“प्रकाशनार्थ स्वीक
ृत
”
निनर्णय सुरक्षित- 06.01.2022
निनर्णय उद्घोनि!त- 17.01.2022
न्यायालय क -42
वाद :- प्रार्थनापत्र अन्तर्गत धारा 482 संख्या-5688/2018
आवेदक:- श्रीमती लक्ष्मी देवी एवं 3 अन्य
निवपी:- उत्तर प्रदेश शासन व अन्य
आवेदक के अक्षिधवक्ता:- राम क
ुमार पाल
निवपी के अक्षिधवक्ता:- शासकीय अक्षिधवक्ता, अनमोल क्षितवारी
माननीय सौरभ श्याम शमशेरी , न्यायमूर्तित
1.तथ्यात्मक प्रारुप
(क) आवेदक संख्या 1, श्रीमती लक्ष्मी देवी ने एक प्रर्थम सूचना रिरपोर्ट
संख्या 0311, निदनांक 29.03.2015 को, निवपी संख्या 2 व उसके अन्य
रिरश्तेदार के निवरुद्ध, भारतीय दण्ड संनिNता की धारा 302, 354, 498-ए, 511 के
अंतर्गत आवेदन धारा 156 (3) दण्ड प्रनिOया संनिNता, निदनांक 05.01.2015 के
कायवाNी के उपरान्त दर्ज करवाई निक:-
“1. यN निक प्रार्थिर्थनी का दामाद रमाशंकर कुशवाNा उसके भाई रार्जू, मनोर्ज,
शंकरलाल, लल्लन पुत्र रामनरायन तर्था श्रीमती वीना कुशवाNा पत्नी मनोर्ज
कुशवाNा निनवासिसनी म0नं0 112 मसवानपुर र्थाना कल्यानपुर कानपुर नर्गर
प्रार्थिर्थनी की पुत्री श्रीमती बसन्ती पत्नी रमाशंकर को निपछले लर्गभर्ग तीन
साल से काफी ज्यादा प्रतानिZत करके उसके सार्थ अत्यक्षिधक मारपीर्ट करते
र्थे तर्था उसे आत्मNत्या कर लेने के लिलये उकसाते र्थे। 2. यN निक दामाद
रमाशंकर के र्गलत सम्बन्ध एक मनिNला से Nोने के कारर्ण प्रार्थिर्थनी की पुत्री
उसका निवरोध करती र्थी निकन्तु रमाशंकर का सNयोर्ग उसके उक्त भाई करते
र्थे। उक्त लोर्गों की र्जमीन एक्वायर Nोने के कारर्ण सरकारी मुआवर्जा निमला Nै
सिर्जसके कारर्ण उक्त सभी भाई आपस में बैठकर शराब भी पीते र्थे। तमाम
लोर्गों के सार्थ र्जुआ भी खेलते र्थे। 3. यN निक मनोर्ज कुशवाNा भी प्रार्थिर्थनी
Nइम्रtध्ेंऔोत्ैंtेंtैंश्वींोNश्वंो8ोआ5आआक्तर्तिरित्क्तश्रमम5
2
की पुत्री पर र्गलत नर्जर रखता र्था लिलNार्जा उसके सार्थ शराब पीकर कई
बार छेZछाZ भी कर चुका र्था व बलात्कार के प्रयास में भी र्था र्जानकारी पर
प्रार्थिर्थनी कई बार अपनी पुत्री के घर में र्जाकर पूव में कई निदनों तक रुकी भी
र्थी। मनोर्ज की पत्नी ेत्रीय सभासद Nै लिलNार्जा इन लोर्गों को स्र्थानीय
पुलिलस का संरर्ण भी प्राप्त Nै। 4. यN निक निदनांक 18.12.2014 को
प्रार्थिर्थनी को अज्ञात व्यनिक्त से सूचना निमली की उक्त लोर्ग प्रार्थिर्थनी की पुत्री की
Nत्या की योर्जना बना रNे Nैं। सूचना पर प्रार्थिर्थनी अपने पुत्र के सार्थ तत्काल
पुत्री बसन्ती की ससुराल करीब 2:30 बर्जे निदन पNुँची तो उक्त सभी लोर्ग
घर के अन्दर प्रार्थिर्थनी की पुत्री को फांसी पर लर्टका रNे र्थे। 5. यN निक
प्रार्थिर्थनी की आNर्ट पर सभी भार्ग खZे Nुए। प्रार्थिर्थनी की पुत्री की Nालत
खराब र्थी। र्थोZा र्थोZा बोल पा रNी र्थी तब उसने बताया निक देवर मनोर्ज ने
उसके सार्थ शराब पीकर बलात्कार का प्रयास निकया Nै सिर्जसकी शिशकायत पर
सभी लोर्गों को मनोर्ज ने बरर्गलाया और परिरवार को बेइज्जती से बचाने के
लिलए सभी ने निमलकर बसन्ती की Nत्या करने के इरादे से आत्मNत्या का रुप
देने के लिलये र्जबरिरया फांसी पर लर्टका निदया। 6. यN निक उसने यN भी
बताया निक रमाशंकर ने प्रार्थिर्थनी की पुत्री को पकZा रार्जू व शंकरलाल ने पैर
पकZे, लल्लन ने भी लिलपर्ट कर पकZा मुN बन्द निकया। बीना कुशवाNा ने
फांसी का फन्दा र्गले में डाला र्था मनोर्ज ने कZे में रस्सी फं सा कर खींचा
सिर्जसमें उक्त सभी लोर्गों ने सNयोर्ग निकया। 7. यN निक प्रार्थिर्थनी की पुत्री की
Nालत नार्जुक र्थी तब तुरन्त प्रार्थिर्थनी अपने पुत्र के सार्थ पास के अस्पताल
ले र्गयी तर्था अन्य लोर्गों व पुलिलस को भी 100 नंबर पर सूचना निदया तब
तक उसकी मृत्यु Nो र्गयी। 8. यN निक मौके पर पुलिलस आयी र्जNाँ पर पक्षित
रमाशंकर व उसके भाई आनिद फरार र्थे बाद में पुलिलस के कNने पर पुत्री
बसन्ती को Nैलर्ट ले र्जाया र्गया र्जNाँ पर भी डाक्र्टरों ने उसे मृत बनाया। 9.
यN निक प्रार्थिर्थनी ने घर्टना की सूचना पुलिलस को निदया तो पोस्र्टमार्टम के बाद
कायवाNी का आश्वासन निदया तब से लर्गातार प्रार्थिर्थनी र्थाना कल्यानपुर
3
दौZती रNी निकन्तु प्रार्थिर्थनी का मुकदमा दर्ज नNीं निकया र्गया। तब प्रार्थिर्थनी
द्वारा र्जरिरये डाक प्रार्थनापत्र निदनांक 24.12.2014 श्रीमान् एस0एस0 पी0
साNब कानपुर नर्गर को व र्थानाध्य कल्यानपुर को प्रेनि!त निकया तर्था एस0
एस0पी0 साNब से भी व्यनिक्तर्गत रुप में निमली निकन्तु आर्ज तक प्रार्थिर्थनी का
मुकदमा दर्ज नNीं निकया र्गया। उक्त अशिभयुक्त बीना कुशवाNा ेत्रीय सभासद
Nै सिर्जसके कारर्ण र्थाना पुलिलस उनके प्रभाव में Nोने के कारर्ण मुकदमा दर्ज
नNीं कर रNी Nै। 10. यN निक न्यायनिNत में प्रार्थिर्थनी का मुकदमा दर्ज कर
निववेचना निकये र्जाने Nेतु र्थाना प्रभारी कल्यानपुर को आदेशिशत निकया र्जाना
न्यायोक्षिचत Nोर्गा।”
(ख) तदोपरान्त निवपी संख्या 2 ने, आवेदक संख्या 1 व उसके तीनों पुत्र
(आवेदक संख्या 2 लर्गात् 4) के निवरुद्ध एक प्रार्थना पत्र धारा 156(3)
दं0प्र0सं0, निदनांक 21.01.2015 को न्यायालय सी.एम.एम. II, कानपुर नर्गर में
भा0दं0सं0 की धारा 306, 384, 385, 506 के अंतर्गत दायर की निक:-
“2.यN निक प्रार्थt की शादी बसन्ती पुत्री स्व0 Nीरालाल निन0-देवकलिलया
र्थाना अकबरपुर सिर्जला कानपुर देNात से असा करीबन 20 व! पूव Nुई र्थी
प्रार्थt और बसन्ती के संसर्ग से एक पुत्र अशिभ!ेक उम्र करीब 15 !91(`&5
Nुआ र्जो प्रार्थt के पास Nै। प्रार्थt की पैत्रक र्जमीन एक्वायर Nोने के कारर्ण
प्रार्थt को मुआवर्जा धनराशिश प्राप्त Nुई र्थी उससे प्रार्थt की पत्नी बसन्ती ने
अपनी माँ से 5 व! पूव दो बीघा र्जमीन सम्पूर्ण निवOय धनराशिश अदा करके
Oय की र्थी। र्जो प्रार्थt की सास लक्ष्मी देवी के कब्र्जे में र्थी कुछ समय बाद
प्रार्थt की सास श्रीमती लक्ष्मी देवी, साले श्रीपाल, रामपाल, शिशवपाल की
नीयत खराब Nो र्गई और उक्त र्जमीन पर र्जबरन कब्र्जा कर लिलया तर्था प्रार्थt
व प्रार्थt की पत्नी बसन्ती पर उक्त र्जमीन पुनः अपने नाम करने का दबाव
देने लर्गे और मानसिसक शारीरिरक रुप से प्रार्थt की पत्नी बसन्ती को प्रतानिZत
करने लर्गे तर्था झूठे मुकदमें में बंद करा देने व Nत्या कर देने की धमकी देने
लर्गे उपरोक्त लोर्गों की प्रताZना से प्रार्थt की पत्नी बसन्ती मानसिसक रुप से
4
अस्वस्र्थ Nो र्गयी। निदनांक 18.12.14 को समय करीबन 2 बर्जे निदन में प्रार्थt
की सास लक्ष्मी देवी पत्नी स्व0 Nीरालाल, साले श्रीपाल, पुत्र स्व0
Nीरालाल निनवासीर्गर्ण देवकलिलया र्थाना अकबरपुर कानपुर देNात, रामपाल,
शिशवपाल, पुत्रर्गर्ण स्व0 Nीरालाल निनवासी तरर्गांव र्थाना र्गर्जनेर सिर्जला
कानपुर देNात एकराय Nोकर प्रार्थt के घर पर आये और प्रार्थt की पत्नी
बसन्ती पर उपरोक्त र्जमीन पुनः अपने नाम करने का दबाव निदया और
तरN-तरN से प्रतानिZता निकया और चले र्गये उपरोक्त लोर्गों की प्रताZना के
कारर्ण प्रार्थt की पत्नी बसन्ती ने उसी निदन समय करीबन 4 बर्जे निदन में
कमरे में लर्गे पंखे से फांसी लर्गाकर आत्मNत्या कर ली उस समय प्रार्थt बैंक
र्गया र्था वापस घर आने पर प्रार्थt ने अपनी पत्नी को कमरे में फांसी पर
लर्टका पाया। उपरोक्त लोर्ग र्गायब र्थे। प्रार्थt ने अपने फोन नम्बर
7668759818 से उपरोक्त लोर्गों को पत्नी के फांसी लर्गाकर आत्मNत्या
कर लेने की सूचना दी और उपरोक्त घर्टना की सूचना प्रार्थt के भाई
रनिवशंकर ने सम्बन्धिन्धत र्थाना कल्यानपुर में दी सिर्जसके आधार पर प्रार्थt की
पत्नी बसन्ती का प्रार्थt की सास लक्ष्मी देवी, साले श्रीपाल, रामपाल,
शिशवपाल की उपन्धिस्र्थक्षित में पंचनामा Nोकर निद0 19.12.14 4 1( 0I55I95
Nुआ। प्रार्थt अपनी पत्नी बसन्ती की लाश प्राप्त कर उसका अंक्षितम संस्कार
निकया। मुNल्लेवालों द्वारा यN कNे र्जाने पर निक बसन्ती की आत्मNत्या का
कारर्ण बसन्ती की माँ और भाई Nै। उक्त बाते सुनकर प्रार्थt की सास लक्ष्मी
देवी, साले श्रीपाल, रामपाल, शिशवपाल उपरोक्त ने प्रार्थt की धमकी दी निक
यनिद आप Nम लोर्गों के लिखलाफ कोई कायवाNी की तो Nम तुम लोर्गों को झूठे
संर्गीन मुकदमें में फं साकर र्जेल में सZवा देंर्गे और उक्त धमकी देते Nुये चले
र्गये। उपरोक्त घर्टना को अश्वनी निमश्रा निदनेश कुशवाNा निन0-मसवानपुर
कानपुर नर्गर तर्था अन्य मोNल्ले के लोर्गों ने देखा व सुना Nै।
3.यN निक प्रार्थt उपरोक्त घर्टना की रिरपोर्ट लिलखाने र्थाना कल्यानपुर र्गया
र्जNाँ पर पुलिलसवालों ने कNा निक र्जाँच में र्जो मुन्धिल्र्जम Nोर्गा उसी के लिखलाफ
5
कायवाNी की र्जायेर्गी। कNते Nुये प्रार्थt को वापस कर निदया परन्तु रिरपोर्ट
आर्ज तक नNीं लिलखी र्गई। तब प्रार्थt ने निदनांक17.01.15 को एस0एस0
पी0 कानपुर नर्गर, एस0ओ0 कल्यानपुर, सी0ओ0 कल्यानपुर, डी0
आई0र्जी0 कानपुर र्जोन, कानपुर, डी0र्जी0पी0 उ0प्र0 शासन लखनऊ
को पंर्जीकृत डाक से प्रार्थनापत्र निदये परन्तु निफर भी आर्ज तक रिरपोर्ट नNीं
लिलखी र्गई। प्रार्थना पत्र व रसिर्जस्र्ट्री रसीदों की फोर्टोंप्रक्षितयां सार्थ में संलग्न Nै।
4.यN निक प्रार्थt की पत्नी बसन्ती का पंचनामा निद0 19.12.14 को
Nुआ तर्था पोस्र्टमार्टम भी निद0 19.12.14 को Nुआ। फोर्टोकॉनिपयां सार्थ में
संलग्न Nै।
5.यN निक सम्बन्धिन्धत र्थाना पुलिलस प्रार्थt की रिरपोर्ट दर्ज नNीं कर रNी Nै
सिर्जससे प्रार्थt के पास श्रीमान र्जी के सम प्रार्थनापत्र प्रस्तुत के अलावा
अन्य कोई रास्ता रिरपोर्ट लिलखाने का नNीं रNा Nै।”
(र्ग) उक्त प्रार्थनापत्र पर ए.सी.एम.एम. (II), कानपुर नर्गर द्वारा आदेश
निदनांक 06.02.2015 पारिरत निकया र्गया निक, उक्त प्रार्थनापत्र को परिरवाद के रुप में
दर्ज निकया र्जाता Nै व पत्रावली वास्ते अनिम कायवाNी के लिलए पेश Nो।
(घ) उपरोक्त आदेशानुसार रमाशंकर (प्रक्षितप सं0 2) (वादी) का ब्यान
धारा 200 दं0प्र0सं0 के अंतर्गत, र्गवाN निदनेश व र्गवाN अश्वनिन का ब्यान धारा
202 दं0प्र0सं0 के अंतर्गत दर्ज करे र्गये। तद्उपरान्त आदेश निदनांक
27.02.2017 द्वारा धारा 384, 385, 506 भा0दं0सं0 के अन्तर्गत दण्डनीय
अपराध के मामले में आवेदकर्गर्णों को द्वारा समन आN
ूत निकया र्गया। आदेश का
प्रासंनिर्गक भार्ग निनम्न Nै-
“संेप में परिरवादपत्र के अनुसार कर्थानक इस प्रकार Nै निक प्रार्थt की
शादी बसन्ती से असा करीब 20 व! पूव Nुई र्थी प्रार्थt और बसन्ती के संसर्ग
से एक पुत्र अशिभ!ेक पैदा Nुआ र्जो प्रार्थt के पास Nै। प्रार्थt की पैत्रक र्जमीन
एक्वायर Nोने के कारर्ण प्रार्थt को मुआवर्जा धनराशिश प्राप्त Nुई र्थी उससे
प्रार्थt की पत्नी बसन्ती ने अपनी माँ से 05 व! पूव दो बीघा र्जमीन सम्पूर्ण
6
धनराशिश अदा करके Oय की र्थी, र्जो प्रार्थt के सास लक्ष्मी देवी के कब्र्जे में
र्थी कुछ समय बाद प्रार्थt की सास लक्ष्मी देवी, साले श्रीपाल, रामपाल,
शिशवपाल की नीयत खराब Nो र्गई और उक्त र्जमीन पर र्जबरन कब्र्जा कर
लिलया तर्था प्रार्थt व प्रार्थt की पत्नी बसन्ती पर उक्त र्जमीन पुनः अपने नाम
करने का दबाव देने लर्गे और मानसिसक व शारीरिरक रुप से प्रार्थt की पत्नी
बसन्ती को प्रतानिZत करने लर्गे तर्था झूठे मुकदमें में बंद करा देने व Nत्या
कर देने की धमकी देने लर्गे उपरोक्त निवपीर्गर्ण की प्रताZना से प्रार्थt की
पत्नी बसन्ती मानसिसक रुप से अस्वस्र्थ Nो र्गयी। निदनांक 18.12.14 को
समय करीबन 2:00 बर्जे निदन में निवपीर्गर्ण एकराय Nोकर प्रार्थt के घर पर
आये और प्रार्थt की पत्नी बसन्ती पर उपरोक्त र्जमीन पुनः अपने नाम करने
का दबाव निदया और तरN-तरN से प्रतानिZता निकया और चले र्गये उपरोक्त
लोर्गों की प्रताZना के कारर्ण प्रार्थt की पत्नी बसन्ती ने उसी निदन समय
करीबन 4:00 बर्जे निदन में कमरे में लर्गे पंखे से फांसी लर्गाकर आत्मNत्या
कर ली, उस समय प्रार्थt बैंक र्गया र्था वापस घर आने पर प्रार्थt ने अपनी
पत्नी को कमरे में फांसी पर लर्टका पाया। उक्त के बावत संबंक्षिधत र्थाने व
पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्य बयान परिरवादी अंतर्गत धारा-200
दं0प्र0सं0 एवं धारा-202 दं0प्र0सं0 के अन्तर्गत परीक्षित साीर्गर्ण
निदनेश व अश्वनी निमश्रा की साक्ष्य के आधार पर प्रर्थम दृष्टया अशिभयुक्तर्गर्ण
श्रीमती लक्ष्मी देवी, श्रीपाल, रामपाल व शिशवपाल के निवरुद्ध धारा- 384,
385, 506 भा0दं0सं0 के तNत मामला बनता प्रकर्ट Nोता Nै। अतः
अशिभयुक्तर्गर्ण उपरोक्त को तलब निकया र्जाना न्यायोक्षिचत प्रकर्ट Nोता Nै।”
(ङ) प्रकरर्ण की पत्रावली के अनुसार आवेदक संख्या 1 की पुत्री व निवपी
संख्या 2 की पत्नी सिर्जसकी मृत्य
ु
18.12.2014 को N
ुई र्थी
, उसके शव निवच्छेदन
आख्या के अशिभमत के अनुसार उसकी मृत्य
ु का तत्काल कारर्ण दम घुर्टना
7
(asphyxia), बताया र्गया, सिर्जसका कारर्ण मृत्य
ु पूव
(anti mortem) फाँसी
(hanging) बताया र्गया।
(च)उपरोक्त आदेश वतमान प्रार्थना पत्र में आेनिपत निकया र्गया Nै। प्रक्षित शपर्थपत्र
व प्रत्य
ुत्तर शपर्थपत्र दालिखल निकये र्जा चुके Nैं।
2.आवेदकर्गर्ण का प
(क) आवेदकर्गर्ण का प रखते N
ुए उनके निवद्वान अक्षिधवक्ता श्री राम कुमार
पाल के कर्थन निकया निक निवपी संख्या 2 व उसके परिरवार के निवरुद्ध धारा 156
(3) दं0प्र0सं0 (निदनांक 05.01.2015) के माध्यम से एक प्रर्थम सूचना रिरपोर्ट
संख्या 311 !912015, निदनांक 29.03.2015 को धारा 302, 354, 376,
498-ए, 511 भारतीय दण्ड संनिNता के अन्तर्गत दर्ज कराई, सिर्जसकी निव!यवस्तु
का उल्लेख पूव में निकया र्जा चुका Nै, निक इन्Nोने उसकी पुत्री की कशिर्थत रुप से Nत्या
18.12.2014 को कर दी व उसको कशिर्थत रुप से आत्मNत्या का रुप दे निदया
र्गया। आवेदक संख्या 1 द्वारा प्रार्थना पत्र निदनांक 05.01.2015 प्रर्थम सूचना
रिरपोर्ट दर्ज करने के लिलए दायर करने के तुरन्त बाद Nी निवपी संख्या 2 ने एक
प्रार्थना पत्र निदनांक 21.01.2015 प्रर्थम सूचना रिरपोर्ट दर्ज करने के लिलए दायर
निकया, सिर्जसके अनुसार आवेदकर्गर्ण पर उद्दापन करने व उद्दापन करने के लिलए
निकसी व्यनिक्त को निकसी क्षित के भय में डालने व आपराक्षिधक अशिभत्रास के आरोप
लर्गाये, र्जो न के वल द
र्जवाब देने के लिलए व उन पर अनुक्षिचत दबाव डालने के उद्देश्य के लिलए दायर निकया
र्गया र्था।
(ख) निवद्वान अक्षिधवक्ता ने यN भी कर्थन निकया निक परिरवाद के अन्तःवस्तु,
धारा 200 दं0प्र0सं0 के अंतर्गत वादी के ब्यान व धारा 202 दं0प्र0सं0 के
अंतर्गत अन्य र्गवाNों के ब्यान के आधार पर निवद्वान अवर न्यायालय के पास, सम्मन
करने का पयाप्त आधार Nोने का उक्षिचत संतो! नNीं र्था। आवेदक र्गर्ण के निवरुद्ध
प्रर्थम दृष्टया मामला Nी नNीं बनता Nै। उद्दापन व उसको कारिरत करने के लिलए
निकसी क्षित के भय में डालने व आपराक्षिधक अशिभत्रास के तत्व, प्रर्थम दृष्टया भी इस
8
मामले में उपन्धिस्र्थत नNीं Nै। अतः उपरोक्त सम्मन का आदेश व उसके Oम में
समस्त आपराक्षिधक कायवाNी को निनरस्त निकया र्जाना चानिNए।
3.वादी ( निवपी संख्या 2) का प
निवपी संख्या 2 के निवद्वान अक्षिधवक्ता श्री अनमोल क्षितवारी ने उपरोक्त
बNस का निवरोध निकया। उन्Nोने तक निदया निक आवेदक संख्या 1, द्वारा दर्ज प्रर्थम
सूचना रिरपोर्ट पर अन्वे!र्ण के उपरान्त अन्धिन्तम रिरपोर्ट दायर कर दी र्गयी र्थी।
आवेदक द्वारा प्रोर्टेस्र्ट प्रार्थना पत्र दायर निकया र्गया र्था। परन्तु इसके अनिम
कायवाNी का कोई साक्ष्य इस न्यायालय के सम नNीं लाया र्गया Nै। इसके निवपरीत
निवपी 2 द्वारा दायर परिरवाद, उसकी र्गवाNी व अन्य र्गवाNों की ब्यानों के आधार
पर आवेदकर्गर्ण के निवरुद्ध धारा 384, 385, 511 भा0दं0सं0 के अंतर्गत अपराध
कारिरत करने का प्रर्थम दृष्टया मामला बनता Nै सिर्जसमें कोई निवक्षिधक त्रुनिर्ट नNीं Nै
मामला नNीं बनता Nै। अतः वतमान प्रार्थना पत्र निनरस्त निकया र्जाये।
4. निवद्वान अक्षिधवक्तार्गर्णों को सुना व पत्रावली का अवलोकन निकया।
5.मसिर्जस्र्ट
्रेर्टों से परिरवाद व उच्च न्यायालय की अन्तर्निननिNत शनिक्तयां की निवक्षिध
:-
(क) मसिर्जस्र्ट
्रेर्ट से निकये र्गए परिरवाद की प्रनिOयात्मक योर्जना को दंड प्रनिOया
संनिNता, 1973 (दं0प्र0सं0) के अध्याय 15 में उल्लेलिखत निकया र्गया Nै। परिरवाद
दायर Nोने पर संज्ञान लेने वाला मसिर्जस्र्ट
्रेर्ट
, परिरवादी की और यनिद कोई साी
करेर्गा। यनिद परिरवाद लिललिखत रुप में निकसी लोकसेवक ने अपने पदीय कतव्यों के
निनवNन में काय करते N
ुए या काय करने का तात्पय रखते Nुए दायर निकया Nो या
मसिर्जस्र्ट
्रेर्ट मामले की र्जाँच या निवचरर्ण के लिलए धारा
192 दं0प्र0सं0 के अधीन
निकसी अन्य मसिर्जस्र्ट
्रेर्ट के Nवाले कर निदया Nो तब मसिर्जस्र्ट्रेर्ट के लिलये परिरवादी व
साक्ष्य की परीा करना आवश्यक नNीं Nै। अर्गर मसिर्जस्र्ट
्रेर्ट परिरवाद व साक्ष्य की
परीा करने के उपरान्त अन्य मसिर्जस्र्ट
्रेर्ट के Nवाले करता Nै तो बाद वाले मसिर्जस्र्ट्रेर्ट
को उनकी निफर से परीा करना आवश्यक नNीं Nै। (देखें धारा 200 दं प्र सं)। यनिद
9
लिललिखत परिरवाद ऐसे मसिर्जस्र्ट
्रेर्ट को निकया र्गया Nो
, र्जो उस अपराध का संज्ञान करने
लिलये लौर्टा देर्गा, और अर्गर परिरवाद लिललिखत नNीं Nै, तो परिरवादी को समुक्षिचत
(ख) मसिर्जस्र्ट
्रेर्ट ऐसे अपराध
, सिर्जसका संज्ञान लेने के लिलए वN प्राक्षिधक
ृत Nो
या धारा 192 के अधीन उसके Nवाले निकया र्गया Nो और ठीक समझता Nै और ऐसे
मामले र्जNॉं अशिभय
ुक्त का निनवास उसके ेत्राक्षिधकार से परे Nो
, तो अशिभय
ुक्त के
निवरुद्ध आदेशिशका र्जारी करना मुल्तवी कर सकता Nै, और यN निवनिनश्चत करने के
प्रयोर्जन से की कायवाNी करने के पयाप्त आधार Nैं या नNीं, या तो मामले की र्जाँच
स्वयं कर सकता Nै और अर्गर ठीक लर्गे तो साी का साक्ष्य शपर्थ पर ले भी
सकता, या निकसी पुलिलस अक्षिधकारी से अन्य निकसी व्यनिक्त से, सिर्जसको वो ठीक
समझे ( उस व्यनिक्त को वारंर्ट के निबना निर्गरफ़्तार करने के सिसवाय वो सब अक्षिधकार
Nोर्गे र्जो पुलिलस र्थाने के भारसाधक अक्षिधकारी को Nोते Nै ), अन्वे!र्ण निकये र्जाने के
नNीं निदया र्जा सकता Nै:- र्जNां मसिर्जस्र्ट
्रेर्ट को यN प्रतीत Nोता Nो
, अपराध सिर्जसका
परिरवाद निकया र्गया Nै अनन्यत: सेशन न्यायालय द्वारा निवचारर्णीय Nै, परन्तु परिरवादी
से अपने साक्ष्य को पेश करने की अपेा करेर्गा और उसकी शपर्थ पर परीा करेर्गा
अन्यर्था र्जNां परिरवाद न्यायालय द्वारा नNीं निकया र्गया Nै, र्जब तक परिरवादी की या
उपन्धिस्र्थत साक्षियों की (यनिद कोई Nो) धारा 200 के अधीन शपर्थ पर परीा नNीं
कर ली र्जाती Nै। (देखें धारा 202 दं प्र सं )
(र्ग) यनिद परिरवादी के और साक्षियों के शपर्थ पर निकए र्गये कर्थन पर (यनिद
कोई Nो) और धारा 202 के अधीन र्जाँच या अन्वे!र्ण ( यनिद कोई Nै) के परिरर्णाम
पर निवचार करने के पश्चात, मसिर्जस्र्ट
्रेर्ट की यN राय Nै निक कायवाNी करने के लिलये
पयाप्त आधार नNीं Nै, तो वो परिरवाद ख़ारिरर्ज कर देर्गा, व ऐसा करने के अपने
कारर्ण को संेप में अशिभलिललिखत करेर्गा। (देखें धारा 203 दं प्र सं) और यनिद
अपराध का संज्ञान करने वाले मसिर्जस्र्ट
्रेर्ट की राय में कायवाNी करने के लिलए पयाप्त
10
आधार Nै तो वो धारा 204 दं0प्र0सं0 के प्रावधानों के अंतर्गत यर्थोक्षिचत
आदेशिशका र्जारी करेर्गा।
्रेर्ट की राय Nोने का
ुक्त के लिखलाफ प्रर्थम दृष्टया मामला बनने के लिलए
पयाप्त आधार का Nोना Nो, न निक वो ‘संतो!’ र्जो अशिभय
ुक्त के लिख़लाफ़ दो! सिसद्ध
Nोने के लिलए पयाप्त आधार का Nोना Nोता Nै। आदेशिशका र्जारी करते समय मसिर्जस्र्ट
्रेर्ट
को उपलब्ध साक्ष्य का मूल्यांकन का माप दंड वैसा नNीं Nो सकता Nै, र्जैसा की
न्यायालय निवचारर्ण के समय करता Nै और न Nी साक्ष्य का मूल्यांकन करते समय
वो मानक अपनाना Nै, र्जो मसिर्जस्र्ट
्रेर्ट आरोप की निवरचना के समय ध्यान में रखता
Nै। (देखें एस0डब्लू0 पलानिनतकर प्रक्षित निबNार राज्य:(2002) 1 एस0सी0सी0
241, के वल क
ृष्र्णनन प्रक्षित सूरर्जभान व अन्य
:(1980) सप्पली एस0सी0सी0
499)
(ङ) आदेशिशका र्जारी करने की प्रनिOया यांनित्रक नNीं Nोनी चानिNए और न Nी
वो अशिभय
ुक्त का उत्पीडन करने के साधन के रूप में उपयोर्ग Nोनी चानिNए।
आरोनिपयों को आपराक्षिधक मामले में पेश Nोने के लिलए बुलाए र्जाने की आदेशिशका
र्जारी करने की प्रनिOया एक र्गंभीर निव!य Nै और आदेश में निवक्षिधक निववेक का उपयोर्ग
न Nोना व आवश्यक निववरर्ण की कमी को के वल, प्रनिOयार्गत अनिनयनिमतता नNीं
माना र्जा सकता Nै। (देखें निबरला कॉरपोरेशन लिलनिमर्टेड प्रक्षित एडवेन्र्टेर्ज इन्वेस्र्टमेन्र्ट
व Nोल्डिंल्डर्ग लिलनिमर्टड (2019) 16 एस0सी0सी0 610)
परिरवाद व साक्षियों के ब्यान का निववरर्ण निकसी अपराध को उद्घानिर्टत नNीं करता Nै,
या शिशकायत निनरर्थक Nो और के वल अपराधी को परेशान या उस पर अत्याचार
करने के लिलए करी र्गयी Nो। परन्तु परीर्ण के दौरान उपलब्ध बचाव या वो तथ्य र्जो
परीर्ण के अन्त में दो!रनिNत Nोने का कारर्ण बन सकते Nो, उनके आधार पर
परिरवाद निनरस्त नNीं निकया र्जा सकता Nै। आपराक्षिधक शिशकायतों को के वल इस
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आधार पर भी समाप्त नNीं निकया र्जा सकता Nै निक उसमें लर्गाए र्गए आरोप दीवानी
प्रक
ृक्षित के Nैं
, यनिद कशिर्थत अपराध के तत्व शिशकायत में प्रर्थम द्रष्टव्य उद्घानिर्टत Nोते
Nो। उच्च न्यायालय को अपने अन्तर्निननिNत शनिक्त का उपयोर्ग, मसिर्जस्र्ट
्रेर्ट के न्याक्षियक
निववेकाक्षिधकार को अपने न्याक्षियक निववेकाक्षिधकार से प्रक्षितस्र्थानिपत करने Nेतु यN र्जांच
नNीं करनी चानिNये निक क्या परिरवाद में उल्लेलिखत आरोप अर्गर सिसद्ध Nो र्जाते Nैं तो
क्या अपराधी को सर्जा निमल र्जायेर्गी। ऐसी र्जांच धारा 202 द0प्र0सं0 के
(छ) यनिद परिरवाद व साक्षियों के ब्यान में लर्गाये र्गये अनिववानिदत आरोप से
निकसी भी अपराध का क
ृत्य का Nोना प्रकर्ट नNीं Nोता Nो या अपराध के आवश्यक
अवयव उपन्धिस्र्थत नNीं Nो या परिरवाद निकसी निवक्षिधक प्रावधान के कारर्ण बाक्षिधत या
निन!ेध Nो तो इन परिरन्धिस्र्थक्षितयों में उच्च न्यायालय अन्तर्निननिNत शनिक्तयों का उपयोर्ग
कर आदेशिशका निनरस्त कर सकती Nै। परन्तु यN ध्यान में रखना Nोर्गा निक इन
असधारर्ण शनिक्तयों का दायरा तो व्यापक Nै, परंतु इसका उपयोर्ग संयम् एवम्
सावधानीपूवक Nी करना चानिNए। (देखें श्रीमती नार्गव्वा प्रक्षित निवरन्ना शिशवलिंलर्गर्गप्पा
कोंर्जाल्र्गी व अन्य (1976) 3 एस0सी0सी0 736, माधवराव र्जीवार्जीराव
सिंसक्षिधया व अन्य प्रक्षित सम्भार्जीराव चन्द्रोर्जीराव अंर्गरे व अन्य (1988)। एस0सी0
सी0 692, कमल शिशवार्जी पोकामेकर प्रक्षित मNाराष्ट
्र राज्य व अन्य
(2019) 14
एस0सी0सी0 350)
6.निवश्ले!र्ण एवं निनष्क!
उपरोक्त निवक्षिध निवश्वले!र्ण की पृष्ठभूनिम में वतमान प्रकरर्ण के तथ्यों के
आधार पर, यN निनधारिरत करना Nै निक क्या परिरवाद के कर्थन व साक्षियों के ब्यान
से, आवेदकर्गर्ण द्वारा धारा 384, 385, 511 भा0दं0सं0 के अन्तर्गत प्रर्थम
दृष्ट्या अपराध कारिरत Nोना प्रतीत Nोता Nै या नNीं अर्थवा निकसी अन्य निवक्षिधक
कारर्ण से आदेशिशका निनरस्त की र्जा सकती Nै।
7. आवेदक के निवद्वान अक्षिधवक्ता का सवप्रर्थम तक Nै निक उनके द्वारा
धारा 156 (3) की प्रनिOया के लिलए प्रार्थना पत्र निदनांक 5.1.2015 के माध्यम से
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एक प्रर्थम सूचना रिरपोर्ट निदनांक 29.03.2015 निवपी संख्या 2 व उसके परिरवार
के निवरुद्ध दर्ज करवाई। निवपी संख्या 2 ने इसका र्जवाब देने Nेतु व आवेदक पर
दबाव बनाने के लिलए धारा 156 (3) की प्रनिOया के लिलए प्रार्थना पत्र निदनांक
21.01.2015 (आवेदक के प्रार्थना पत्र के तुरंत बाद) दायर निकया सिर्जस पर
आदेशानुसार परिरवाद वाद दर्ज N
ुआ सिर्जसके Oम में धारा
200 व 202 दं0प्र0सं0
के ब्यानों के आधार पर आवेदकर्गर्ण को सम्मन की आदेशिशका पारिरत की र्गयी। इस
स्तर पर यN ध्यान देना आवश्यक Nै निक आवेदकर्गर्ण द्वारा उनके द्वारा निदये र्गये
प्रार्थनापत्र पर आदेश के उपरान्त दर्ज प्रर्थम सूचना रिरपोर्ट पर अन्धिन्तम रिरपोर्ट आने
के बाद उनके द्वारा दायर प्रोर्टेस्र्ट प्रार्थना पत्र पर पारिरत आदेश व वतमान में
अन्वे!र्ण यनिद कोई N
ुआ Nै तो उसकी वतमान न्धिस्र्थक्षित के सम्बन्ध में न तो कोई
कर्थन Nी कNा र्गया Nै और न Nी इस सम्बन्ध में कोई दस्तावेर्ज पत्रावली पर
उपलब्ध Nै। र्जबनिक निवपी संख्या 2 के द्वारा दालिखल प्रार्थना पत्र को परिरवाद मानते
N
ुए दं
0प्र0सं0 के अन्तर्गत कायवाNी करते N
ुए वतमान में सम्मन आदेशिशत निकया
र्गया Nै, अतः आवेदक र्गर्ण का कर्थन/तक निक समस्त कायवाNी के वल आवेदकर्गर्ण
पर दबाव डालने के लिलए की र्गयी Nै, सत्य प्रतीत नNीं Nोता Nै। अतः यN तक
अस्वीकार निकया र्जाता Nै।
8. अब न्यायालय को यN निनधारिरत करना Nै निक अवर न्यायालय द्वारा
आवेदकर्गर्ण के निवरुद्ध आदेशिशका पारिरत करने में कोई वैधानिनक त्रुनिर्ट N
ुई Nै या नNीं।
इसके लिलए सवप्रर्थम धारा 383, 384, 385 व 506 भा0दं0सं0 का उल्लेख
करना आवश्यक Nै र्जो निनम्न Nै।
“383. उद्दापन- र्जो कोई निकसी व्यनिक्त को स्वयं उस व्यनिक्त को या निकसी
अन्य व्यनिक्त को कोई क्षित करने के भय में साशय डालता Nै, और तद्द्वारा
इस प्रकार भय में डाले र्गए व्यनिक्त को, कोई सम्पलित्त या मूल्यवान प्रक्षितभूक्षित
या Nस्तारिरत या मुद्रांनिकत कोई चीर्ज सिर्जसे मूल्यवान प्रक्षितभूक्षित में परिरवर्तितत
निकया र्जा सके, निकसी व्यनिक्त को परिरदत्त करने के लिलए बेईमानी से उत्प्रेरिरत
करता Nै, वN "उद्दापन” करता Nै।
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384.उद्दापन के लिलए दण्ड- र्जो कोई उद्दापन करेर्गा वN दोनों में से निकसी
भांक्षित के कारावास से, सिर्जसकी अवक्षिध तीन व! तक की Nो सकेर्गी, या
र्जुमाने से, या दोनों से, दन्धिण्डत निकया र्जायेर्गा।
में डालेर्गा या भय में डालने का प्रयत्न करेर्गा, वN दोनों में से निकसी भांक्षित के
कारावास से, सिर्जसकी अवक्षिध दो व! तक की Nो सकेर्गी, या र्जुमाने से, या
दोनों से, दन्धिण्डत निकया र्जायेर्गा।
506.आपराक्षिधक अशिभत्रास के लिलए दण्ड- र्जो कोई आपराक्षिधक अशिभत्रास
का अपराध करेर्गा, वN दोनों में से निकसी भांक्षित के कारावास से, सिर्जसकी
अवक्षिध दो व! तक की Nो सकेर्गी, या र्जुमाने से, या दोनों से, दन्धिण्डत निकया
र्जाएर्गा।
यनिद धमकी मृत्यु या घोर उपNक्षित इत्यानिद कारिरत करने की Nो- तर्था
यनिद धमकी मृत्यु या घोर उपNक्षित कारिरत करने की, या अनिग्न द्वारा निकसी
सम्पलित्त का नाश कारिरत करने की या मृत्यु दण्ड से या आर्जीवन कारावास
से, या सात व! की अवक्षिध तक के कारावास से दण्डनीय अपराध कारिरत
करने की, या निकसी स्त्री पर अन्धिस्तत्व का लांछन लर्गाने की Nो, तो वN दोनों
में से निकसी भांक्षित के कारावास से, सिर्जसकी अवक्षिध सात व! तक की Nो
सके र्गी, या र्जुमाने से, या दोनों से, दन्धिण्डत निकया र्जायेर्गा।”
9. धारा 383 भा0दं0सं0 में उद्दापन के अपराध का निववरर्ण निदया र्गया
Nै, सिर्जसके अनुसार इस अपराध के आवश्यक अवयव Nैं:- (I) अपराधी, निकसी
व्यनिक्त को स्वयं उस व्यनिक्त को या अन्य व्यनिक्त को कोई क्षित करने के भय में
डालता Nै। (ii) क्षित करने का भय साशय Nो, (iii) अपराधी उस भय में डाले र्गये
व्यनिक्त को कोई संपलित्त या मूल्यवान या Nस्तारिरत या मुद्रांनिकत कोई चीर्ज सिर्जसे
मूल्यवान प्रक्षितभूक्षित में परिरवर्तितत निकया र्जा सके, निकसी व्यनिक्त को परिरदत्त करने के
लिलए बेइमानी से उत्प्रेरिरत करे।
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10. उच्चतम न्यायालय ने इसाक इसांर्गा मुसुम्बा व अन्य प्रक्षित मNाराष्ट
्र
शासन व अन्य : (2014) 15 एस.सी.सी. 357 के मामले में उद्दापन के अवयव
पर निवचार निकया और यN अवधारिरत निकया निक र्जब तक अपराधी द्वारा उसको या
अन्य व्यनिक्त को साशय क्षित पN
ुँचाने के भय के कारर्ण व उसके द्वारा बेइमानी से
उत्प्रेरिरत Nोकर कोई संपलित्त या मूल्यवान या Nस्तारिरत या मुद्रांनिकत कोई चीर्ज,
सिर्जसे मूल्यवान प्रक्षितभूक्षित में परिरवर्तितत निकया र्जा सके, निकसी व्यनिक्त को प्रदान न Nो
11. वतमान प्रकरर्ण में अनिववानिदत रुप से मृतका ने अपनी माता (आवेदक
सं0 1) से Oय की र्गयी भूनिम को वापस नNीं निकया Nै, र्जो आपराक्षिधक परिरवाद व
धारा 200 व 202 दं0प्र0सं0 के अंतर्गत दर्ज ब्यानों के परिरशीलन से भी पूर्ण रुप
से परिरलक्षित Nोता Nै। अतः वतमान प्रकरर्ण में उद्दापन के समस्त अवयव, प्रर्थम
दृष्टया भी पूर्ण नNीं Nोते Nैं। अतः वतमान प्रकरर्ण में उद्दापन (धारा 383 भा0दं0
सं0) का कोई अपराध प्रर्थम दृष्टया भी नNीं प्रकर्ट Nोता Nै। अतः उसे धारा 384
12. अब न्यायालय को यN देखना Nै क्या धारा 385 भा0दं0सं0
पत्रावली पर उपन्धिस्र्थत आपराक्षिधक परिरवाद, धारा 200 व 202 दं0प्र0सं0 के
ब्यान के मद्देनर्जर प्रर्थम दृष्टया बनता Nै या नNीं। आपराक्षिधक परिरवाद व वादी व
र्गवाNों के ब्यानों में यN कर्थन निकया र्गया Nै निक आवेदकर्गर्ण वादी की पत्नी पर
र्जमीन पुनः उनके नाम करने का दबाव देने लर्गे और मानसिसक व शारीरिरक रुप से
उसको प्रतानिZत करने लर्गे।
13. धारा 385 के अवयव उद्दापन का प्रयास करते N
ुए निकसी व्यनिक्त को
निकसी क्षित के भय में डालने या डालने का प्रयत्न करने का अपराध को वर्थिर्णत
करते Nैं। वतमान प्रकरर्ण में आपराक्षिधक परिरवाद, धारा 200 व 202 दं0प्र0सं0 के
ब्यानों से प्रर्थम दृष्टया वादी की पत्नी को उद्दापन करने का प्रयास करते N
ुए उसको
मानसिसक व शारीरिरक प्रताZना पN
ुँचाना कNा र्गया Nै। परन्तु इस नाते कै से उसको
15
भय में डालने या डालने का प्रयत्न करने का कोई निवनिनष्ठ साक्ष्य या कर्थन पत्रावली
पर उपन्धिस्र्थत नNीं Nै और न Nी यN कर्थन निकया र्गया Nै निक क्या मानसिसक या क्या
शारीरिरक प्रताZना पN
ुंचायी र्गई र्थी। अतः वतमान प्रकरर्ण में धारा
385 भा0दं0
सं0 के अवयव प्रर्थम दृष्टया उपन्धिस्र्थत न Nोने के कारर्ण इस अपराध के कारिरत Nोने
का मामला भी नNीं बनता Nै। इसी प्रकार धारा 506 भा0दं0सं0 के भी अवयव भी
उपन्धिस्र्थत न Nोने के कारर्ण भी उस अपराध के घनिर्टत Nोने का प्रर्थम दृष्टया मामला
नNीं बनता Nै।
14. र्जैसा की पूव में निवश्ले!र्ण निकया र्गया Nै निक यनिद परिरवाद व साक्षियों के
ब्यान में लर्गाये र्गये अनिववानिदत आरोप से निकसी भी अपराध का क
ृत्य का Nोना
प्रकर्ट नNीं Nोता Nो या अपराध के आवश्यक अवयव उपन्धिस्र्थत नNीं Nो तो यN
न्यायालय अपनी अन्तर्निननिNत शनिक्तयों का उपयोर्ग करते N
ुए आदेशिशका
(सम्मन)
निनरस्त कर सकता Nै।
15. अतः उपरोक्त निवश्ले!र्ण का एक Nी परिरर्णाम Nै निक यN आवेदन
स्वीकार करने योग्य Nै तद्न
ुसार स्वीकार निकया र्जाता Nै तर्था आेनिपत आदेश
निदनांक 27.02.2017 र्जो ए0सी0एम0 निद्वतीय, कानपुर नर्गर द्वारा परिरवाद
संख्या-776/15, रमाशंकर बनाम श्रीमती लक्ष्मी देवी आनिद, अन्तर्गत धारा-
384, 385, 506 भा0द0सं0 के मामले में पारिरत निकया र्गया Nै, निनरस्त निकया
र्जाता Nै।
आदेश निदनाँक:- 17.01.2022
अवधेश
(सौरभ श्याम शमशेरी, न्यायमूर्तित)
Legal Notes
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