0  15 Nov, 2019
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Rajiv @ Raju Kumar Vs. State Of U.P. And 2 Others

  Allahabad High Court Writ - C No. - 11448 Of 2017
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1

"प्रकाशन के लि ए स्वीक

ृत

"

8%@20f7izFZ4fkz%jfkRfF4;m - 6.11.2019

8%@20f7i%n%jfkRfF4;m - 15.11.2019

okn % fjV & lh la- & 11448@2017

izkFkhZ % राजीव @ राजू क

ुमार

izR;FkhZ % m0iz0 jkT; ,oa 2 vU;

;kph dh vksj ls vf/koDrk % सुदीप नि!वेदी

izR;FkhZ dh vksj ls vf/koDrk % eq[; LFkk;h vf/koDrk] शेर बहाद

ुर

यादव, थिशव शंकर गुप्ता

माननीय सौरभ श्याम शमशेरी , न्यायमूर्तित

1.a42vn%f-0a/nzfokR@2f0nF.knfkj fvn/0vf7jf0n.-f%j

onm2%nfkRf/0f8k, आय

ुक्त

, आजमगढ़ मण्ड , आजमगढ़ !ारा

pn6z4f8%@20f8U%nDk f25.01.2017, जिजससे या.ी के !ारा

दायर की गई अपी संख्या 256/F (F (9+'%4'.13 (3) उत्तर

प्रदेश अनुसूक्षि.त वस्तु निवतरर्ण आदेश 2016 (7DZjpfv=f'आदेश

2016’) s&/-%f/>%jfkj fknz@f8%zh4fkRfr0-f/0f4mnf;p

जिज ाक्षि?कारी निनजामाबाद, आजमगढ़ !ारा पारिरत आदेश

निदनांक 06.09.2016, जिजससे !ारा या.ी के उक्षि.त दर द

ुकान

knf9%is+?fp@f8%zh4f8k0nfr0nfmn, उक्त आदेश की पुष्टी

की गई है, को निनरस्त निकया जाये।

Neutral Citation No. - 2019:AHC:186622

2

2.या.ी सरकारी सस्ते गल्ले, निमट्टी ते का निवक्रेता है एवं

उसे उक्षि.त दर द

ुकान

(ग्राम पं.ायत खानपुर क्षि.तरनिव ,

8akn7G45f8vTn2piz) knf9%is+?fp@fTnz-f8k0nfr0nfmn

4mnf0n.-f7%Hf1992 से उक्षि.त दर द

ुकान कॊ

गातार . ा

z/nfmnBf8U%nDk f24.06.2016 को द

ूरभाष पर की गयी

थिशकायत के क्रम में या.ी की उक्षि.त दर द

ुकान पर

1knKhvk f hm&-0 f’5:3"9f Zj@-0 f p,,4f 8%6zZk,

8%TnvnsnUfdnznf8k0nfr0nBf8%z-Z@fkj fUqzn%fvqkj fpz

;pKhm4fF/Khm0L/F ( 9DM0>U0fkn52f?nzk>faf;%kj fp6zanz

से खाद्यान निवतरर्ण सम्ब?ी पूछ-ताछ भी करी गई। द

ुकान पर

pn@fr1/Khm0L/F ( 9DM0>U0fkn52f?nzkLfkRf7,.-, सामान की

दर ाे का पट्ट, सामाग्री पट्ट, सू.ना पट्ट आनिद प्रदर्शिशत नहीं निकया

r0nfmnBfp,P4nPfkj fUqzn%f0/f[-f8a8U4f/

ुआ निक या.ी का

-0a/nzfFn/k>fkj foF4f9SPnf%/Rfz/4nfmnBf0n.-f%j

9DM0>U0fkn52f?nzk>fkIf n7%fdnznf8%?n26z4fvn@nf7jfkv

एवं अक्षि?क मूल्य पर खाद्यान का निवतरर्ण निकया एवं अन्य

थिशकायतें भी पायी गई। अतः यह माना गया निक या.ी ने

आदेश 2004 व अनुबन्? पत्र की शतV का उल्लंगन निकया है।

तदानुसार उप जिज ाक्षि?कारी, 8%TnvnsnUf1Tvr3f%jfZj8@0

fjV lh la- 1148@2017

3

p,,4f 8%z-Zk, निनजामाबाद की जाँ. आख्या निदनांक

26.06.2016 पर संज्ञान ेते ह

ुए

, अपने आदेश निदनांक

29.06.2016 के !ारा या.ी का अनुबन्? पत्र तत्का प्रभाव से

8%&KOs4fkzf8U0nf4mnf0n.-fk>flkf7en/fkjf9+Uzf9p%n

pZfzG%jfknf7v0f8U0nBf7nmf/-f7nmf0n.-fkj f;F.4fUz

ुकान का समस्त कोटा दूसरी दुकान से सम्बन्? कर निदया

गया।

3.या.ी के अपना स्पष्टीकरर्ण एक निनवेदन के रूप में निदया

जिजसमें कहा गया निक सू.ी सम्रागी दर पट्ट व समाग्री पट्ट

oUQ 4f8k0nfr0nfmnBf0/f[-fk/nf8kffk

ुP., 54.? :,

ुबारा बयान देना .ाहते है

, क्योंनिक पह े उन्होने निकसी दबाव

v=f1kzf0n.-fkj f8aZ]f^0n%f8U0nfmnBf0n.-fkj f8aZ]

थिशकायत मात्र .ुनावी रंजिजश के कारर्ण की गई है। अन्तः

onm2%nfkRfr8f8kf8%&KOs4fU

ुकान बहा करी जायॆ। या.ी ने

माह अप्रै , मई, जून सन् 2016 की निवतरर्ण पंजिजका व स्टाक

pD7TknfkRfPn0nfoF4faf7vh4f0>T%n`fkj fkn52f?nzk>

knf7nv,8/kf/h4nZzf8k0nfr0nfonm2%nfp@f[-foh4i4

निकया।

fjV lh la- 1148@2017

4

4.या.ी के स्पष्टीकरर्ण देने के उपरान्त उपजिज ाअक्षि?कारी,

निनजामाबादा, 1Tvr3f%jfokz@fkRf7i%an8fkz-f4mn

Zj@-0fp,,4f8%6zZkfkRfTnW.f1:0nf8U%nDkf26.06.2016,

या.ी !ारा निदया गया लि लिखत स्पष्टीकरर्ण एवं सं ग्न प्रदशb का

/0n%fp,a2kfp6z -&%fkz%jfkj f;pzn+4fonF?knz-fc7

’5d,J4. :. #

ु.े की या.ी

(उक्षि.त दर निवक्रेता) ने आवश्यक

वस्तुओ के निवतरर्ण में गम्भीर अनिनयमतायें कारिरत की है।

फ स्वरूप या.ी का अनुबन्? पत्र निनरस्त करने योग्य है।

तदनानुसार अनुबन्? पत्र निनरस्त करने का आदेश निदनांक

16.09.2016 पारिरत निकया। उक्त आदेश के प्रमुख अंश निनम्न

है।

“ इस प्रकार उक्षि.त दर निवक्रेता ग्रामपं.ायत खानपुर

क्षि.तराव !ारा निदनांक 12.07.2016 को प्रस्तुत

hpA-kz@faf7ng0LfknfZj@-0fp,,4f8%z-Zkfdnzn

pz-Z@>pzn+4f1:0nf8U%nDk f14.09.2016 प्रस्तुत

निकया गया निक निवक्रेताfdnznf9+40>U0fkn52?nzk>fv=

n7%fdnznf8%Un26z4fvn@nf7jfkvfvn@nflaDf8%?n26z4

मूल्य से अक्षि?क मूल्य 95 Zhfkj fhmn%fpzf100रू०

ेकर खाद्यान का निवतरर्ण निकया गया है निवक्रेता !ारा

प्रस्तुत की गयी स्पष्टीकरर्ण में अक्षि?क मूल्य लि या जाना

ha-knzf8k0nfr0nf/0f4mnf.-%-fknf8a4z@f8%?n26z4

मात्रा 02 8kFnhfkj fhmn%fpzf01 निकग्रा० शासन !ारा

8%?n26z4fv,T0f13.50 रू० प्रक्षित निकग्रा० न ेकर 15.00

रू० लि या जाना निवक्रेता !ारा स्वाीकार निकया गया है।

pn@fr1/hm-fkj f9F?knD fkn52?nzkLfv=fzn %f8a4z@

%/Rf8k0nfr0nf/0Bfpn@fr1/hm-ffkj f9F?kD fkn52

fjV lh la- 1148@2017

5

?ारकों में राशन निवतरर्ण नहीं निकयागया है। कुछ पात्र

r1/hm-fkn5Vfpzf8a4z@f8k0nfr0nf/0f4>fUT2f0ूनिनट

के अनुसार निवतरर्ण न करके मनमाने ढंग से कम मात्रा व

अक्षि?क मूल्य पर निवतरर्ण निकया गया है। समस्त योजना

kjfkn52f?nzkLfv=f8vD-f4j&f n7%fdnznf8%?n26z4fvn@n

पर निवतरर्ण निकया गया है निकन्तु अक्षि?क मूल्य लि या गया

/0Bf8aEj4nfdnznfoh4i4f8a4z@fpD7Tknfv=fkn52?nzkL

के नामों के सम्मुख मात्रा व मूल्य अंनिकत है निकन्तु

onek4n2fkj f/h4nZzfan&jfkn&vfv=f9F?k4zf9Dr,jn

निनशानी गा है , ऐसा प्रतीत होता है निक बाद में निनशानी

9Dr,jnf&rnf8U0nfr0nf/0f4mnf8a4z@fpD7Tknf8k7-f[-

7Zvf9F?knz-fdnznfovn;@4f%/Rf/0Bf7vh4fpn@

r1/hm-f0>T%n`ंfkj fkn52?nzkLflkf/-fvn@nfv=

खाद्यान्न का निवतरर्ण करना अंनिकत है जबनिक यूनिनट के

9%i7nzfGnNn%f8a4z@f8k0nfTn%nfmnf7T77jfhpAf/0

8kf8aEj4nfdnznfkpYp,@2f%-F4f7jf8a4z@fpD7Tkn

तैयार की गयी है। निवक्रेता !ारा प्रस्तुत स्पष्टीकरर्ण के

पुष्ट भाग पर संयु2.Z .“0.6>%>., .#F' ":.(

8% n%-f9Dr,jnf&ran0nfr0nf/0fc%f&>r>fknf%f4>fkn52

7D:0nf9D8k4f/0fmzf%f4>f8k7f0>T%nfkjfkn52?nzk

है, c“, .(3.;C0G.5#R.#0B.’(E0' .! : ., 54? :,>

से दु-02a/nzfknfU>J-fpn0nfr0nf/0Bf8aEj4nfdnzn

9+40>U0fkn52?nzkLfv=ff n7%fdnznf8%?n26z4fvn@n

से कम एवं अक्षि?क मूल्य पर खाद्यान्न का निवतरर्ण निकया

जाना, .-%-f8%?n26z4fvn@n/मूल्य पर निवतरर्ण न करना,

8vD-f4j&fknf8a4z@f8%?n26z4fv,T0fpzf%fkz%n,

kn52?nzk>f7jfUु-02a/nzfkz%nf;F.4fUzfUुकान पर

pn@fr1/hm-0L/9+M0>U0fkn52?nzk>fkRf7,.-, रेट व

FY ,.">54, “ c5.">54, टो फ्री नं० प्रदर्शिशत न करना

जो उ०प्र० अनूसूक्षि.त वस्तु निवतरर्ण आदेश 2004 व

अनुबन्? पत्र की शतV का उल्लघंन है। उक्षि.त दर

निवक्रेता श्री राजू कुमार !ारा निन म्बन के क्रम में प्रस्तुत

स्पष्टीकरर्ण व साक्ष्य ब हीन व तथ्यहीन पाये जाने के

फ स्वरूप उक्षि.त दर की दुकान का अनुबन्?-पत्र बनाये

रखना जननिहत व अनुसुक्षि.त वस्तु निवतरर्ण आदेश 2004

के प्रानिव?ानो के क्रम में उक्षि.त नहीं है, जिजसके

fjV lh la- 1148@2017

6

e&haZp f Zj@-0 f p,,4f 8%z-Zk f dnnzn f 8%&KOs4

निवक्रेता श्री राजू कुमार के उक्षि.त मूल्य की दुकान का

अनुबन्?- पत्र निनरस्त निकये जाने की संस्तुक्षित की गयी

है।”

5.या.ी अपने अनुबन्? पत्र के निनरस्त करने के आदेश

निदनांक 16.09.2016 kj fZi^Uf/>kzfkK45knf7Df28(3) ,

उत्तर प्रदेश आवश्यक वस्तु (निवक्रय एवं निवतरर्ण निनयंत्रर्ण

का अक्षि?निनयम) आदेश 2016 (संछेप में 'आदेश 2016’)

,0 .9$'%4'.1-

ुक्त आजमगढ़ मण्ड

, 1Tvr3fkj f7vZ

अपी दायर की। अपी के मुख्य आ?ार निनम्न लि लिखत

है :-

“10- 0/f8kfZj@-0fp,,48%z-ZkfkRfTs.f1:0n

14.09.2016 kRf[-fknp-f9p-&k4n2fk>f%/RfU-

गयी जो नैसर्गिगक न्याय के जिसद्धान्त के निवपरीत है।

11- यह निक उपरोक्त से यह भी स्पष्ट होता है निक

Zj@-0fp,,4f8%z-Zkf%jf8U%nDk f24.06.2016 की

थिशकायत पर निदनांक 26.6.2016 k>fTs.f6zp>Y2

8U0nfmzf8ezfonmufkj fhpA-kz@flaDf7vh4

9;[&jGLfknfpz-Z@f[-fp,,4f8%z-Zkfdnznf8k0n

गया बताया गया और पुनः जॉ. आख्या निदनांक

24.09.2016 k>fU-fr8Bfc7foknzf; kn04k4n2

ही जॉ. अक्षि?कारी के रूप में अनुबन्? पत्र निनरस्त

kz%jfknf8%@20f[-fV&0nfT>fkn%,%%fr&4f/0B

क्योंनिक उपजिज ाक्षि?कारी !ारा स्वयं स्वतंत्र रूप से

,>8.’594-.5#R.76- .%- B

12- यह निक उपजिज ाक्षि?कारी !ारा जॉ. आख्या

निदनांक 14.09.2016 के आ?ार पर आदेश पारिरत

निकया गया है जॉ. आख्या से संतुष्ट होने का कोई

fjV lh la- 1148@2017

7

8%dkJ2f1Uj fv=f%/Rf8U0nf/0f8kf8k7f1?nzfpz

अनुबन्? पत्र निनरस्त निकया गया है।”

6.आय

ुक्त

, आजमगढ़ मण्ड , आजमगढ़ ने अपने आदेश

निदनांक 2.1.2017 के माध्यम से या.ी की अपी संख्या

256/F (ए को ब हीन मानते ह

ुए निनरस्त कर निदया। आदेश कॆ

प्रमुख अंश निनम्न है।

“p@na&-fkj f9a&>k%f7jfhpAf/0f8kf9p-&k4n2fkR

ओर से निदनांक 12.07.2016 को स्पष्टीकरर्ण निदया गया है,

7T7kj f7nmf7nUjfpjpzfpzfkF4p0fFnvan770Lfkj

#F' ": . #0, एवं अथिभ ेखों की छायाप्रक्षित एवं कुछ

अथिभ ेखों की मू प्रक्षित प्रस्तुत की गयी है। निवतरर्ण

रजिजस्टर निकसी भी अक्षि?कारी !ाार प्रमाथिर्णत नहीं निकया

गया है, जबनिक निवतरर्ण रजिजस्टर के अस्मिन्तम पृष्ठ पर यह

प्रमाथिर्णत नहीं निकया गया है, जबनिक निवतरर्ण रजिजस्टर के

अस्मिन्तम पृष्ठ पर यह प्रमाथिर्णत निकया जाता है निक रजिजस्टर में

क्रमांक इतने से इतने पन्ने हैं। केव माह अप्रै 2016 के

निमट्टी ते का रजिजस्टर प्रमाथिर्णत निकया गया है। निव!ान

;p7T&nF?knz-fdnznf9p-&k4n2fkRf`zf7jfoh4i4

hpA-kz@faf9;[&jGLfknfZj@-0fp,,4f8%z-Zkf7j

pz-Z@fkzn0nfr0nf/0BfZj@-0fp,,4f8%z-Zkfdnznf8U%nDk

14.09.2016 को प्रस्तुत निकया गया, जिजसमें उल्लेख निकया

r0nf8kf7vh4fpn@fr1/hm-f0>T%nfkj fkn52?nzkLfk>

एक ही मात्रा में खाद्यान्न निवतरर्ण निकया जाना अंनिकत निकया

गया है। जबनिक यूनिनट के आ?ार पर खाद्यान्न निवतरर्ण निकया

जाना .ानिहए। निवक्रेता !ारा प्रस्तुत निवतरर्ण पंजिजका में

kn52?nzkLfkj f%nvfkj f7OviGfvn@nfafv,T0f9D8k4f/0,

8k+4ifonefk4n2fkj f/h4nZzfan&jfkn&vfv=f9F?k4z

8% n%-f9Dr,jnf&rnf/0f4mnf8a4z@fz7ThYzf7Zv

अक्षि?कारी !ारा प्रमाथिर्णत नहीं है। समस्त योजनाओं के

kn52?nzkLfkj f8vD-f4j&f n7%fdnznf8%?n26z4fvn@nfpz

निवतरर्ण निकया गया है, 8k+4if8%?n26z4fv,T0f7jf9F?k

fjV lh la- 1148@2017

8

मूल्य लि या गया है। निवक्रेता !ारा अपने स्पष्टीकरर्ण के पुष्ट

भाग पर संयु2fZpf7jf&>rLfknf/h4nZzf8% n%-f9Dr,jn

गवाया गया है, Ts8kf%f4>f;%f&>r>fkn52f7D:0n

अंनिकत निकया गया है और न तो निकस योजना के

, 54? :,.#w, इसका भी कोई उल्लेख नही निकया गया है।

9p%jfpz-Z@f6zp>Y2fv=f0/f[-f9D8k4f8k0nf/0f8kf8aEj4n

dnznfkn52?nzkLf7jfUु-02a/nzfknfU>J-fpn0nfr0nf/0B

9+M0>U0fs-hp-hl&hflaDfpn@fr1/hm-f0>T%nfkj

खाद्यान्न, .ीनी, 8vD-f4j&f18Uf8%?n26z4fvn@nf7jfkvfa

8%?n26z4ffv,T0f7jf9F?kfv,T0fpzf8a4z@f8k0nfr0nf/0B

इस प्रकार स्पष्टीकरर्ण व साक्ष्य ब हीन व तथ्यहीन पाये

जाने के कारर्ण अनुबन्? पत्र बनाये रखने का कोई औक्षि.त्य

न पाते हुए दुकान निनरस्त निकये जाने की संस्तुक्षित की गयी

है।

c7foknzf8adn%f;p7T&nF?knz-fdnznf9p-&k4n2fkj

8a4z@fkj f8aZ]fp,a2fv=f[-fkRfr0-f; kn04f4mn

दूz[nJfpzfkRfr0-f; kn04fkjf1?nzfpzfp,,4f8%z-Zk

7jf1kKhvkfhm&-0f8%z-Z@fkznkzfkn52?nzkLfkj

बयान के आ?ार पर जां. में पायी गयी गम्भीर

अनिनयनिमतताओंfkj fx8Ar4f9p-&k4n2fkRfUुकान का

अनुबन्? पत्र, स्पष्टीकरर्ण प्राप्त कर पुनः स्पष्टीकरर्ण व

9;[&jGLfknfpz-Z@fkznkzfTnD.fv=fpn0-fr0-frO[-z

अनिनयनिमतताओंfkj fx8Ar4f9p-&k4n2fkRfUुकान को

बनाये रखने का कोई औक्षि.त्य न पाते हुए आ ोच्य

आदेश निदनांक 16.09.2016 dnznf9p-&k4n2fkRfUुकान

का अनुबन्? पत्र निनरस्त निकया है। इस प्रकार निव!ान

उपजिज ाक्षि?कारी !ारा पत्राव ी उप ब्? अथिभ ेखों व

“ g-L., .’(I) ?('. :3"9.,:50.,0 .; : +'.#3

आ ोच्य आदेश निदनांक 16.09.2016 पारिरत निकया है,

7T7v=f8k7-foknzfkj f/h4Zjpfknfk>8fmF.M0f%/R

पाया जाता है। अपी निनरस्त होने योग्य है।

9'U.9 36,' 4.! : .1F'8'.9 36."6#35.#>50

के कारर्ण निनरस्त की जाती है। अवर न्याया य की

पत्राव ी आदेश की प्रक्षित सनिहत वापस की जाती है। बाद

fjV lh la- 1148@2017

9

1aL0kfkn02an/-fc7f+0n0n&0fkRfp@na&-fUnVG&

दफ्तर हो।”

7.0n.-f%jfa42vn%f0nF.knfkj fdnznf;pz>2faQ@4

1Zj8p4f1Uj f8U%nDkf f25.1.2017 व 16.9.2016 को

8%zh4fkz%jfkRfonm2%nfkRf/0Bf0n.-f%_f0nF.knfkjfoh4zf20

व आ?ार प्रस्तर (I) ) व (I) I) ) में उल्लेख निकया है, ’,."0@3-. 8,'

अक्षि?कारी !ारा की गई जॉ. आख्या निदनांक 26.06.2016 की

प्रक्षित-0n.-fk>f%/RfU-fr0-fm-Bf94Uf0n.-fkj f8az]f7vh4

kn02an/-f%07trkf+0n0fkj f77]n+4>fkj f8aZ]fkRfr8f/0,

94Ufk7-fkn02an/-f8%zh4f8k0jfTn%jf0>f0f/0Bf0n.-f%jf9p%j

km%fkj f7vm2%fv=fk

ुPf8aF?fa0ahmn`fknf[-f;CjG

निकया है।

8.प्रक्षित- "3.“$:- .3 %jfoF4f pmfp@fUnVG&f8k0nf/0

4mnff0nF.knfkj foh4zf7D:0nf20 के उत्तर में निनम्न लि खा

है।

"यह निक याक्षि.का के प्रस्तर संख्या-20 में उजिल्ललिखत निवक्षि?

-0ahmn`ं पर निटप्पर्णी की आवश्यकता नहीं है शेष जिजस प्रकार

लि लिखत है, स्वीकर नहीं है क्योंनिक या.ी !ारा आवश्यक वस्तुओं

के निवतरर्ण में अनिनयनिमतता निकया जाना जिसद्ध पाये जाने के

फ स्वरूप या.ी का अनुबन्?-पत्र निनरस्त निकया गया। या.ी

dnznf;7CVG4f8aF?f-0ahmnlf0n.-fkj fokz@fvjf&nr,f%/R

है।”

fjV lh la- 1148@2017

10

1I) '. "3.“$:- .|.50.1? :.“$:- .(I) ) व (I) I) ) का कोई प्रक्षित

;<zf%/Rf8U0nf/0Bf0n.-fdnznfoF4 pmfknf;<zf[-fUnVG&

निकया जिजसमे जाँ. आख्या निदनाँक 26.06.2016 को या.ी को

न देने का तथ्य निफर से उल्लेलिखत निकया है।

9.या.ी के निव!ान अक्षि?वक्ता हरीश .न्द्र द

ूबे ने प्रब

प्रक्षितवेदन निकया और कहा निक या.ी के निवरूद्ध समस्त

kn02an/-f%07trkf+0n0fkj f77]n+4Lfkj f8aZ]ffkRfr8f/0B

या.ी को जाँ. आख्या की प्रक्षित नहीं दी गई है। या.ी के !ारा

8U0jfr0jfUh4najT>fknfp6z -&%f/0n%fp,a2kf%/Rf8k0nfr0n

है। उप जिज ाक्षि?कारी ने मात्र जाँ. आख्या पर ही केस्मिन्द्रत

होकर अपना आदेश पारिरत निकया। उप जिज ाक्षि?कारी ने अपना

k>8fha4D@f8%dkJ2f%/Rf8U0nf/0Bfc7-fEvfv=f10

ुक्त महोदय

ने भी या.ी की अपी सतही व अनौप.ारिरक रूप से निनरस्त

कर दी एवं अपी में लि ये गये निवथिभन्न आ?ार पर कोई ध्यान

या निटप्पर्णी नहीं करी है।

10.या.ी के निव!ान अक्षि?वक्ता ने इस न्याया य की एक

p-jfdnznfpn6z4f8aF?fa0ahmn f(रामक

ृपा यादव बनाम

उ०प्र० सरकार एवं अन्य रिरट निपनिटशन नं० 4011

(एम०आई०एस) आफ 2010 व अन्य याक्षि.काओ

ं., .’594-

fjV lh la- 1148@2017

11

निदनांक 05.05.2011) पर इस न्याया य का ध्यान आक

ृनिषत

कराया, 8kf;2f-0ahmnfv=f0/foF4pn8U4f8k0nf/0f8k, निकसी

अनुबन्? पत्र को निनरस्त करना एक गंभीर निवषय है, जिजसपर

9%qp.n6zkfZpfv=f8%@20f%/-fV&0nfTnf7k4nBf8%@20f&j%j

( 60.1 I) ?, :3.,>.’5d "' .“0.’594-.605 .. ’#-0./F (($

नैसर्गिगक न्याय के जिसद्धान्तो का पा न करना .ानिहये। ऐसा

दस्तावेज (जैसे जाँ. आख्या, 8%z-Z@f1:0nf18U) जिजसका

उपयोग पीनि~त के निवरूद्ध निकया गया हैं, उसकी प्रक्षित उसको न

देना, k7jfhmn8p4f8%0vLfkj f8aZ]f/>rnf4mnfk7jf1Uj

निनरस्त निकये जाने योग्य होगे।

11.oF4f;<zffv=f;hohf7zknzfkj fhmn8f9F?a2nf%j

km%f8k0nfkRf0n.-f%jfa1/Ufh4zfpzf1Uj f2004 व

8%s+?%fp@fkRf 4Vfkj f8aZ]fkn02f8k0nflaDfrO[-z

98%08v4n0jfsz4-f/0BfZj@-0fp,,4f8%z-ZkfkRfTnD.f1:0n

में उल्लेलिखत है निक या.ी ने ग्राहको को अक्षि?क मूल्य में कम

सामग्री प्रदान करी व द

ुकान पर सू.ना पट्ट इत्यानिद भी नहीं

&rn0jfm_Bf0n.-fknf-0a/nzf[-fj-kf%/Rfz/nBf0n.-f%jfk7n

कोई स्पष्टीकरर्ण नहीं निदया है जिजससे, निनरस्तीकरर्ण आदेश में

V&0jfr0jf1?nzf97M0fvn%jfTn0jfBf0n.-fk>f9p%nfpZfzG%j

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kj fV&lff7v0f8U0nfr0nf4mnf0n.-f%jfV&VG4fhpA-kz@fkj

7nmf1aL0kfUh4najTf[-f&rn0jfmj, जिजनका परिरशी न

8k0nfr0nBf94Uf%07trkf+0n0fkj f8%0v>fknfp,@24Ufpn&%

ुआ है।

12.या.ी व प्रक्षितवादीगर्ण के निव!ान अक्षि?वक्ताओ

ंfkj fkm%>

knfpa@f8k0nflaDf;p&^?fUh4najT>f4mnf8aF?f-0ahmn`

knfp6z -&%f/0n%fp,a2kf8k0nB

13.नैसर्गिगक न्याय के जिसद्धान्तो का पा न निकसी भी

, -4( #3.. #0.(>.+- I) -,, प्रशासनिनक, न्याक्षियकल्प ही क्यो न

हो आवश्यक है। यह निवक्षि? सम्मत है निक सही, ’5d "./F (($

pnzU uf8%@20fkj fV&lfc%f77]n+4>fknfpn&%fkz%n

98%an02f/0Bf8%@20f&j%jfkRfo8E0nfv=f8%dpZ4nf7i8%; FZ4

kz%nf8%dpZf8%@20fkj f9F?knzfknflkfv/Map,@2fh4O[f/0B

ऐसी प्रनिक्रया जिजसमें इन जिसद्धान्तो का परिरपा न नहीं निकया

जाता है, तो ऐसा माना जायेगा निक पीनि~त व्यनिक्त के अक्षि?कारो

पर प्रक्षितक

ू प्रभाव हुआ है।

14.सवVच्च न्याया य ने अपने कई निनर्णय मे निनरंतर यह

प्रक्षितपानिदत निकया है निक नैसर्गिगक न्याय के जिसद्धान्तो का पा न

98%an02fZpf7jf8k0nfTn%nf.n8/0jBfk7nf%fkz%jf7jf7vh4

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13

kn02an/-f8%zh4fkRfTnf7k4-f/0Bf77]n+4>fknfp6zpn&%f%

kz%jf7jf0/fvn%nfTn0jrnfkRfkn02an/-fvjf8%dpZ4nf%/RfzG-

गयी है। एस ए कपूर बनाम जगमोहन एंड सन्स (1980 (4)

न्याय के निनयमो का पा न तब भी निकया जाना .ानिहये जब

k>8fk7jf98aan8U4f4q0fT>f8%@20f&j%jfkj fV&lfp0n2ef/>

और नोनिटस देने के बाद भी अन्त परिरर्णाम वही होगा। इस पर

सवVच्च न्याया य नॆ प्रक्षितपानिदत निकया निक केव इसलि ए

क्योंनिक तथ्य स्वीकार निकये जा सकते है या निनर्गिववाद है,

नैसर्गिगक न्याय के जिसद्धान्तो का पा न न करने का कोई कारर्ण

नहीं हो सकता है। सवVच्च न्याया य की पाँ. न्यायमूर्तित की

संवै?ानिनक पीठ ने एस एस निग बनाम .ीफ इ ेक्शन

कनिमशनर (1978 (1) एस सी सी 405), में यह प्रक्षितपानिदत

8k0nf8kfon n78%kflaDf9?2+0nF0kfkn0Vfv=f%07trkf+0n0

,0 .7“] +'>., . 6: 65.9’5( -4.#0B.नैसर्गिगक न्याय के

निनयमों का उद्देश्य "न्याय को निवफ होने से रोकना” है। ये

8%0vf+0nF0kf4mnf+0nF0k-kTpfknz2an80Lfv=f4>f&nr,f/>4j

ही हैं, az%fo n78%kfknz2an80Lfv=f[-f&nr,f/>4jf/wB

न्याक्षियक-kTpfTnW.f4mnfo n78%kfTnW., दोनों, का उद्देश्य

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यही होता है निक न्यायसंगत निवनिनश्चय पर पह

ुँ.े। प्रशासनिनक

/>%nf4mnf;F.4flaDf+0n07Dr4fZpf7jfkn02fkz%n, 9’5( -4

है। यह सुप्रक्षितनिष्ठत निवक्षि? है निक, k7-fo n78%kfkn02an/-fv=,

जो जिसनिव द

ुष्परिरर्णाम उत्पन्न करती हो

, नैसर्गिगक न्याय के

77]n+4f98%an02fZpf7jf&nr,f/>4jf/0Bf9mn24Hf8k7-

प्रशासनिनक आदेश से जिसनिव द

ुष्परिरर्णाम उत्पन्न होते हों तो

ऐसा प्रशासनिनक आदेश भी नैसर्गिगक न्याय के निनयमों के

अनुपा न के उपरान्त ही पारिरत निकयॆ जा साकतॆ है।

"निवक्षि?सम्मत शासन” का अंतनिनर्गिहत जिसद्धान्त है निक जिसनिव

ुष्परिरर्णाम

उत्पन्न करने वा ा आदेश, नैसर्गिगक न्याय के

जिसद्धान्तों का अनुपा न करके ही पारिरत निकया जायॆ।

15.a42vn%f0nF.knfkj f4q0>f7jf0/f8a8U4f15होता है, निक

0n.-fkj f8aZ]f7vh4fkn02an/-fknf1?nzfZj8@0fp,4u

अक्षि?कारी की जाँ. आख्या निदनांक 26.06.2016 है। उप

जिज ाक्षि?कारी एवं आय

ुक्त ने उक्त जां. आख्या को ही आ?ार

vn%fkzf9p%jf8%@20fpn6z4f8k0jf/0Bfc7f4q015 से निक उक्त

जां. आख्या के प्रक्षित या.ी को नहीं दी गई है, प्रक्षित वादी के

अक्षि?वक्ता इंकार नहीं कर पाये है। अतः यह जिसद्ध होता है निक

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उक्त जां. आख्या की प्रक्षित या.ी को कभी भी नही दी गई है।

v0ff0n.-fkjf8adn%f9F?a2nfkjfkm%f7jfp,@24: सहमत ह

ूँ की

8%@20f&j%jfkRfo8E0nfv=ff8%dpZ4nf%/RfzG-fr0-f/0fa

नैसर्गिगक न्याय कॆ जिसद्धान्तों का परिरपा न नहीं निकया गया है।

16.उपरोक्त निववे.ना के प्रकाश में एवं उपरोक्त वर्शिर्णत न्याक्षियक

प्रक्षितपादनों के गहन अध्ययन के उपरान्त, v0fc7f8%dkJ2fpz

पह

ुँ.ता हूWf8kfa42vn%fanUfvjf%07trkf+0n0fkj f77]n+4>fkn

अनुपा न नहीं ह

ु1f/0Bfc7fknz@f7jf8%@20f&j%jfkRf7Op,@2

प्रनिक्रया द

ू8J4f/>fr8f/0Bf94Ufk7-fo8E0nfk>f+0n0p,@2fa

U>Jz8/4f%/Rfk/nfTnf7k4nf/0Bf94Uf1Zj8p4f1Uj

निदनांक 16.09.2011 (उपजिज ाक्षि?कारी निनजामाबाद,

आजमगढ़) एवं 25.01.2017 (आय

ुक्त

, आजमगढ़ मण्ड ,

आजमगढ़) +0n0p,@2f%f/>%jfkj fknz@f8%zh4f8k0jfTn%jf0>f0

है, अतः निनरस्त निकये जाते है। यह याक्षि.का इस आदेश कॆ

7nmf9DF4vfZpf7jfनिनस्तारिरत की जाती है, 8kfa<2vn%

kj f7nmf8k0nfTn4nf/0, aIfa<2vn%fokz@fk>f%07trk

जिसद्धान्तों का पा न करते ह

ुए

, इस आदेश की प्रमाथिर्णत

प्रक्षितलि निप के निम ने के . :.“& #.,_ .9$'%4', गुर्ण दोष के

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आ?ार पर निनस्तारिरत करेंगे। यहां यह उल्लेलिखत करना

1aL0kf/0f8kfc7f+0n0n&0f%jfa42vn%fokz@fkj fri@fU>J

पर कोई निटप्पर्णी नहीं की है।

Order Date :- 15.11.2019

A. Dewal

(न्यायमूर्तित सौरभ श्याम शमशेरी )

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