As per case facts, Bharat Sahu died in a motor accident, leading his wife, children, and mother to file a compensation claim. The Tribunal determined the accident was caused by ...
No Acts & Articles mentioned in this case
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{MA(C) No. 149 of 2021 & 207 of 2021}
CGHC010072652021 2026:CGHC:31351
प्र
तिवेद्य
छ
त्तीसगढ़ उच्च न्यायालय
, बि
लासपुर
नि
र्णय सुरक्षित दिनांक
-17/07/2026
नि
र्णय
उ
द्घोषित दिनांक
-22/07/2026
वि
विध अपील
( क्ष
तिपूर्ति
) क्र
मांक
-149/2021
1.श्री
मती गंगाबाई साहू
, प
ति–स्वर्गीय भरत साहू
, आ
यु लगभग
39 व
र्ष
,
2.र
विकुमार साहू
, पि
ता–स्वर्गीय भरत साहू
, आ
यु लगभग
22 व
र्ष
,
3.वि
नोद कुमार साहू
, पि
ता–स्वर्गीय भरत साहू
, आ
यु लगभग
20 व
र्ष
,
4. म
नोज कुमार साहू
, पि
ता–स्वर्गीय भरत साहू
, आ
यु लगभग
18 व
र्ष
,
5.श्री
मती गंगाबाई साहू
, प
ति–स्वर्गीय धर्मलाल साहू
, आ
यु लगभग
63 व
र्ष
,
स
भी निवासी–क्वार्टर क्रमांक ए
-13/128, पु
रानी कॉलोनी
, ढे
लवाडीह
, पु
लिस थाना–
बां
कीमोंगरा
, त
हसील–कटघोरा
, जि
ला–कोरबा
(छ
त्तीसगढ़
) ।
-----दा
वाकर्तागण
वि
रूद्घ
1.प्र
मोद कुमार शुक्ला
, पि
ता–रमेश कुमार शुक्ला
, आ
यु लगभग
26 व
र्ष
, नि
वासी
-क्
वार्टर क्रमांक
एच.पी.टी.-18, सिं
चाई कॉलोनी
, आई.टी.आई. चौ
की
-रा
मपुर
, पु
लिस थाना
-को
तवाली
,
त
हसील एवं जिला–कोरबा
(छ
त्तीसगढ़
) ।
(दो
षी वाहन स्कॉर्पियो क्रमांक
-सी.जी.-12-ए.जे.-7018 का
वा
हन चालक
)
2.मो
हम्मद सज्जाद अली
, पि
ता–सराफत
, नि
वासी–एल
.आई.जी.-156, आर.पी. न
गर
, को
रबा
,
त
हसील
ए
वं जिला–कोरबा
(छ
त्तीसगढ़
) ।
(दो
षी वाहन स्कॉर्पियो क्रमांक
-सी.जी.-12-ए.जे.-7018 का
पं
जीकृत स्वामी
)
3.द
ओ
रिएंटल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड
, द्वा
रा शाखा प्रबंधक
, शा
खा कार्यालय
, टी.पी. न
गर
,
को
रबा
, जि
ला–कोरबा
(छ
त्तीसगढ़
) ।
(दो
षी वाहन स्कॉर्पियो क्रमांक
-सी.जी.-12-ए.जे.-7018 का
बी
मा कंपनी
)
-----प्रत्
यर्थीगण
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{MA(C) No. 149 of 2021 & 207 of 2021}
अ
पीलार्थीगण
/दा
वाकर्तागण द्वारा
:सु
श्री सोनिया कुलदीप
, अ
धिवक्ता ।
प्रत्
यर्थी क्रमांक
-1 ए
वं
2 द्वा
रा
:श्री
टी
.आर. प
टेल एवं श्री विकास कुमार पाण्डेय
, अ
धिवक्ता ।
प्रत्
यर्थी क्रमांक
-3 द्वा
रा
:श्री
भोलानाथ नन्दे
, अ
धिवक्ता ।
ए
वं
वि
विध अपील
( क्ष
तिपूर्ति
) क्र
मांक
-207/2021
1.द
ओ
रिएंटल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड
, द्वा
रा शाखा प्रबंधक
, शा
खा कार्यालय
, टी.पी. न
गर
,
को
रबा
(छ
त्तीसगढ़
), अ
धिकृत हस्ताक्षरकर्ता
/उ
प प्रबंधक
, टी.पी. ह
ब
, ओ
रिएंटल इंश्योरेंस
कं
पनी लिमिटेड
, टी.पी. ह
ब कार्यालय
, प्र
थम तल
, रा
मा ट्रेड सेंटर
, पु
राना बस स्टैण्ड के पास
,
बि
लासपुर
, जि
ला–बिलासपुर
(छ
त्तीसगढ़
) ।
(दो
षी वाहन स्कॉर्पियो क्रमांक
-सी.जी.-12-ए.जे.-7018 का
बीमा कंपनी
)
-----अ
पीलार्थी
वि
रूद्घ
1.श्री
मती गंगाबाई साहू
, प
ति–स्वर्गीय भरत साहू
, आ
यु लगभग
39 व
र्ष
,
2.र
विकुमार साहू
, पि
ता–स्वर्गीय भरत साहू
, आ
यु लगभग
22 व
र्ष
,
3.वि
नोद कुमार साहू
, पि
ता–स्वर्गीय भरत साहू
, आ
यु लगभग
20 व
र्ष
,
4.म
नोज कुमार साहू
, पि
ता–स्वर्गीय भरत साहू
, आ
यु लगभग
18 व
र्ष
,
5.श्री
मती गंगाबाई साहू
, प
ति–स्वर्गीय धर्मलाल साहू
, आ
यु लगभग
63 व
र्ष
,
स
भी निवासी–क्वार्टर क्रमांक ए
-13/128, पु
रानी कॉलोनी
, ढे
लवाडीह
, पु
लिस थाना–
बां
कीमोंगरा
, त
हसील–कटघोरा
, जि
ला–कोरबा
(छ
त्तीसगढ़
) । (-----दा
वाकर्तागण
)
6.प्र
मोद कुमार शुक्ला
, पि
ता–रमेश कुमार शुक्ला
, आ
यु लगभग
26 व
र्ष
, नि
वासी–क्वार्टर क्रमांक
एच.पी.टी.-18, सिं
चाई कॉलोनी
, आई.टी.आई. चौ
की
, रा
मपुर
, था
ना
, त
हसील एवं जिला–
को
रबा
(छ
त्तीसगढ़
) ।
(दो
षी वाहन स्कॉर्पियो क्रमांक
-सी.जी.-12-ए.जे.-7018 का
वा
हन चालक
)
7.मो
हम्मद सज्जाद अली
, पि
ता–सराफत
, नि
वासी–एल
.आई.जी.-156, आर.पी. न
गर
, को
रबा
,
त
हसील एवं जिला–कोर
बा
(छ
त्तीसगढ़
) ।
(दो
षी वाहन स्कॉर्पियो क्रमांक
-सी.जी.-12-ए.जे.-7018 का
पं
जीकृत स्वामी
)
-----प्रत्
यर्थीगण
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{MA(C) No. 149 of 2021 & 207 of 2021}
अ
पीलार्थी द्वारा
:श्री
भोलानाथ नन्दे
, अ
धिवक्ता ।
प्रत्
यर्थी क्रमांक
-1 से
5 द्वा
रा
:सु
श्री सोनिया कुलदीप
, अ
धिवक्ता ।
प्रत्
यर्थी क्रमांक
-6 ए
वं
7 द्वा
रा
:श्री
टी
.आर. प
टेल एवं श्री विकास कुमार पाण्डेय
, अ
धिवक्तागण ।
न्
यायमूर्ति श्री संजय कुमार जायसवाल
!! सी.ए.वी. नि
र्णय
!!
1.मो
टर यान अधिनियम
, 1988 की
धारा
173 के
अंतर्गत प्रस्तुत उपर्युक्त दोनों अपील में
द्वि
तीय मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण
, क
टघोरा
, जि
ला
-को
रबा
(छ
त्तीसगढ़
) द्वा
रा मोटर
दु
र्घटना दावा प्रकरण क्रमांक
-38/2019 "श्री
मती गंगाबाई साहू एवं अन्य विरुद्ध प्रमोद
कु
मार शुक्ला एवं अन्य
" में
दिनांक
08.12.2020 को
पारित अधिनिर्णय को चुनौती दी
गई
है । जिसे आगे संक्षेप में
"प्रश्
नाधीन अधिनिर्णय
" से
संबाेधित किया जा रहा है । दोनों
अ
पीलें एक ही अधिनिर्णय से उद्भूत होने के कारण उनका निराकरण संयुक्त रूप से किया
जा
रहा है ।
2.य
ह निर्विवादित है कि स्कॉर्पियो वाहन क्रमांक सी
.जी.-12-ए.जे.-7018 (जि
से आगे
"दो
षी वाहन
" से
संबाेधित किया जा रहा है
) का
चालक प्रमोद कुमार शुक्ला
, पं
जीकृत
स्
वामी मोहम्मद सज्जाद अली तथा बीमाकर्ता द ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड है ।
3.प्रकर
ण के तथ्य
, सं
क्षेप में
, इ
स प्रकार हैं कि दिनांक
08.08.2018 को
भरत साहू
(मृ
तक
) अ
पने रिश्तेदार प्रहलाद साहू
(आ
वेदक साक्षी क्रमांक
-2) के
साथ उसकी
मो
टरसाइकिल पर पीछे बैठकर मानिकपुर
, को
रबा से अपने निवास ढेलवाडीह कॉलोनी जा
र
हा था । जब वे सी
.एस.ई.बी. प्
लांट गेट के समीप मुख्य मार्ग पर पहुँचे
, उ
सी समय प्रमोद
कु
मार शुक्ला द्वारा
"दो
षी वाहन
" को
तीव्र एवं लापरवाहीपूर्वक चलाते हुए आया जिसकी
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{MA(C) No. 149 of 2021 & 207 of 2021}
ट
क्कर से भरत साहू को गंभीर चोटें आईं और उसकी घटनास्थल पर ही मृत्यु हो गई ।
घ
टना की सूचना पर थाना दर्री में अपराध क्रमांक
-173/2018 पं
जीबद्ध किया गया तथा
वि
वेचना पूर्ण होने के उपरांत
"दो
षी वाहन
" के
चालक के विरुद्ध अभियोगपत्र प्रस्तुत किया
ग
या ।
4.मृ
तक की पत्नी
, ती
न पुत्र एवं माता ने मोटर यान अधिनियम
, 1988 की
धारा
166 के
अं
तर्गत प्रतिकर हेतु दावा आवेदन प्रस्तुत किया । अधिकरण ने अभिलेख पर उपलब्ध
मौ
खिक एवं दस्तावेजी साक्ष्य के परीक्षण उपरांत यह निष्कर्ष अभिलिखित किया कि
दु
र्घटना
"दो
षी वाहन
" के
चालक द्वारा वाहन को तीव्र एवं लापरवाहीपूर्वक चलाने के कारण
का
रित हुई
, जि
समें भरत साहू की मृत्यु हुई । अधिकरण ने यह भी पाया कि बीमा पॉलिसी
की
किसी शर्त का उल्लंघन प्रमाणित नहीं हुआ है
, फल
तः प्रतिकर का भुगतान करने का
दा
यित्व बीमा कंपनी का है । अधिकरण ने प्रदर्श पी
-13 (वे
तन पर्ची
) के
आधार पर मृतक
को
एस
.ई.सी.एल., ढे
लवाडीह कॉलरी एरिया
, को
रबा में फैन ऑपरेटर के पद पर कार्यरत
मा
नते हुए उसकी मासिक आय
₹76,745.22/- नि
र्धारित की । प्रदर्श पी
-16, पी-
17 ए
वं पी
-18 के
अनुसार उसकी जन्मतिथि
26.09.1977 पा
ई गई । दुर्घटना की तिथि
प
र उसकी आयु
40 व
र्ष
10 मा
ह
13 दि
न होने के आधार पर उसे
41 व
र्ष मानते हुए
30%
भा
वी संभावनाओं का लाभ प्रदान किया गया । पाँच आश्रितों को ध्यान में रखते हुए
व्
यक्तिगत एवं जीवन
-नि
र्वाह व्यय के लिए
1/4 की
कटौती तथा
14 का
गुणक लागू कर
अन्
य परंपरागत मदों के अंतर्गत ₹
70,000/- जो
ड़ते हुए कुल ₹
1,19,83,455/- का
प्र
तिकर
, दा
वा आवेदन की तिथि से अदायगी तक
7% प्र
तिवर्ष ब्याज सहित प्रदान किया
ग
या ।
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त
र्क
5."प्रश्
नाधीन अधिनिर्णय
" से
क्षुब्ध होकर बीमा कंपनी ने अपील प्रस्तुत कर मुख्यतः
"दो
षी
वा
हन
" की
दुर्घटना में संलिप्तता
, मृ
तक की आय के निर्धारण तथा दावाकर्तागण की
आ
श्रितता संबंधी निष्कर्षों को चुनौती दी है । उनका तर्क है कि दावाकर्तागण के पक्ष में
ज्
यादा प्रतिकर निर्धारित किया गया है । दूसरी ओर
, दा
वाकर्तागण ने पृथक अपील प्रस्तुत
कर प्र
तिकर राशि में वृद्धि की मांग करते हुए अभिकथित किया है कि अधिकरण द्वारा मृतक
की
आयु के अनुरूप गुणक का सही निर्धारण न किए जाने से उन्हें उचित प्रतिकर प्राप्त नहीं
हु
आ है ।
6.उभ
यपक्ष के तर्क श्रवण किए गए तथा अभिलेख का परिशीलन किया गया ।
दो
षी वाहन की संलिप्तता
7.बी
मा कंपनी के विद्वान अधिवक्ता ने तर्क प्रस्तुत किया कि देहाती मर्ग सूचना में
"दो
षी
वा
हन
" का
पंजीयन क्रमांक अंकित नहीं है । इसके अतिरिक्त
, उ
क्त वाहन की जप्ती दुर्घटना
के
लगभग ढाई माह पश्चात् की गई । उन्होंने यह भी तर्क दिया कि प्रत्यक्षदर्शी साक्षी
प्र
हलाद साहू ने अपने प्रतिपरीक्षण में स्वीकार किया है कि पुलिस द्वारा जप्ती के उपरांत
था
ना परिसर में उसे वाहन दिखाकर बताया गया था कि उसी वाहन से दुर्घटना हुई थी ।
ऐ
सी परिस्थितियों में
"दो
षी वाहन
" की
दुर्घटना में संलिप्तता संदेह से परे प्रमाणित नहीं
मा
नी जा सकती । विद्वान अधिवक्ता द्वारा
प्र
थम
न्
यायदृष्टांत
Usha Devi and others v.
New India Insurance Company Limited and others, 2019 SCC OnLine
SC 2425, द्वि
तीय
न्
यायदृष्टांत माननीय मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के
United India
Insurance Company Limited v. Smt. Babli Yadav and others (Misc.
Appeal No. 6059 of 2023 नि
र्णय दिनांक
28.03.2025) त
था
तृ
तीय
न्
यायदृष्टांत
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{MA(C) No. 149 of 2021 & 207 of 2021}
Anil and others v. New India Assurance Company Limited and others,
(2018) 2 SCC 482 का
हवाला दिया है ।
8.इ
सके विपरीत
, दा
वाकर्तागण के विद्वान अधिवक्ता ने तर्क प्रस्तुत किया कि दुर्घटना के
प्रत्
यक्षदर्शी साक्षी प्रहलाद साहू ने अपने न्यायालयीन कथन में स्पष्ट रूप से अभिकथित
कि
या है कि दुर्घटना
"दो
षी वाहन
" से
ही कारित हुई थी । उसके कथन की पुष्टि पुलिस
वि
वेचना के अंतिम प्रतिवेदन तथा उसके अन्य दस्तावेजों से भी होती है । उनका आगे
त
र्क है कि बीमा कंपनी की ओर से
"दो
षी वाहन
" की
दुर्घटना में संलिप्तता का खण्डन करने
हे
तु न तो वाहन चालक का परीक्षण कराया गया और न ही पंजीकृत स्वामी की ओर से
को
ई साक्ष्य प्रस्तुत किया गया । अतः अधिकरण द्वारा अभिलिखित निष्कर्ष अभिलेख पर
उ
पलब्ध मौखिक एवं दस्तावेजी साक्ष्य के अनुरूप होने से उसमें हस्तक्षेप की आवश्यकता
न
हीं है ।
9.दा
वाकर्ता पक्ष की ओर से मृतक की पत्नी श्रीमती गंगाबाई
(आ
वेदक साक्षी क्रमांक
-1) का
प
रीक्षण कराया गया है । यद्यपि वह दुर्घटना की प्रत्यक्षदर्शी साक्षी नहीं है
, त
थापि उसके
द्वा
रा दुर्घटना से संबंधित पुलिस विवेचना के चालानी दस्तावेज
, प्र
दर्श पी
-1 से
प्रदर्श पी
-
11 त
क
, अ
भिलेख पर प्रस्तुत किए गए हैं । इसके अतिरिक्त
, दा
वाकर्ता पक्ष ने प्रहलाद
सा
हू
(आ
वेदक साक्षी क्रमांक
-2) का
परीक्षण कराया है
, जो
दुर्घटना का प्रत्यक्षदर्शी साक्षी
है
। उसके द्वारा दी गई सूचना पर देहाती मर्ग सूचना
(प्र
दर्श पी
-3) द
र्ज की गई
, जि
समें
स
फेद रंग की स्कॉर्पियो वाहन से दुर्घटना कारित होना उल्लेखित है । विवेचना पूर्ण होने के
उ
परांत पुलिस द्वारा
"दो
षी वाहन
" के
चालक के विरुद्ध अंतिम प्रतिवेदन
(प्र
दर्श पी
-1)
प्रस्
तुत किया गया
, जि
समें प्रहलाद साहू को प्रत्यक्षदर्शी साक्षी के रूप में सूचीबद्ध किया
ग
या है । न्यायालय के समक्ष भी प्रहलाद साहू ने अपने कथन में स्पष्ट रूप से अभिकथित
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{MA(C) No. 149 of 2021 & 207 of 2021}
कि
या है कि दुर्घटना
"दो
षी वाहन
" से
ही कारित हुई थी । उसके उक्त कथन का
प्र
तिपरीक्षण में कोई खण्डन नहीं किया जा सका ।
10.पु
लिस द्वारा विवेचना पश्चात प्रस्तुत अभियोग
-प
त्र के साक्ष्यिक मूल्य के बिंदु पर
मा
ननीय
उच्च
तम न्यायालय द्वारा
ICICI Lombard General Insurance Company Limited
v. Rajani Sahu and Others, (2025) 2 SCC 599 के
निर्णय की कण्डिका
-8 से
10 में
निम्नानुसार विधि प्रतिपादित की गई हैः
-
“8As regards the reliability of charge-sheet and other
documents collected by the police during the investigation
in motor accident cases, this Court in Mangla Ram v.
Oriental Insurance Co. Ltd. [Mangla Ram v. Oriental
Insurance Co. Ltd., (2018) 5 SCC 656 : (2018) 3 SCC (Civ)
335 : (2018) 2 SCC (Cri) 819 : 2018 INSC 311] , held in
para 27, thus : (SCC p. 672)
“27.Another reason which weighed with the High
Court to interfere in the first appeal filed by
Respondents 2 and 3, was absence of finding
by the Tribunal about the factum of negligence
of the driver of the subject jeep. Factually, this
view is untenable. Our understanding of the
analysis done by the Tribunal is to hold that
Jeep No. RST 4701 was driven rashly and
negligently by Respondent 2 when it collided
with the motorcycle of the appellant leading to
the accident. This can be discerned from the
evidence of witnesses and the contents of the
charge-sheet filed by the police, naming
Respondent 2. This Court in a recent decision
in Dulcina Fernandes [Dulcina Fernandes v.
Joaquim Xavier Cruz, (2013) 10 SCC 646 :
(2014) 1 SCC (Civ) 73 : (2014) 1 SCC (Cri)
13] , noted that the key of negligence on the
part of the driver of the offending vehicle as
set up by the claimants was required to be
decided by the Tribunal on the touchstone of
preponderance of probability and certainly not
by standard of proof beyond reasonable doubt.
Suffice it to observe that the exposition in the
judgments already adverted to by us, filing of
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{MA(C) No. 149 of 2021 & 207 of 2021}
charge-sheet against Respondent 2 prima facie
points towards his complicity in driving the
vehicle negligently and rashly. Further, even
when the accused were to be acquitted in the
criminal case, this Court opined that the same
may be of no effect on the assessment of the
liability required in respect of motor accident
cases by the tribunal.”
9.It is true that the Tribunal had looked into the oral and
documentary evidence including the FIR, final report and
such other documents prepared by the police in connection
with the accident in question. The Tribunal had also taken
note of the fact that based on the final report, the driver of
the offending truck was tried and found guilty for rash and
negligent driving. The High Court took note of such
aspects and found no illegality in the procedure adopted
by the Tribunal and consequently dismissed the appeal.
10.In the contextual situation it is relevant to refer to a
decision of this Court in Mathew Alexander v. Mohd. Shafi
[Mathew Alexander v. Mohd. Shafi, (2023) 13 SCC 510 :
2023 INSC 621] , this Court held thus : (SCC p. 514, para
12)
“12. …A holistic view of the evidence has to be
taken into consideration by the Tribunal and
strict proof of an accident caused by a
particular vehicle in a particular manner need
not be established by the claimants. The
claimants have to establish their case on the
touchstone of preponderance of probabilities.
The standard of proof beyond reasonable
doubt cannot be applied while considering the
petition seeking compensation on account of
death or injury in a road traffic accident. To
the same effect is the observation made by this
Court in Dulcina Fernandes v. Joaquim Xavier
Cruz [Dulcina Fernandes v. Joaquim Xavier
Cruz, (2013) 10 SCC 646 : (2014) 1 SCC (Civ)
73 : (2014) 1 SCC (Cri) 13] which has referred
to the aforesaid judgment in Bimla Devi [Bimla
Devi v. Himachal RTC, (2009) 13 SCC 530 :
(2009) 5 SCC (Civ) 189 : (2010) 1 SCC (Cri)
1101] .”
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{MA(C) No. 149 of 2021 & 207 of 2021}
11.वि
चाराधीन
प्रकर
ण के तथ्य एवं अभिलेख पर उपलब्ध साक्ष्य के समग्र परिशीलन से यह
स्
पष्ट है कि प्रहलाद साहू
(आ
वेदक साक्षी क्रमांक
-2), जो
दुर्घटना का प्रत्यक्षदर्शी साक्षी
है, ने
अपने न्यायालयीन कथन में स्पष्ट रूप से अभिकथित किया है कि दुर्घटना
"दो
षी
वा
हन
" से
कारित हुई थी । उसके उक्त कथन की पुष्टि पुलिस विवेचना उपरांत प्रस्तुत
अं
तिम प्रतिवेदन तथा अन्य चालानी दस्तावेजों से भी होती है । इसके विपरीत
, बी
मा
कं
पनी की ओर से
"दो
षी वाहन
" की
दुर्घटना में संलिप्तता का खण्डन करने हेतु कोई
स्
वतंत्र
, वि
श्वसनीय अथवा प्रतिकूल साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया गया है । मात्र इस आधार
प
र कि देहाती मर्ग सूचना में
"दो
षी वाहन
" का
पंजीयन क्रमांक अंकित नहीं है अथवा वाहन
की
जप्ती दुर्घटना के कुछ समय पश्चात् हुई है
, दा
वाकर्ता पक्ष द्वारा प्रस्तुत विश्वसनीय
मौ
खिक एवं दस्तावेजी साक्ष्य को अस्वीकार नहीं किया जा सकता । प्रत्यक्षदर्शी साक्षी
प्र
हलाद साहू के कथन एवं न्यायदृष्टांत
Rajani Sahu (पू
र्वोक्त
) में
प्रतिपादित विधिक
सि
द्धांतों के आलोक में यह न्यायालय पाती है कि
"दो
षी वाहन
" की
दुर्घटना में संलिप्तता के
सं
बंध में अधिकरण द्वारा अभिलिखित निष्कर्ष अभिलेख पर उपलब्ध साक्ष्य के अनुरूप एवं
वि
धिसम्मत है । तथ्यों की भिन्नता के कारण बीमा कंपनी की ओर से प्रस्तुत न्यायदृष्टांत
का
लाभ उन्हें नहीं मिलता । फलस्वरूप
, इ
स संबंध में बीमा कंपनी द्वारा उठाई गई
आ
पत्ति अस्वीकार किए जाने योग्य है ।
मृ
तक की आय
12.बी
मा कंपनी के विद्वान अधिवक्ता ने तर्क प्रस्तुत किया कि प्रदर्श पी
-13 (वे
तन पर्ची
),
प्र
दर्श पी
-14 (आ
यकर विवरणी
) त
था प्रदर्श पी
-15 (फॉ
र्म
-16) में
अंकित आय परस्पर
एक स
मान नहीं है । ऐसी स्थिति में अधिकरण को इन दस्तावेजों में उल्लिखित न्यूनतम
आ
य को ही मृतक की आय के रूप में स्वीकार करना चाहिए था । अतः केवल प्रदर्श पी
-
10 / 18
{MA(C) No. 149 of 2021 & 207 of 2021}
13 के
आधार पर मृतक की मासिक
आ
य
₹76,745.22/- नि
र्धारित
कि
या जाना
उ
चित नहीं है । इसके विपरीत
, दा
वाकर्तागण के विद्वान अधिवक्ता ने तर्क प्रस्तुत किया कि
प्र
दर्श पी
-13 दु
र्घटना से ठीक पूर्ववर्ती माह की वेतन पर्ची है
, जो
दुर्घटना के समय मृतक
द्वा
रा प्राप्त वास्तविक वेतन को प्रदर्शित करती है । अतः अधिकरण द्वारा उसी पर विश्वास
कि
या जाना पूर्णतः न्यायोचित एवं विधिसम्मत है ।
13.अ
भिलेख पर उपलब्ध दस्तावेजों के परिशीलन से यह स्पष्ट है कि प्रदर्श पी
-14 (आ
यकर
वि
वरणी
) ए
वं प्रदर्श पी
-15 (फॉ
र्म
-16) नि
र्धारण वर्ष
2017-18 से
संबंधित दस्तावेज हैं
,
ज
बकि प्रदर्श पी
-13 दु
र्घटना दिनांक
08.08.2018 से
ठीक पूर्ववर्ती माह जुलाई
, 2018
की
वेतन पर्ची है । स्वाभाविक रूप से दुर्घटना के समय मृतक द्वारा प्राप्त वास्तविक
मा
सिक वेतन का सर्वाधिक प्रामाणिक एवं समकालीन साक्ष्य प्रदर्श पी
-13 ही
है । केवल
इ
स आधार पर कि पूर्ववर्ती आयकर संबंधी अभिलेखों में आय का विवरण भिन्न है
, दु
र्घटना
के
समय की वेतन पर्ची की प्रामाणिकता पर संदेह नहीं
किया जा सकता । अतः अधिकरण
द्वा
रा प्रदर्श पी
-13 के
आधार पर मृतक की मासिक आय
₹76,745.22/- नि
र्धारित
कि
या जाना अभिलेख पर उपलब्ध साक्ष्य के अनुरूप एवं पूर्णतः विधिसम्मत है ।
फलस्
वरूप
, इ
स संबंध में अधिकरण के निष्कर्ष में किसी प्रकार के हस्तक्षेप की
आ
वश्यकता नहीं है ।
भा
वी संभावनाएँ
14.ज
हाँ तक मृतक की आयु एवं भावी संभावनाओं का प्रश्न है
, अ
धिकरण ने प्रदर्श पी
-16,
प्र
दर्श पी
-17 ए
वं प्रदर्श पी
-18 के
आधार पर मृतक की आयु
41 व
र्ष मानते हुए
न्
यायदृष्टांत
National Insurance Company Limited v. Pranay Sethi, (2017)
11 / 18
{MA(C) No. 149 of 2021 & 207 of 2021}
16 SCC 680 में
प्रतिपादित विधिक सिद्धांत के अनुरूप उसकी आय में भावी संभावनाओं
के
मद में
30% की
वृद्धि की है । इस संबंध में किसी भी पक्ष द्वारा
30% भा
वी
सं
भावनाओं का लाभ प्रदान किए जाने पर कोई आपत्ति नहीं की गई है । अतः यह
न्
यायालय पाती है कि मृतक की आय में भावी संभावनाओं के मद में
30% की
वृद्धि किया
जा
ना विधिसम्मत है । फलस्वरूप
, इ
स संबंध में अधिकरण द्वारा किया गया निर्धारण
य
थावत रखा जाता है ।
आ
यकर की गणना व कटौती
15.प्र
दर्श पी
-13 (वे
तन पर्ची
) में
उपलब्ध विवरण के अनुसार मृतक की मासिक आय
₹76,745.22/- अ
र्थात् वार्षिक आय ₹
9,20,942.64/- नि
र्धारित होती है ।
उस
की आय में भविष्य की संभावनाओं के मद में
30% वृ
द्धि देय होगी । तदनुसार
,
भ
विष्य की संभावनाओं के मद में ₹
2,76,282.79/- जो
ड़ने पर मृतक की वार्षिक आय
₹11,97,225.43/- नि
र्धारित होती है ।
16.मृ
तक की उक्त वार्षिक आय में से आयकर के रूप में वैधानिक कटौती किया जाना अपेक्षित
है
। वित्तीय वर्ष
2018-19 हे
तु लागू आयकर प्रावधानों के अनुसार आयकर की गणना
नि
म्नानुसार है
:-
आ
यकर स्लैब
आ
यकर दर
कर
योग्य आय
कु
ल कर
₹2,50,000/- त
क
शू
न्य
₹2,50,000.00शू
न्य
₹2,50,001/- से
₹
5,00,000/- 5% ₹2,50,000.00 ₹12,500.00
₹5,00,001/- से
₹
10,00,000/- 20% ₹5,00,000.00₹1,00,000.00
₹10,00,001/- से
अधिक
30% ₹1,97,225.43 ₹59,167.63
कु
ल आयकर
₹1,71,667.63
12 / 18
{MA(C) No. 149 of 2021 & 207 of 2021}
17.अ
तः आयकर कटौती के पश्चात वार्षिक आय ₹
10,25,557.80/-
(₹11,97,225.43 - ₹1,71,667.63) नि
र्धारित होगी ।
आ
श्रितता
18.दा
वाकर्तागण की मृतक पर आश्रितता के संबंध में बीमा कंपनी द्वारा उठाई गई आपत्ति पर
वि
चार किया जा रहा है । अभिलेख पर उपलब्ध मौखिक एवं दस्तावेजी साक्ष्य के आधार
प
र अधिकरण ने मृतक की पत्नी
, ती
न पुत्र तथा उसकी माता सहित कुल पाँच
दा
वाकर्तागण को मृतक पर आश्रित मानते हुए उसके व्यक्तिगत एवं जीवन
-नि
र्वाह व्यय के
म
द में आय का एक
-चौ
थाई
(1/4) भा
ग घटाया है ।
19.बी
मा कंपनी के विद्वान अधिवक्ता ने तर्क प्रस्तुत किया कि दावाकर्तागण में सम्मिलित तीनों
पु
त्र दुर्घटना की तिथि पर वयस्क थे तथा स्वयं आजीविका अर्जित करने में सक्षम थे ।
ऐ
सी स्थिति में उन्हें मृतक पर आश्रित नहीं माना जा सकता । अतः अधिकरण द्वारा पाँच
आ
श्रितों को मानते हुए व्यक्तिगत एवं जीवन
-नि
र्वाह व्यय के लिए आय का एक
-चौ
थाई
(1/4) भा
ग घटाया जाना विधिसम्मत नहीं है । उनके अनुसार इस प्रकरण में केवल
मृ
तक की पत्नी एवं माता को ही आश्रित माना जाना चाहिए था तथा व्यक्तिगत एवं जीवन
-
नि
र्वाह व्यय के लिए आय का एक
-ति
हाई
(1/3) भा
ग घटाया जाना अपेक्षित था ।
20.अ
भिलेख पर उपलब्ध साक्ष्य के परिशीलन से यह स्पष्ट है कि दावाकर्तागण ने तीनों पुत्रों
र
विकुमार साहू
, वि
नोद कुमार साहू एवं मनोज कुमार साहू की आयु क्रमशः
22 व
र्ष
, 20
व
र्ष एवं
18 व
र्ष दर्शाई है । तथापि
, मा
त्र उनके वयस्क होने से यह निष्कर्ष नहीं निकाला
जा
सकता कि वे मृतक पर आश्रित नहीं थे । बीमा कंपनी ने अपने लिखित कथन में भी
ऐ
सा कोई स्पष्ट अभिवचन नहीं किया है कि तीनों पुत्र स्वतंत्र रूप से आजीविका अर्जित कर
13 / 18
{MA(C) No. 149 of 2021 & 207 of 2021}
र
हे थे अथवा आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर थे । इतना ही नहीं
, उ
क्त तथ्य के समर्थन में
बी
मा कंपनी की ओर से कोई मौखिक अथवा दस्तावेजी साक्ष्य भी प्रस्तुत नहीं किया गया
है
। आवेदक साक्षी श्रीमती गंगाबाई के प्रतिपरीक्षण के दौरान भी इस संबंध में कोई प्रभावी
प्रश्
न नहीं किया गया
, जि
ससे यह स्थापित हो सके कि तीनों पुत्र मृतक पर आश्रित ना
हो
कर आत्मनिर्भर थे । ऐसी परिस्थितियों में मात्र अनुमान के आधार पर निष्कर्ष नहीं
नि
काला जा सकता ।
21.इ
स संदर्भ में पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय ने
Narinder Kaur v. Jagmeet
Singh, 2025 ACJ 357 में
यह प्रतिपादित किया है कि आश्रितता का तात्पर्य केवल
आ
र्थिक आश्रितता तक सीमित नहीं है । भारतीय सामाजिक व्यवस्था में संतान एवं
मा
ता
-पि
ता जीवन के विभिन्न चरणों में एक
-दू
सरे पर आर्थिक
, शा
रीरिक
, भा
वनात्मक एवं
म
नोवैज्ञानिक रूप से भी आश्रित हो सकते हैं । अतः केवल संतान के वयस्क होने के
आ
धार पर उन्हें आश्रितता से वंचित नहीं किया जा सकता । उक्त निर्णय की कण्डिका
22 से
24 में
प्रतिपादित विधिक सिद्धांत वर्तमान विवाद के निराकरण के लिए प्रासंगिक
हैं
। जो कि निम्नानुसार हैः
-
“22.It is submitted by learned counsel for the Insurance
Company that since the sons are grown up children
of deceased and they ought to be settled in their
lives and also father of deceased Karnail Singh
ought to have his own source of livelihood,
therefore, they were not dependent upon the
earning of the deceased and therefore,
compensation ought to be denied them. However,
the aforesaid submission is not tenable.
23.No doubt, the sons of both the deceased are major
and even compensation has been sought at the
instance of Balbir Singh, father of deceased Karnail
Singh, but out rightly it cannot be concluded about
they being not dependents upon the deceased. It
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{MA(C) No. 149 of 2021 & 207 of 2021}
should be noticed that in the Indian Society the
children as well as the parents remain dependents
upon each other at various stages of life. It is
pertinent to mention that the word ‘dependent has
a different meaning in different connotations.
Some may be dependent in terms of money and
others may be dependent in terms of service.
24.Thus, dependency is a relative criteria to claim
compensation for loss of dependency. It does not
mean financial only. It also includes gratuitous
service dependency, physical dependency,
emotional dependency, psychological dependency
and so on and so forth, which can never be equated
in term of money. Thus considering the same, even
the major sons of both the deceased as well as
father of deceased Karnail Singh ought not to be
deprived of the compensation. ………”
(Emphasis supplied)
22.व
र्तमान प्रकरण में बीमा कंपनी यह स्थापित करने में पूर्णतः असफल रही है कि दुर्घटना की
ति
थि पर मृतक के तीनों पुत्र स्वयं आजीविका अर्जित कर आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर थे ।
के
वल उनके वयस्क होने के आधार पर उन्हें मृतक पर अनाश्रित नहीं माना जा सकता ।
अ
भिलेख पर उपलब्ध मौखिक एवं दस्तावेजी साक्ष्य से यह स्पष्ट है कि मृतक की पत्नी
,
ती
नों पुत्र तथा उसकी माता सभी मृतक पर आश्रित थे ।
Narinder Kaur (पू
र्वोक्त
) में
प्र
तिपादित विधिक सिद्धांत के आलोक में यह न्यायालय पाती है कि अधिकरण द्वारा पाँच
आ
श्रितों को दृष्टिगत रखते हुए मृतक को व्यक्तिगत एवं जीवन
-नि
र्वाह व्यय के लिए आय
का
एक
-चौ
थाई
(1/4) भा
ग घटाया जाना पूर्णतः न्यायोचित एवं विधिसम्मत है ।
फलस्
वरूप
, इ
स संबंध में बीमा कंपनी द्वारा उठाई गई आपत्ति स्वीकार किए जाने योग्य
न
हीं है ।
15 / 18
{MA(C) No. 149 of 2021 & 207 of 2021}
गु
णांक
23.गु
णक के संबंध में दावाकर्तागण द्वारा उठाई गई आपत्ति पर विचार किया जा रहा है ।
दा
वाकर्तागण के विद्वान अधिवक्ता ने तर्क प्रस्तुत किया कि प्रदर्श पी
-16, प्र
दर्श पी
-17 ए
वं
प्र
दर्श पी
-18, जो
क्रमशः मृतक के पैन कार्ड
, प
रिचय पत्र एवं आधार कार्ड हैं
, के
अनुसार
मृ
तक की जन्मतिथि
26.09.1977 है
। फलस्वरूप दुर्घटना दिनांक
08.08.2018 को
उस
की आयु
40 व
र्ष
10 मा
ह
13 दि
न थी । इसके बावजूद अधिकरण ने मृतक की आयु
41 व
र्ष मानते हुए
14 का
गुणक लागू किया है । उनका तर्क है कि दुर्घटना की तिथि तक
मृ
तक ने
41 व
र्ष की आयु पूर्ण नहीं की थी
, अ
तः उसकी आयु
40 व
र्ष मानते हुए
Sarla
Verma v. Delhi Transport Corporation, (2009) 6 SCC 121 में
प्रतिपादित
सि
द्धांत के अनुसार
15 का
गुणक लागू किया जाना चाहिए था । इसके विपरीत
, बी
मा
कं
पनी के विद्वान अधिवक्ता ने अधिकरण के निष्कर्ष का समर्थन किया ।
24.य
ह न्यायालय अपीलार्थी के तर्क से सहमत है कि दुर्घटना दिनांक
08.08.2018 को
उस
की आयु
40 व
र्ष
10 मा
ह
13 दि
न थी
, अ
र्थात् उसने
41 व
र्ष की आयु पूर्ण नहीं की
थी
। ऐसी स्थिति में अधिकरण द्वारा उसकी आयु
41 व
र्ष मानते हुए
14 का
गुणक लागू
कि
या जाना अभिलेख पर उपलब्ध साक्ष्य एवं विधि के अनुरूप नहीं है ।
Sarla Verma
(पू
र्वोक्त
), जि
से
National Insurance Company Limited v. Pranay Sethi,
(2017) 16 SCC 680 में
अनुमोदित किया गया है
, में
प्रतिपादित विधिक सिद्धांत के
अ
नुसार
40 व
र्ष की आयु होने पर
15 का
गुणक लागू किया जाना अपेक्षित है ।
फलस्
वरूप
, य
ह न्यायालय पाती है कि इस सीमा तक
"प्रश्
नाधीन अधिनिर्णय
" सं
शोधन
यो
ग्य है । अतः मृतक की आयु
40 व
र्ष मानते हुए
15 का
गुणक लागू किया जाता है ।
16 / 18
{MA(C) No. 149 of 2021 & 207 of 2021}
प्र
तिकर की अंतिम गणना
25.उ
पर्युक्त समस्त विवेचना के आधार पर यह न्यायालय पाती है कि अधिकरण द्वारा मृतक
की
मासिक आय ₹
76,745.22/- नि
र्धारित करना तथा व्यक्तिगत एवं जीवन
-नि
र्वाह
व्
यय के मद में आय का
1/4 भा
ग घटाना अभिलेख पर उपलब्ध साक्ष्य एवं विधि के
अ
नुरूप है। तथापि
, अ
धिकरण ने मृतक की वार्षिक आय ₹
9,20,942.64/- में
से
₹48,162/- आ
यकर की कटौती कर उसके पश्चात भावी संभावनाओं के मद में
30%
की
वृद्धि की है। जबकि आयकर की गणना भावी संभावनाओं सहित वार्षिक आय पर की
जा
नी चाहिए। साथ ही
, मृ
तक की आयु
40 व
र्ष
10 मा
ह
13 दि
न होने के बावजूद उसे
41
व
र्ष मानते हुए
14 का
गुणक लागू किया जाना भी विधिसम्मत नहीं है। चूँकि दुर्घटना की
ति
थि तक मृतक ने
41 व
र्ष की आयु पूर्ण नहीं की थी
, अ
तः उसकी आयु
40 व
र्ष मानते
हु
ए
15 का
गुणक लागू किया जाना न्यायोचित एवं विधिसम्मत है । न्यायदृष्टांत
Magma
General Insurance Co. Ltd. v. Nanu Ram @ Chuhru Ram & Ors.,
(2018) 18 SCC 130 इ
सके अतिरिक्त
, दा
वाकर्तागण साहचर्यता की हानि के मद में
₹40,000/- प्र
ति दावाकर्ता के अनुसार प्रतिकर प्राप्त करने के अधिकारी हैं ।
फलस्
वरूप
, दा
वाकर्तागण को देय प्रतिकर राशि का पुनर्निर्धारण निम्नानुसार किया जाता
है-
क्र.म
द
अ
धिकरण द्वारा अधिनिर्णीत
प्र
तिकर
इ
स न्यायालय द्वारा
अ
धिनिर्णीत प्रतिकर
1वा
र्षिक आय
₹9,20,942.64 ₹9,20,942.64
2
अ
धिकरण द्वारा आयकर
क
टौती पश्चात वार्षिक शुद्ध
आ
य
₹8,72,780.64
(₹9,20,942.64 – ₹48,162)
-
3भा
वी संभावनाएँ
(30%) ₹2,61,834.19 ₹2,76,282.79
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क्र.म
द
अ
धिकरण द्वारा अधिनिर्णीत
प्र
तिकर
इ
स न्यायालय द्वारा
अ
धिनिर्णीत प्रतिकर
4
भा
वी संभावनाएँ जोड़ने के
प
श्चात वार्षिक आय
₹11,34,614.83 ₹11,97,225.43
5
इ
स न्यायालय द्वारा आयकर
क
टौती पश्चात शेष राशि
- ₹10,25,557.80
6
व्
यक्तिगत एवं जीवन
-नि
र्वाह
व्
यय हेतु
1/4 क
टौती पश्चात
वा
र्षिक आश्रितता
₹8,50,961.12 ₹7,69,168.35
7
गु
णक पश्चात आश्रितता की
कु
ल हानि
₹1,19,13,455.68
(गु
णक–
14)
₹1,15,37,525.25
(गु
णक–
15)
8सा
हचर्यता की हानि
₹40,000.00 ₹2,00,000.00
9सं
पदा की हानि
₹15,000.00 ₹15,000.00
10दा
ह
-सं
स्कार व्यय
₹15,000.00 ₹15,000.00
कु
ल प्रतिकर
₹1,19,83,455.68 ₹1,17,67,525.00
नि
ष्कर्ष
26.उ
पर्युक्त पुनर्गणना के अनुसार दावाकर्तागण कुल
₹1,17,67,525/- (रु
पये एक करोड़
सत्र
ह लाख सड़सठ हजार पाँच सौ पच्चीस मात्र
) प्र
तिकर प्राप्त करने के अधिकारी हैं ।
चूँ
कि अधिकरण द्वारा कुल
₹1,19,83,455/- प्र
तिकर अधिनिर्णीत किया गया था
, अ
तः
इ
स न्यायालय द्वारा की गई पुनर्गणना के अनुसार प्रतिकर राशि में वृद्धि न होकर
₹2,15,930/- की
कमी होती है ।
27.प
रिणामस्वरूप
, बी
मा कंपनी द्वारा प्रस्तुत विविध अपील
(क्ष
तिपूर्ति
) क्र
मांक
-207/2021
आं
शिक रूप से स्वीकार
तथा दावाकर्तागण द्वारा प्रस्तुत विविध अपील
(क्ष
तिपूर्ति
)
क्र
मांक
-149/2021 नि
रस्त
की जाती है ।
18 / 18
{MA(C) No. 149 of 2021 & 207 of 2021}
28.फलस्
वरूप
, प्र
तिकर राशि ₹
1,19,83,455/- के
बजाय ₹
1,17,67,525/- नि
र्धारित
की
जाती है जो दावाकर्तागण प्राप्त करेंगे । शेष शर्तें यथावत् रहेंगे ।
29.र
जिस्ट्री को निर्देशित किया जाता है कि इस निर्णय के फलस्वरूप दावाकर्तागण के पक्ष में
स्
वीकृत अतिरिक्त प्रतिकर राशि के संबंध में उन्हें विधिवत् सूचित किया जाए । इस
प्र
योजनार्थ
, आ
वश्यक होने पर संबंधित क्षेत्र
, ज
हाँ दावाकर्तागण निवास करते हैं
, के
जिला
वि
धिक सेवा प्राधिकरण के सचिव के समन्वय से पैरालीगल स्वयंसेवकों की सहायता प्राप्त
की
जा सकती है ।
30.नि
र्णय की प्रति के साथ अधिकरण का अभिलेख शीघ्रतापूर्वक आवश्यक कार्यवाही हेतु
सू
चनार्थ व पालनार्थ वापस प्रेषित हो ।
स
ही
/-
(सं
जय कुमार जायसवाल
)
न्
यायाधीश
पो
मन
In a significant ruling concerning **Motor Accident Claims** and related **Compensation Appeals**, the Chhattisgarh High Court recently adjudicated on two intertwined cases, MA(C) No. 149 of 2021 and MA(C) No. 207 of 2021. This joint judgment, now comprehensively available on CaseOn, offers critical clarity on the assessment of damages in fatal accident cases under the Motor Vehicles Act, 1988.
The case stemmed from a motor vehicle accident on August 8, 2018, which tragically resulted in the death of Bharat Sahu. His wife, three sons, and mother filed a claim for compensation. The Motor Accident Claims Tribunal (MACT), Katghora, Korba, awarded a total compensation of ₹1,19,83,455/- with 7% interest. Both the insurer (Oriental Insurance Company Limited) and the claimants filed appeals, challenging various aspects of the Tribunal's award.
The primary issues before the Chhattisgarh High Court were:
The High Court's decision was guided by several established legal principles and precedents:
The insurer contended that the offending vehicle's involvement was not conclusively proven, citing the absence of its registration number in the initial report and delayed seizure. However, the High Court upheld the Tribunal's finding, emphasizing the eyewitness testimony of Prahlad Sahu and corroborating police documents. It reiterated that in accident claims, the standard of proof is based on a preponderance of probabilities, which was met in this case.
The Tribunal had assessed the deceased's monthly income at ₹76,745.22 based on a salary slip from July 2018 (Exhibit P-13). The insurer argued for consideration of lower income shown in previous tax returns (Exhibit P-14) and Form-16 (Exhibit P-15). The High Court, however, affirmed the Tribunal's reliance on the most recent salary slip, considering it the most authentic and contemporaneous evidence of actual income at the time of the accident.
The court agreed with the 30% addition for future prospects, as per the Pranay Sethi judgment, increasing the annual income significantly. It then proceeded to calculate income tax on this enhanced annual income, leading to a net annual income of ₹10,25,557.80 after a deduction of ₹1,71,667.63 for tax.
The Tribunal considered five dependents (wife, three sons, and mother) and applied a 1/4th deduction for the deceased's personal and living expenses. The insurer challenged this, arguing that the adult sons were not dependents and thus a 1/3rd deduction should apply. The High Court, referencing Narinder Kaur v. Jagmeet Singh, highlighted that dependency extends beyond mere financial support to include physical, emotional, and psychological aspects within the Indian social fabric. It concluded that merely being an adult does not preclude dependency, thereby upholding the 1/4th deduction for personal expenses for five dependents.
For legal professionals seeking swift insights into such nuanced rulings, CaseOn.in offers invaluable 2-minute audio briefs. These concise summaries enable quick analysis of complex judgments like this one, ensuring legal practitioners and students stay abreast of the latest judicial interpretations without sifting through lengthy texts.
A crucial correction was made regarding the multiplier. The deceased's date of birth was September 26, 1977, and the accident occurred on August 8, 2018. This placed his age at 40 years, 10 months, and 13 days. The Tribunal had erroneously considered him 41 years old and applied a multiplier of 14. The High Court, adhering to the principles laid down in Sarla Verma, determined the correct age group for compensation to be 40 years, thus applying a multiplier of 15. This adjustment significantly impacted the 'loss of dependency' calculation.
The court also enhanced the 'Loss of Consortium'. While the Tribunal awarded a lump sum of ₹40,000, the High Court, following Magma General Insurance, awarded ₹40,000 to each of the five claimants, totaling ₹2,00,000 for loss of consortium. Compensation for 'Loss of Estate' and 'Funeral Expenses' remained at ₹15,000 each.
After a comprehensive re-assessment of all components, the Chhattisgarh High Court determined the total compensation amount to be ₹1,17,67,525/-. This revised figure represented a slight reduction of ₹2,15,930/- from the Tribunal's original award of ₹1,19,83,455/-. Consequently, the insurer's appeal (MA(C) No. 207/2021) was partly allowed, while the claimants' appeal (MA(C) No. 149/2021) was dismissed.
The original judgment by the Chhattisgarh High Court dealt with cross-appeals arising from a motor accident claim. The court meticulously re-evaluated the evidence and applied established legal precedents to various aspects of compensation. Key modifications included correcting the multiplier based on the precise age of the deceased, enhancing the 'loss of consortium' for multiple claimants, and affirming the income and dependency assessments made by the Tribunal, albeit with a detailed re-calculation for future prospects and income tax. The final award by the High Court adjusted the overall compensation to ₹1,17,67,525/-.
This judgment serves as a vital reference for legal professionals and students specializing in motor accident claims for several reasons:
All information provided in this analysis is for informational purposes only and does not constitute legal advice. While efforts have been made to ensure accuracy, readers are advised to consult with a qualified legal professional for specific legal concerns or decisions.
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