

18. “निर्गरोह” को शास्थिब्दक अर्थ के रूप मे परिरभानि!त नहीं निकया है, परन्तु

उस शब्द का 'तात्पय ' क्या है ऐसा वर्णिर्णत निकया र्गया है। जैसा पी. काजिसलिंलर्गम व

अन्य़ बनाम पी.एस.जी. कालेज ऑफ र्टेक्नोलॉजी 1995 सप्ली (2) एस.सी.सी.

348 में निन+ा रिरत निकया र्गया निक तात्पय (means) ) एक सख्त निनयम की परिरभा!ा

है, जिजसके कारर्ण परिरभा!ा में लेख बद्ध शब्दो का अर्थ परिरभा!ा के द्वारा निदये र्गये

अर्थ के अलावा अन्य कोई अर्थ प्रदान नहीं निकया जा सकता है, जबनिक शब्द

"निननिहत” (Include) एक व्यापकता को दशा ता है निक और परिरभा!ा का व्यापक

अर्थ निदया जा सकता है।

19. उच्चतम न्यायालय ने शारदा र्गुप्ता प्रक्षित उत्तर प्रदेश शासन व अन्य,

2022 एससीसी ऑनलाइन एससी 514 के निवक्षि+क दृष्टांत में उल्लेख निकया है निक

यह निवक्षि+ की सुव्यवस्थिस्र्थत व्यवस्र्था है निक अक्षि+निनयम के प्राव+ान जैसे हैं, वैसे ही

पढे व समझे जाने चानिहये। अर्गर अपरा+ी निकसी निर्गरोह का सदस्य है और निकसी

समाज निवरो+ी ऐसे निक्रयाकलापों में संलग्न है जो +ारा 2(ख), निर्गरोहबन्द अक्षि+निनयम

में वर्णिर्णत है जैसे किंहसा,+मकी या अणिभत्रास या प्रपीड़न या प्रदश न या अन्य प्रकार

से लोक व्यवस्र्था अस्त-वयस्त करता है या निकसी द

ुनिनयावी

, भौक्षितक, आर्णिर्थक या

अन्य लाभ हेतु के उद्देश्य से समाज निवरो+ी निक्रया कलाप जो एक से पच्चीस तक

वर्णिर्णत है, करता है तो, वो +ारा 2(ख) के अंतर्ग त निर्गरोहबन्द की परिरभा!ा के

आ+ीन माना जायेर्गा व उसके निवरूद्ध इस अक्षि+निनयम के अंतर्ग त अणिभयोजन

चलाया जा सके र्गा। एक प्रर्थम सूचना रिरपोर्ट /आपराक्षि+क मुकदमा के आ+ार पर भी

अणिभयोजन चलाया जा सकता है।

20. निर्गरोह की परिरभा!ा के अन्तर्ग त निकसी पूव में समाज निवरो+ी निक्रया

कलाप की घर्टना की प्रर्थम सूचना रिरपोर्ट की अनिनवाय ता नहीं है न ही निकसी प्रकार

के निर्गरोह सारर्णी की भी अनिनवाय ता है। इस अक्षि+निनयम के अंतर्ग त अभी तक कोई

निनयमावली नही बनी है। तथ्यो के आ+ार पर मात्र यह निन+ा रिरत करना है निक क्या

निक्रया कलाप या क

ृत परिरभा!ा के आ+ीन है या नहीं। अर्गर +ारा

2(ख) के खण्ड

20

(ग्यारह) व (पच्चीस) को ध्यान से परखा जाये तो यह उन घर्टनाओ

ं को भी आ+ीन

करेर्गा जहाँ भय के कारर्ण अपरा+ी के निवरूद्ध कोई प्रर्थम सूचना रिरपोर्ट दज भी नहीं

करा पा रहा है। अतः यह मत र्गलत नहीं होर्गा निक कक्षितपय परिरस्थिस्र्थक्षितयों में पूव में

कोई अपरा+ दज न भी हो तो भी निर्गरोहबन्द अक्षि+निनयम के आ+ीन अणिभयोजन की

काय वाही की जा सकती है।

( च ) उच्च न्यायालय की अन्तर्निननिहत शनिक्तयाँ :-

21. भारतीय दंड प्रनिक्रया संनिहता, की +ारा 482, उच्च न्यायालय की

अन्तर्निननिहत शनिक्तयों की व्यावृखित्त के प्राव+ान के सम्बं+ में है जो निनम्न है ;-

“इस संनिहता की कोई बात उच्च न्यायालय की ऐसे आदेश देने की

अन्तर्निननिहत शनिक्त को सीनिमत या प्रभानिवत करने वाली न समझी जाएर्गी जैसे

इस संनिहता के अ+ीन निकसी आदेश को प्रभावी करने के खिलए या निकसी

न्यायालय की काय वाही का दुरुपयोर्ग निनवारिरत करने के खिलए या निकसी अन्य

प्रकार से न्याय के उद्देश्यों की प्रानिप्त सुनिनक्षिश्चत करने के खिलए आवश्यक हो।”

22. उच्च न्यायालय की अंतर्निननिहत शनिक्तयों को इस संनिहता के निकसी

प्राव+ान से सीनिमत नहीं निकया जा सकता है। यह वो अंतर्निननिहत शनिक्तयां हैं, जो इस

संनिहता के तहत निकसी भी आदेश को प्रभावी करने के खिलए, या निकसी भी न्यायालय

की प्रनिक्रया का द

ुरुपयोर्ग रोकने के खिलए या अन्यर्था सुरक्षित करने के खिलए या न्याय

के उद्देश्यों की प्रानिप्त के खिलए आवश्यक हों। यह शनिक्तयां इस संनिहता के तहत उच्च

न्यायालय को प्राप्त नहीं ह

ुई हैं

, बस्थिल्क यह शनिक्तयां उच्च न्यायालय में अन्तर्निननिहत हैं,

जिजसे संनिहता के एक प्राव+ान द्वारा घोनि!त मात्र निकया र्गया है।

23. उच्चतम न्यायालय ने कई निवक्षि+क दृष्टांतों में यह प्रक्षितपानिदत निकया है,

निक इस असा+ारर्ण शनिक्तयों का दायरा तो व्यापक है, परंतु इनका उपयोर्ग संयम

एवम् साव+ानीपूव क व द

ुल भ से भी दुल भ प्रकरर्ण में ही निकया जाना चानिहए। इसके

उपयोर्ग से निकसी भी वै+ानिनक अणिभयोजन की आकस्थिस्मक मृत्य

ु कारिरत नहीं की जा

सकती है।

21

24. अन्तर्निननिहत शनिक्तयों का उपयोर्ग करते ह

ुए ये जाँचने के खिलये की कोई

प्रार्थनिमकी निकसी प्रर्थमदृष्ट्या संज्ञेय अपरा+ को प्रकर्ट करती है या नहीं , उच्च

न्यायालय ना तो निकसी जाँच संस्र्था और ना ही अपीलीय न्यायालय की तरह काय

कर सकता है। इन शनिक्तयों के अन्तर्ग त निकसी साक्ष्य की प्रमाणिर्णता की जाँच भी नहीं

की जा सकती है, क्योंनिक, इसका ेत्राक्षि+कार उस न्यायालय का है, जिजसके द्वारा

परीर्ण निकया जा रहा है या निकया जायेर्गा। अन्वे!र्ण के दौरान या आरोप पत्र दायर

होने पर उच्च न्यायालय इस पहलू को भी नहीं देख सकता है निक आरोपी की ओर से

और न ही दंड प्रनिक्रया संनिहता की +ारा 161 के तहत अणिभलेखिखत बयानों का र्गंभीर

आँकलन कर, आरस्थिम्भक स्तर पर ही निकसी परीर्ण को निवफल निकया जा सकता

है।

25. उच्चतम न्यायालय ने बह

ु+ा कहा है निक वो परिरस्थिस्र्थक्षितयॉ जिजनके होने

पर इन अन्तर्निननिहत शनिक्तयों का उपयोर्ग निकया जा सकता है, उसकी कोई संपूर्ण

सूची तो नहीं बनायी जा सकती, परन्तु क

:-

क) जहां प्रार्थनिमकी या णिशकायत में लर्गाए र्गए आरोप को अर्गर उनके प्रत्य

रुप में मान खिलया जाये और संपूर्ण ता में भी स्वीकार निकया जाये, तब भी,

अणिभय

ुक्त के निवरुद्ध प्रर्थम दृष्टया कोई अपरा+ नहीं बनता हो

,

ख) जहां प्रार्थनिमकी और संलग्न सामनिग्रयों (यनिद कोई हो), एक संज्ञेय

अपरा+ को उद्दाानिर्टत नहीं करते हैं, तर्था दंड प्रनिक्रया संनिहता की +ारा

156(1) के तहत पुखिलस अक्षि+कारिरयों द्वारा अन्वे!र्ण करने का कोई

औक्षिचत्य सानिबत न होता हो;

र्ग) जहां प्रार्थनिमकी या णिशकायत में लर्गाए र्गए अनिववानिदत आरोप और उसके

समर्थ न में एकत्र निकए र्गए साक्ष्यों से निकसी भी अपरा+ के क

ृत्य का होना

प्रकर्ट नहीं होता है और आरोपी के निवरूद्ध कोई भी प्रकरर्ण नहीं बनता हो;

घ) जहां प्रार्थनिमकी के आरोप संज्ञेय अपरा+ को उद्दाानिर्टत न होते हों व

के वल र्गैर-संज्ञेय अपरा+ को उद्दाानिर्टत करते हों, जहां पुखिलस अक्षि+कारी

22

द्वारा मजिजस्र्ट

्रेर्ट के आदेश के निबना निकसी भी जांच की अनुमक्षित नहीं है

, जैसा

निक दंड प्रनिक्रया संनिहता की +ारा 155(2) के तहत परिरकस्थिल्पत है;

ङ)जहां प्रार्थनिमकी या णिशकायत में लर्गाए र्गए आरोप इतने असंर्गत और

स्वाभानिवक रूप से असंभव हैं जिजनके आ+ार पर कोई भी निववेकशील व्यनिक्त

कभी भी न्यायसंर्गत निनष्क! पर नहीं पह

ुंच सकता है निक अणिभयुक्त के निवरुद्ध

काय वाही के खिलए पया प्त आ+ार मौजूद हैं;

च)जहां निकसी संनिहता या संबंक्षि+त अक्षि+निनयम (जिजसके तहत आपराक्षि+क

काय वाही शुरू की र्गई है) के निकसी भी प्राव+ान के तहत निवक्षि+क प्रनिक्रया को

प्रारम्भ करने या प्रचखिलत रखने पर निवक्षि+क निन!े+ लर्गाया र्गया हो, और/या

जहां संनिहता या संबंक्षि+त अक्षि+निनयम के प्राव+ान, पीनिड़त प की णिशकायत

के खिलए प्रभावी प्रक्षितकार प्रदान करते हो।

छ) जहां आपराक्षि+क काय वाही स्पष्टतः द

ुभा वनापूर्ण हो और

/या जहां

काय वाही निवद्वे!पूर्ण रूप से आरोपी से अक्षि+क प्रक्षितशो+ लेने के खिलए, परो

उद्देश्य से की जाती है और जिजसका लक्ष्य, निनजी और व्यनिक्तर्गत णिशकायत के

कारर्ण उसे अपमानिनत करना हो। आपराक्षि+क णिशकायत को तब भी समाप्त

निकया जा सकता है जब मामला अनिनवाय रूप से दीवानी प्रक

ृक्षित का हो और

उसे एक अपराक्षि+क अपरा+ का रूप निदया र्गया हो और यनिद कणिर्थत अपरा+

के तत्व, णिशकायत में प्रर्थम दृष्टया भी उपलब्+ न हों। क्योंनिक इस तरह की

काय वाही प्रचखिलत रखने पर न्यायालय की प्रनिक्रया का द

ुरुपयोर्ग होर्गा।

(देखें :- हरिरयार्णा राज्य बनाम भजनलाल: (1992 ) सप्ली 1 एससीसी 335,

झंड

ू फामा स्युनिर्टकल वक्स खिलनिमर्टेड बनाम मोहम्मद शारफुल हक़

: (2005)1

एससीसी 122, अहमद अली क्वारशी और अन्य बनाम उत्तर प्रदेश शासन :

2020 एससीसी ऑनलाइन एससी 107, जोसेफ सालवाराजा ए बनाम र्गुजरात

राज्य (2011) 7 एससीसी 59, सुशील सेठी और एक अन्य बनाम अरुर्णाचल

प्रदेश शासन और अन्य (2020) 3 एससीसी 240, प्रीक्षित सराफ और अन्य बनाम

निदल्ली व एनसीआर राज्य: 2021 एससीसी ऑनलाइन एससी 206)

23

26. उच्चतम न्यायालय ने, मेसस निनहारिरका इन्फ्रास्र्ट

्रक्चर प्राइवेर्ट

खिलनिमर्टेड बनाम महाराष्ट

्र शासन व अन्य

(2020)10 एस सी सी 118 में स्पष्ट रूप

से निन+ा रिरत निकया है निक, उच्च न्यायालय द्वारा, +ारा 482 दं.प्र.सं या संनिव+ान के

अनुच्छेद 226 के अंतर्ग त दायर याक्षिचका को निनरस्त या निनस्तारर्ण करते ह

ुए

,

अन्वे!र्ण के दौरान या +ारा 173(2) दं.प्र.सं के तहत आरोप पत्र/ अस्थिन्तम रिरपोर्ट

दाखिखल होने तक, निर्गरफ़्तारी न करने या कोई अवपीड़क काय वाही न करने का

आदेश पारिरत करना, न्यायसंर्गत नहीं है। अर्गर असा+ारर्ण परिरस्थिस्र्थक्षितयों में, निकसी

प्रकरर्ण में उच्च न्यायालय का अणिभमत है, निक प्रर्थम द्रष्टव्य, अनिग्रम अन्वे!र्ण को

स्र्थनिर्गत करना चानिहये, तो ऐसा आदेश, संक्षिप्त ही हो परन्तु सुनिववेक्षिचत/ सकारर्ण

होना चानिहए, हालांनिक ऐसे आदेश न ही निनयनिमत रुप में, न ही संयोर्गवश और/या

न ही यंत्रवत् रूप से पारिरत होने चानिहए। हाल में जिसद्धार्थ मुके श भंडारी प्रक्षित र्गुजरात

राज्य सरकार: (दास्थिण्डक अपील सं०. 1044, 1045 और 1046 of 2022),

निनर्ण य निदनांनिकत 02.08.2022 के निनर्ण य में उच्चतम न्यायालय ने यह पुनरावृखित्त भी

निकया है।

27. आरोप सत्य है या नहीं, यह निवचारर्ण में निन+ा रिरत निकया जायेर्गा।

के वल उन निवरल मामलों को छोड़कर जहां यह स्पष्ट रुप से निवनिदत हो जाये निक

आरोप र्गंभीरता से निवचारर्णीय नहीं है या कोई भी अपरा+ उद्ध

ृानिर्टत नहीं करते हैं

,

न्यायालय, +ारा 482 दं.प्र.सं. की शनिक्त का उपयोर्ग करते ह

ुए

, णिशकायत के आरोप

की सत्यता की जाँच नहीं करता है। (देखें: रामबीर उपाध्याय व अन्य प्रक्षित उत्तर

प्रदेश राज्य व अन्य : 2022 एस सी सी ऑनलाइन एस सी 484)

( छ ) निवश्ले!र्ण

28. उपरोक्त तथ्यात्मक व निवक्षि+क पृष्ठभूनिम में इस न्यायालय को यह

निन+ा रिरत करना है, निक पत्रावली पर उपलब्+ साक्ष्य, क्या आवेदकर्गर्ण के निवरूद्ध

+ारा 3(1) निर्गरोहबन्द अक्षि+निनयम के अंतर्ग त प्रर्थम दृष्टवा अपरा+ दृनिष्टर्गोचर करते

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हैं या नही तर्था क्या परिरस्थिस्र्थक्षितयाँ ऐसी है निक अन्तर्निननिहत शनिक्त के उपयोर्ग का

मामला बनता है, या नहीं।

29. जैसा निक पूव मे निवश्ले!र्ण निकया र्गया है, निक अन्तर्निननिहत शनिक्तयों का

उपयोर्ग द

ुल भ प्रकरर्णों में ही निकया जाना चानिहये

, वो भी जब अणिभय

ुक्त के निवरूद्ध

प्रर्थम दृष्टवा कोई अपरा+ नहीं बनता हो। आरोप सत्य है, या असत्य है यह

निन+ा रिरत करने का कत व्य निवचारर्ण न्यायालय को है न निक इस न्यायालय को। +ारा

482 दं.प्र.सं. मे अन्तर्निननिहत शनिक्तयों का उपयोर्ग करते ह

ुए आरोप की सत्यता को

नहीं परखा जा सकता है जैसा पूव मे यह उल्लेखिखत निकया है और अर्गर प्रकरर्ण के

तथ्य व पत्रावली पर साक्ष्य से प्रर्थम दृष्टवा +ारा 3(1) निर्गरोहबन्द अक्षि+निनयम में

वर्णिर्णत अपरा+ कारिरत होने के साक्ष्य उपलब्+ हैं तो अन्तर्निननिहत शनिक्त का उपयोर्ग

नहीं निकया जा सकता है।

30. सव प्रर्थम यह निवचार करना है, निक आवेदकर्गर्णों ने क्या निर्गरोह जैसा

+ारा 2(ख), निर्गरोहबन्द अक्षि+निनयम मे परिरभानि!त है, का प्रर्थम दृष्टवा समूह बना

रखा है, जो ऐसी समाज निवरो+ी काय कलापों में खिलप्त हैं, जो भारतीय दण्ड संनिहता

के अध्याय- 16 के अ+ीन दण्डनीय अपरा+ है, या उनसे जनता मे दहशत या

संत्रास फै ला र्था एवं क

ृत कोई भौक्षितक या दुनिनयावी लाभ प्राप्त करने के उद्देश्य से

निकया र्गया है। जैसा पूव मे निवश्ले!र्ण निकया र्गया है निक 'निर्गरोह’ की परिरभा!ा निवस्तृत

व वृहद है और समाज निवरो+ी निक्रया कलाप के अन्तर्ग त अन्य प्रकार से पच्चीस

णिभन्न-णिभन्न अपरा+ों को सस्थिम्मखिलत निकया र्गया है जिजसमे से (ग्यारह) जनता मे

दहशत, संत्रास या आतंक फै लाना भी है। तेज सिंसह (पूव मे उल्लेखिखत) मे यह

अवलोकन निक "जब भी कोई र्गंभीर अपरा+ कारिरत होता है, तो परिरर्णामस्वरूप

हमेशा समाज मे निकसी न निकसी प्रकार का व्यव+ान होता है" यह उक्त मामले के

संदभ मे सही हो सकता है, परन्तु यह समान्यीकरर्ण करना, निर्गरोह बन्द अक्षि+निनयम

के उद्देश्य के प्रक्षितक

ूल होर्गा।

"लोक व्यवस्र्था को अस्त-व्यस्त" करना अपरा+

कारिरत होने के पश्चात उस स्र्थान या आस पास के वास्तनिवक माहौल पर आ+ारिरत

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होर्गा, जो निकसी मामले के तथ्य व परिरस्थिस्र्थक्षितयों के मद्देनज़र होर्गा न ही एक घर्टना

को एक ही दृनिष्ट से देखा जा सकता। शब्द 'द

ुनिनयावी

', 'आर्णिर्थक', 'भौक्षितक' व 'अन्य

लाभ' का निवस्तृत अर्थ है, जो के वल एक मामले के तथ्यों को ध्यान मे रखकर,

संक

ुक्षिचत नहीं निकया जा सकता है वो भी तब

, जब निवचारर्ण नहीं ह

ुआ हो और

अन्तर्निननिहत शनिक्त के उपयोर्ग संदर्णिभत न हो। ऐसा तात्पय होना न के वल अनुक्षिचत

है, बस्थिल्क निर्गरोहबन्द अक्षि+निनयम के उद्देश्यों के प्रक्षितक

ूल भी है। अतः

तेज सिंसह (पूव

मे उजिल्लखिखत) का कोई लाभ आवेदकर्गर्ण को नहीं निमल सकता है। आवेदकर्गर्ण के

अक्षि+वक्ता का निनवेदन निक पीक्षिडता ने पूवा ग्रह से ग्रजिसत होकर उनके निवरूद्ध दो

आपराक्षि+क मामले दज कराये हैं क्योंनिक उसके पक्षित के निवरूद्ध आवेदकर्गर्ण ने एक

अपरा+ में मामला दज कराया र्था, जिजसमे उसे सजा भी दी र्गई है, इस स्तर पर

निवचारर्णीय नहीं है, क्योनिक यह एक बचाव है अतः निवचारर्ण का निव!य है।

31. वत मान प्रकरर्ण में यह सव निवनिदत है, निक आवेदकर्गर्ण के निवरूद्ध दो

आपराक्षि+क मामले दज हैं, जिजनमें अन्वे!र्ण के उपरान्त आरोप पत्र, र्गंभीर अपरा+

कारिरत होने के साक्ष्य उपलब्+ होने के कारर्ण प्रेनि!त निकये जा चुके हैं, जिजनका

संज्ञान भी खिलया जा चुका है। तथ्यों के अनुसार आवेदकर्गर्ण ने न के वल पीक्षिडत का

सामूनिहक बलात्कार निकया बस्थिल्क उसके द्वारा प्रर्थम सूचना रिरपोर्ट दज कराने पर

उसको +मकाया व उसकी लज्जा भंर्ग भी करी तर्था जाँच अक्षि+कारी ने घर्टना स्र्थल

के आस-पास के माहौल का अध्ययन कर साक्ष्य लेखबद्ध निकया है, निक ेत्र में

आतंक, भय व रो! व्याप्त है तर्था उनके निवरूद्ध प्रार्थनिमकी दज कराने का साहस

कोई नहीं कर पाता है। इस आकलन को इस स्तर पर निनरा+ार नही माना जा

सकता है, वो भी तब, जब आवेदकर्गर्णो पर दो आपराक्षि+क मुकदमे दज हो रखे हैं,

जो +ारा 3(1) के अ+ीन दण्डनीय है। आवेदकर्गर्ण ने बलात्कार व छेड़छाड़ जैसे

ृत्य करके

, लोक व्यवस्र्था को अस्त-व्यस्त करने व अपने निर्गरोह के खिलए

अनुक्षिचत द

ुनिनयावी व भौक्षितक लाभ प्राप्त करने के उद्देश्य से समाज निवरो+ी

निक्रयाकलाप निकये हैं, जो भारतीय दण्ड संनिहता के अध्याय-16 के अ+ीन दण्डनीय

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है तर्था इस क

ृत्य

/निक्रया कलाप के कारर्ण जनता में भय, दहशत या संत्रास भी

फै ला, जो +ारा 2(ख)(ग्यारह) सपनिठत +ारा 3(1) के अ+ीन दण्डनीय भी है, इन

परिरस्थिस्र्थक्षितयों में अन्तर्निननिहत शनिक्तयों का उपयोर्ग करना आपराक्षि+क काय वाही को

अचानक मृत्य

ु पहुचाने जैसा होर्गा जो सा+ारर्णतया नहीं निकया जा सकता है।

( ज ) निनष्क!

32. अतः ऐसी कोई परिरस्थिस्र्थक्षित नही है निक अन्तर्निननिहत शनिक्त का प्रयोर्ग

निकया जाये। आवेदन र्गुर्ण दो! पर योग्य न होने के कारर्ण निनरस्त निकया जाता है।

आदेश निदनाँक:- जिसतम्बर १४, २०२२

(२३ भाद्रपद, १९४४ शक)

अव+ेश

(सौरभ श्याम शमशेरी, न्यायमूर्तित)

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